Mere Nishfal Ho Sab Pap
समणी मंजुल प्रज्ञा जी मेरे निष्फल हो सब पाप हृदय हो साफ भावना भाऊं जीवन को सफल बनाऊ ।। ①यदि हिंसा त्रस स्थावर की यदि पीड़ा किसी जीव को दी करती पश्चाताप पाप धो पाऊं ② औरो की चीज चुराई हो । की खोटी अगर कमाई हो। अपनी आत्मा को में बुरी बताऊँ यदि झूठ […]