Paryushan

Paryushan

Mere Nishfal Ho Sab Pap

समणी मंजुल प्रज्ञा जी मेरे निष्फल  हो सब पाप हृदय हो साफ  भावना भाऊं जीवन को सफल बनाऊ ।। ①यदि हिंसा  त्रस स्थावर की  यदि पीड़ा किसी जीव को दी  करती पश्चाताप पाप धो  पाऊं  ② औरो की चीज चुराई हो ।   की खोटी अगर कमाई हो।  अपनी आत्मा को में बुरी बताऊँ यदि झूठ […]

Jain Bhajan, Paryushan

Koti Koti Kantho Se Gaye

क्षमा दिवस (मैत्री मंत्र) (तर्ज : कोटि कोटि कंठों से गाएं……) बड़े प्रेम से मिलजुल सीखें, मैत्री-मंत्र महान रे । औरों से ले क्षमा स्वयं, औरो को करे प्रदान रे ।। व्यक्ति – व्यक्ति में जाति-जाति में, वैमनस्य जो बढ़ता, प्रातं-प्रांत में राष्ट्र-राष्ट्र में, अन्तर जाता पड़ता । यह भारी, विश्व-शान्ति को खतरा, हो इसका

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Parv Aaya,

पर्युषण पर्व आया, इन्तजार करते करते।  श्रद्धा का रंग लाया, उत्साह भरते भरते ॥ १. अनमोल है यह अवसर, अब धर्म साधना का।  उड़ जाए मोह निद्रा, नवकार जपते जपते ॥ २. सामायिकें तपस्या, स्वाध्याय लीनता हो।  आत्मा में हो सरलता, जिनवाणी सुनते सुनते ॥ ३. मौसम सुहावना है, हर दिल में जोश जागे।  निपजाओ

Jain Bhajan, Paryushan

Maitri Ke Anupam Deep Jale

मैत्री के अनुपम दीप जले, पर्युषण पर्व सुहाना है। श्रद्धा के सुरभित सुमन खिले, पर्युषण पर्व सुहाना है। १. मुश्किल से मानव जन्म मिला। जिन शासन पा सौभाग्य खिला। तप जप करने वे क्षण उजले ॥ २. माला जपने मन टिका नहीं। ना सामायिक स्वाध्याय कहीं। अवसर है आराधन कर लें ॥ ३. ये बीत

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Parv Hariday Me Ullas Bhar Raha

पर्व पर्युषण हृदय उल्लास भर रहा। जागरण का जागरण का, अनवरत आह्वान कर रहा। २. जन्म मृत्यु अनन्त अब तक हो गए चेतन । और होते ही रहेंगे, ज्ञान कर चेतन ! मोह का मोह का, है उदय जिससे चक्र चल रहा ॥ २. कर्म फल भुगतान करते अन्त कुछ आया। उच्च कुल में पुण्य

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Yah Parv Mahan,

(तर्ज : मेहंदी रची थारै) पर्युषण यह पर्व महान्, करते हम दिल से सम्मान।  छाई अजब बहार हो, हर घर घर में। १. चौरासी के चक्कर में, हम सबने जन्म किए कितने ।  जन्म मरण की परम्परा में, सहन वेदना की हमने।  अब तो मिला किनारा है, श्री जिन धर्म सहारा है।  जीवन की पतवार

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