Samta Ke Deep Jala Gaye Ji

-: तीर्थंकर महावीर :-

लय : ओ म्हांरा गुरुदेव
समता के दीप जला गये जी, तीर्थंकर महावीर।
 संयम के गीत सुना गये जी, तार्थंकर महावीर ॥
१. सब अपने प्यारे भाई, मत खोदो पथ में खाई। 
मैत्री का मार्ग बना गये जी, तीर्थंकर महावीर ॥
२. सब फूल एक ही वन के, सब दीप एक आंगन के। सब में समदृष्टि जगा गये जी, तीर्थंकर महावीर ॥
३. सब एक गगन के तारे, भू मां के लाल दुलारे ।
 समरस की सृष्टि सजा गये जी, तीर्थंकर महावीर ॥
४. सुख दुःख जीवन के साथी, मत बुझने दो मन बाती । साहस का सबक सिखा गये जी, तीर्थंकर महावीर ॥
५. है ग्रंथ अनेक जगत में, है पंथ अनेक जगत में। पर मंजिल एक बता गये जी, तीर्थंकर महावीर ॥
६. कथनी-करनी समरस हो, बाहर भीतर मधुरस हो। ऋजुता की राह दिखा गये जी, तीर्थंकर महावीर ॥
७. खाने-पीने में समता, मरने जीने में समता ।
 आत्मा में लगन लगा गये जी, तीर्थंकर महावीर।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top