Author name: Sunita Dugar

Tapsy Geet

The To Dharm Dipawan Har

(लय- भाई म्हारा रंग सू तो रंग मिले जाय) * थे तो धर्म दीपावन हार तपस्या रा लीज्यो वारणा  थे तो ज्योति जगावन हार “तपस्या रा लीज्यो वारणा देख ठाठ तपस्या रो सुन्दर हिया हिलोरा खाय’ आठ पाँच कोई तेला पचके बेला री गिनती न आय। पाँच इन्द्रिया वश में होवे छठो मन अधिकार । […]

Tapsya Geet

Mehandi Rachan Lagi

लय – मेंहदी राचण लागी मेहंदी राचण लागी हाथा में तपसी र नाम री  आई शुभ घड़ी देखो म्हारे आंगण आजजी  बाजे बाजे रे शह‌नाई तपसी र नाम री  आई शुभ घड़ी देखो  तप करके तपसी कुलरो नाम दिपायो  अनुमोदना हो, अनुमोदना करूंतपसी थारेनाम री आई शुभ घड़ी  तपसी री देखो अदभुत है माया  देखो

Tapsya Geet

Aaj Hamare Ghar Aangane Me Dekho Khushiya Chhayi

आज हमारे घर आँगन में  (तर्जः माईनी माई मुंडेर पे) आज हमारे घर आँगन में देखो खुशिया छाई  , सौ-सौ साधुवाद  उन्ही को, तप में शक्ति जगाई  तपस्या करल्यो थे, तपस्या करल्यो थे। ① भिक्षु शासन की बगिया में, तप का फूलखिला है  बड़े भाग्य से ऐसा नन्दनवन, गण हमें मिला है , इस उपवन

Guru

Ab Saunp Diya Is Jeevan Ka Sab Bhar Tumhare Hatho Me

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में। है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में॥ मेरा निश्चय बस एक यही, एक बार तुम्हे पा जाऊं मैं। अर्पण करदूँ दुनिया भर का सब प्यार तुम्हारे हाथों में॥ जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ, ज्यों जल में कमल का फूल

Bhikshu Swami

Bhikshu Chalisa &Aarti

।। जय भिक्षु गुरुभ्योनमः ।। श्री भिक्षु चालीसा ।। दोहा।। भिक्षु भिक्षु गणपाल की, महिमा है सर्वत्र।  तेरापंथ समाज के, ज्योतिर्मय नक्षत्र।।।।।  उनकी करूणा दृष्टि से, निश्चित बेड़ा पार।  “मुनि कन्हैया” नित रटो, भिक्षु नाम अविकार । ।2।। ।। चौपाई।। जय जय जय हे भिक्षु स्वामी। महावीर पथ के अनुगामी ।।। सतरह सौ तिरयाँसी आया।

Bhikshu Swami

Bhikshu Mhare Praktya Ji Bharat Chetra Me

भिक्षु म्हारै प्रगट्या जी भिक्षु म्हारै प्रगट्या जी भरत खेतर में। ज्यांरो ध्यान धरूं अंतर में।। 1. देश-देश नां लोक आपनों, समरण कर रह्या उर में।। 2. आप तणी बुध नहीं परशंसा, बहु लोक करै पुर-पुर में।। ३. मंत्राक्षर-सम नाम तुम्हारो, विघ्न मिटै घर-घर में।। 4. जबर उद्योत कियो जशधारी, एह पंचमें अर में।। 5.

Aarti

Shree Khatu Shyamji Ki Aarti

।। श्री खाटू श्यामजी की आरती ।। ॐ जय श्रीश्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजत, अनुपम परे ।। ।। रतन जडित सिहासन, सिर पर चंवर दुरे। जन केसरिया बागो. कुण्डल श्रवण पड़े।।।। गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट परे। खेवत धूप अग्नि पर दीपक ज्योति जले।। ॐ।। मोदक खीर चूरमा,

Krishna Ji, Shyam

Achutam Keshavam Krishan Damodarm

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,  राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता हे भगवान आते नहीं,  तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,  राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता है भगवान खाते नहीं,  बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं ।  कौन कहता है भगवान सोते नहीं,  माँ यशोदा के जैसे सुलाते

Tapasya

Karte Miljul Kar Ham

(तर्ज – होठो से छूलो तुम) करते मिलजुल कर हम् तप का अभिनन्दन है  तपसी के चरणों में करते शत वन्दन है दृढ़ मजबूती हम देख देख हरखे  छोटी वय में तेरा, ये तप ‌बिरवा सरसे ॥  सौ बार बधाई है भावोका अर्चन हैं  * निर्मल तप गंगा में कलमष तुमने धोया  अपनी दृढ़ इच्छा

Bhikshu Swami

Bhikshu Smaran

भिक्षु स्मरण (लय- चेतन ले ले शरणा चार) जपल्यो भिक्षु भिक्षु नाम, मुख में राखो आठू याम । थारा सर ज्यासी सै काम, नैया पार करसी हो हो बाबो, नैया पार करसी ।। भिक्षु है हिवड़े रा हार, म्हारें जीवन रा आधार । ज्योतित जिण स्यूं ओ संसार, सुरतरु घर में फलसी ।।1।। भिक्षु नाम

Scroll to Top