Author name: Sunita Dugar

Bhikshu Swami

Swamiji Aao Dekh Lyo

( लयः सारंगा तेरी याद में) रचयिता : मुनि मधुकरजी स्वामीजी ! आवो देखल्यो स्वामीजी! आवो देखल्यो, नैणां में तसवीर ।  तरस रह्या म्है दरस बिना, मछल्यां ज्यूं बिन नीर ।। १. पल-पल जोवै बावरी, पलकां थांरी बाट,  मिलणो चावै मोद स्यूं, बंधन सारा काट ।  दिखलाद्यो प्रभु वेग स्यूं, अपणो रूप विराट ।। २. […]

Bhikshu Swami

Bhikshu Bhikshu Bhajan Ho

भिक्षु स्तुति  .(लय : संयममय जीवन हो ) रचयिता : मुनि सुमेरमलजी, ‘लाडनूं’ भिक्षु भिक्षु भजन होभिक्षु-भिक्षु भजन हो। तन से, मन से और वचन से प्रतिपल यही रटन हो। भिक्षु-भिक्षु भजन हो ।। १. जब-जब जाप किया श्रद्धा से, अयि गुरुदेव तुम्हारा, तब-तब नष्ट अरिष्ट हुए सब, दुःख से मिला किनारा ।  देव! तुम्हारे

Bhikshu Swami

Bhikhanji Swami Bhari Maryada Bandhi Sangh Me Lyrics

(लय : बधाओ गावो) भीखणजी स्वामी! भीखणजी स्वामी! भारी मर्यादा बांधी संघ में।  प्रबल प्रतापी शासन वीर रो, जिण में जग रही जगमग ज्योत हो ।। १. देखी दशा दयामणी, आ तो साधु-संघ की आप हो । कांप्यो कळेजो म्हारै पूज्य रो, किन्ही मूल सहित थिर थाप हो ।। २. सकल साधु अरु साधवी, बहो

Hanuman Ji, Ram

Aaju Mithila Nagriya Nihal Sakhiya

आजु मिथिला नगरिया निहाल सखियां – 2  चारों दुलहा में बड़‌का कमाल सखियों – 2 आजुमिथिला नगरिया निहाल सखियां – 2   (माथे) शिश मणि मौरिया, कुंडल सोहे कनमा कारी कारी कजरारी जुलमी नयनमा  लाल चंदन सोहे, इनके भाल सखिया आजु मिथिला नगरिया निहाल सखियां – 2  श्यामल-स्यामल गोरे-2 जोड़िया जहान रे  अँखिया ना देखनी सुनली

Adhyatmik, Jain Bhajan

Ki Man Ko Shant Banaye Hum

सांस सांस पर परमात्मा का ध्यान लगाये हम  किमन को शान्त बनाये हम 1 जीवन है संग्राम से जीना सीखे हम  अमृत व विष दोनो को पीना सीखे हम  लाभ अलाभ हर्ष, शोक में सम् बन जाए हम  कि मनको मन को शान्त बनाये हम  2. वर्तमान में जीने का अभ्यास बढ़ाते जाये  भूतकाल के

Swagat Geet

Stivar Padhare Aayi Aaj Mangal Ghadiya

स्वागत गीत सतिवर पधारे आई आज मंगल घड़ियां   नूतन बहारे छाई कण-कण में  हर्ष जन जनमे आई आज मंगल घड़ियां   इन्तजार करते करते ये सुखद सुभग पल आये है  दर्शन पाकर आज आपके सबके मन हर्षायें हैं   छाई उमंगे आज हर मन में  हर्षजन जन मेंआई ,आज मंगल घड़ियां  शुभागमन यह मंगल उत्सव नई प्रेरणा

Bhikshu Swami

Swami Ji Mhane Darshan Dinha Ji

(लय – कुरजा ए म्हारा भंवर मिला दे)  मुनीश्री श्रमण सागर स्वामी जी म्हाने दर्शन दीन्हा जी-2 दर्शन दिन्हा प्रेम स्यू-२ म्हार माथ पर धर हाथ  स्वामी जी म्हाने दर्शन दिन्हा जी  दिन्हा दर्शन प्रेम स्यू, म्हार मनडे री पूछी दोय बात -2  स्वामी जी म्हाने दर्शन दीन्हा जी-2 सांवली सूरत सोहणी-2  टप टप करतो

Bana Bani

Bana Kahe Ko Jaldi Machayi Re

बन्ना काहे को जल्दी मचाई रे  ऐसी गर्मी में शादी रचाई रे दादी को गर्मी लगे बाबा पंखा झले  ताई रानी ने लस्सी मंगाई रे ऐसी गर्मी में चाची को गर्मी लगे चाचा कूलर चला ये मम्मी रानी ने आइसक्रीम मंगाई रे ऐसी गर्मी में दीदी को गर्मी लगे जीजा ऐसी खोले  भाभी रानी ने

Shiv Ji

Rudrashtakam

 श्रीरुद्राष्टकं तुलसीदासकृतम्  नमामीशमीशाननिर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाश माकाश वासं भजेऽहम् ॥ १॥ निराकार मोंकारमूलं तुरीयं गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् । करालं महाकालकालं कृपालं गुणागारसंसार पारं नतोऽहम् ॥ २॥ तुषाराद्रि संकाशगौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्रीशरीरम् । स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारुगङ्गा लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३॥ चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।

Tapsya Geet

Ek Chhoto So Tapsi

तपस्या एक छोटो से तपसी बिर तनम खुशी, बिर मन में खुशी  ओ बात काई रे बताऊं थान आज मै बिरा दादोसा पूछे बिरा दादीसा पूछे तपसी  काई रे खावण री थार मन में  म्हतो पिज्जा कोनी खाऊ, म्ह तो बर्गर कोनी खाऊ  अबक तपस्या करण री मन मे  बिरा पापाजी पूछे- 2 बिरा मम्मी

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