Tapasya (तपस्या)

Guru

Mahashraman Chalisa &Aarti

श्री महाश्रमण चालीसा रचनाकार-मुनि श्री कमल कुमार जी ।। दोहा ।। महिमा गुरू महाश्रमण की, फैल रही चहुं ओर। भूतल में उतरी नई, स्वर्ण सुहानी भोर ।।।।। महाप्रज्ञ वर से मिला, तेरापथ का ताज। महाश्रमण जुग जुग तपो, अंतर की आवाज ।।2।। चालीसा का पाठ नित, करें सुबह या शाम। नियमित दिनचर्या बने, मन पर […]

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Jay MahaTapasvi Mahashraman

(लय – स्वामीजी थारी साधना री मेरू सीऊंचाई) जय महातपस्वी महाश्रमण जय वीतराग अवतारी -2 वीतराग अवतारी-2 जय-2 प्रभुता धारी  जय महातपस्वी महाश्रमण जय वीतराग अवतारी -2 ओ मेरे भगवान तुम्हारा धाम हृदय ये मेरा -2  देखो ध्यान लगा कर निशदिन ध्यान धरू में तेरा-2  तू ही मेरा आधार है, प्राणों का पालन हार है-2 

Tapsya

Sawan Ka Mahina Aaya

(लय- सावन का महीना) सावन का महीना आया तपस्या चारो ओर आज देख तपस्वी जोड़ी को हम है भावविभोर ① तपस्या की भावना तो कभी-2 आती नई नई चीजे खाने जीभ ललचाती  खाने पर भी लगती थे काया कमजोर ॥  ② तपस्या की महिमा भारी कहते है सारे  रोग शोक मिटते पल में तप के

Tapsya

Dekhi Jo Tapsan Samne

(तर्ज – चुड़ी जो खनकी हाथ में) देखी जो तपसण सामने- 2 , याद तपस्या की आने लगी हाय धीरे-2 मेरे मन में -२ * मन करता है नौकारसी करु, मन करता है पौरसी करू देखु जो प्याली सामने, याद चाय की आने लगी,हाय धीरे-2 मेरे मन में -२ -मन करता है उपवास करु, मन

Tapsya

Tapasya Karo Aur Tapasya Karao

(लय-झिलमिल सितारों का ) तपस्या करो और तपस्या कराओं।  तपस्या देवी से लोगा मान बढ़ाओ । दुखा रो दावानल तप रै नीर स्यू बुझाओ’ 1 ①  भूंडी भूख भुवाजी दिन में तारा सा दिखावे।  जीदोरों उल्टियां होवे मन घबरावे ।  इसी काची काया रो क्यू लाड लडावो !! अभी राशि कोदर तपसी संता नै सुमरलयो

Tapsya

Tap Se Karm Hile

(लय- तुमसे लागी लगन) दिनेश मुनि  तप से कर्म हिले, तप से मोक्ष मिले जोअपनाए  तप की गंगा में नित्य नहाये भौतिक सुख के लिये तपन‌हीं करना  धन दौलत के लिये तपनहीं करना  आत्मा शुद्ध बने, आत्मा बुद्ध बने  लक्ष्य बनाएं तप की गंगा में नित्य-नहाये  तप के साथ स्वाध्याय चलेगा  जीवन मे अभिनव दीप

Tapsya

Tapsya Hai Uttam Mangal

(लय- शिविर है जीने का विज्ञान)  (धर्म की लौ जलाए हम) तपस्या है उत्तम मंगल, तपस्या है उत्तम मंगल।  बने चेतना दिन-२ तप्‌ की  ऊर्जा   से उज्जवल  * जैसे बहते पानी  के झरनो से भरे रे जलाशय  वैसे आश्रव के नालों से कर्म दलों का संचय  संवर और निर्जरा द्वारा हो निर्रझर निर्मल। * एहिक

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He Maha Shraman Yug Nayak (Guru)

हे महाश्रमण युगनायक (लय-जहाँ डाल-2 पर सोने की चिड़िया) जन-2 के मन में व्याप्त तिमिर के तुम हो मुक्ति प्रदायक हे महाश्रमण युगनायक, हे महाश्रमण युगनायक दो महापुरुषो की दिव्य दृष्टि ने तेरा रूप निखारा  जय महाश्रमण जय महाश्रमण जय महाश्रमण जय महाश्रमण  दो महा पुरुषों की दिव्य-दृष्टि ने तेरा रूप निखारा  युग की वलका

Guru

Jyotipunj Ki Jyoti Rashmiya

अँभिक्षु “पूज्य प्रवर  के श्री चरणों में ज्ञानशाला में  दिल्ली की प्रशिक्षिकाओं द्वारा प्रस्तुत गीत  साध्वी श्री कनकश्रीजी ज्योति पुंज की ज्योति रश्मियां प्रज्ञा ज्योति जगाए। महाबोधि मंदार आर्य की अभिनव श्री सुषमाएं ।।  वंदन वंदन शत-२ वंदन । भरदों जीवन में नव स्पंदन ।। ① मौसम कितना आज सुहाना महके मन वृंदावन । पौर-र

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Hai Prano Se Bhi Pyara Hamko Mahashraman Shasan

  (रचना -साध्वी श्री कनकश्रीजी) (लय-हमनन्हें मुन्ने हो चाहे पर किसी से कम, आकाश तले जो फूल खिले वो फूल बनेंगे हम) है प्राणों से भी प्यारा हमको महाश्रमण शासन्  दिल्ली ज्ञानशाला है पुलकित पाकर गुरु दर्शन गुरु‌देव प्रतापी है, कीर्त जग व्यापी है शिखरों की ऊंचाई   ऊंचाई पौरुष से नापी है   महामहिम  श्री महाश्रमण

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