Kashi Hai Nirali,

यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.

श्री शिव आराधना

तर्ज (Tune): दमा दम मस्त कलंदर …

भजन के बोल / Lyrics

काशी है निराली तो, शंकर बड़ा निराला है,
 हाथ में दंड कमंडल, और पीते भंग का प्याला है।।
सब देवताओं में नाम तुम्हारा है बढ़कर, ओ भोलेनाथ, ओ सब के साथ, दया की एक नजर कर, आये हैं तेरे दर पर, बम चम भोले शंकर ।।
कैलाश से शिव अमरनाथ आए, अमरनाथ से भोले सोमनाथ जाए, वास किया जब बद्रीनाथ में जाकर, पशुपति नाथ-२ वसे काशी में आकर ।।
पीवत है भंग का प्याला, गले नाग जहर वाला, देवों में देव निराला, शंकर है भोला भाला, शंकर की जटाओं में -२, बहती है गंगा की धारा ।।

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