Paryushan

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Parv Aaya Hai

पर्युषण पर्व आया है, अनोखा रंग, छायाा है   आत्म चिंतन    आत्म उत्थान  का संदेश लाया है। ① सु सौरस फैली है तप की ये देखोआज कण कण में दैष को धो दिया मनसे  समता स्रोत बहाया है ② ये पावन पर्व आया हूँ लेकर इक नया सन्देश  जगाले आत्म शक्ति को मिटाले क्षीणता मन […]

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Man Ne Saf Rakhije(khamat Khamna)

मन ने साफ राखीजै (तर्ज : माता वदनाजी रो लाडली……….) -साध्वी श्रीराजीमतीजी रे चेतन! जीणो है दिन च्यार, मन नै साफ राखीजै। रे मनवा! पापां रो ओ भार, सिर पर मतना बांधीजै ।। 1. मन नै साफ राखणियां तो कोई-कोई है।  मैली वृत्त्यां पर नियंत्रण, पूरी-पूरो राखीजै। 2. मन है चंदन-बाग, मन है काटां री

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Atma Ki Pothi Padhne Ka Yah Sunder Avasar Aaya Hai

पर्युषण गीत सान्निध्य-समणी निर्देशिका डॉ निर्वाणप्रज्ञा आत्मा की पोथी पढ़ने का यह सुंदर अवसर आया है । सोपान यही है चढने का मस्तिष्क मनुज का पाया है। संवत्सर का संदेश सुने निर्मल मन निर्मल काया है। 1. जीवन की पोथी के पहले, पन्ने में मैत्री मंत्र लिखो सिर दर्द समूल मिटाने का यह सुंदर अवसर

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Aayo Jain Jagat Ro Pramukh Parv Samvatsari Re (paryushan)

महापर्व – संगान (लय- माता सीता की गोदी में हनुमत डाली मूदंडी) आयो जैन-जगत रो प्रमुख पर्व संवत्सरी रे ।  छायो सकल संघ में रंग, धर्म-जड़ हरी भरी रे ।। पर्यूषण पर्व नाम कहायो, भाद्रव महिनो सदा सुहायो, नियमित धवल पक्ष निरमायो, प्रायः पांचम रो दिन पायो । आयो जैन जगत रो प्रमुख पर्व संवत्सरी

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Parv Paryushan Aaya

पर्युषण पर्व  (लय-कजरा मोहब्बत वाला) महावीर ने पथ दिखलाया, पर्व पर्युषण आया  जैनियों की है पहचान, करने कमाई धर्मध्यान   समता के  फूल खिले है, अन्तर्मन दीप जले है   रोशन है सारा जहान, करले कमाई धर्म ध्यान  महावीर ने पथ दिखलाया—-  सत्य अहिंसा करुणा जीवन में हम अपनाये -2  सद्‌गुण मुक्ता को अपने खेतो में

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Chadariya Nai Rangayi Hai (khamat Khamna Geet)(paryushan)

खमत-खामणा गीत (तर्ज : तावड़ो धीमो पड़ज्या रे….) – साध्वी श्री राजीमतीजी चदरिया नयी रंगाई है-२ यदि रागद्वेष रो दाग लागग्यो, क्षमा सफाई है।चदरिया नयी रंगाई है-२  1. हाथ जोड़ सगलां स्यूं म्हांरा, खमत खामणा है।  बिना खमायां गति बिगड़ै, आसूत्र-धारणा है।  समाई खरी कमाई है। कि समता खरी कमाई है। 2. खमत खामणा मनस्यूं

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Maitri Diwas Manaye Hum (paryushan)

मैत्री दिवस मनायें हम (लय-धीरे धीरे बोल…) मैत्री दिवस मनायें हम, मन को विमल बनायें हम । सरल हृदय बन जायें हम, सबसे आज खमायें हम । हम ग्रंथियों को खोल लें, रूठों से हंसकर बोल लें ।। ।। भूलों का पुतला होता इन्सान । हंसता रोता करता है तूफान । नादान भी, गुणवान भी,

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Jaha Janam Janam Ke Ver Bhav Ka Hota Hai Nistara( Khamat Khamna)

पर्युषण प्यारा (लय : जहां डाल डाल पर….) जहां जनम जनम के वैर भाव का होता है निस्तारा। ये दिन संवत्सरी प्यारा-२ जहां प्राणी मात्र से प्रेम भाव का जो करता है इशारा ये पर्व पर्युषण प्यारा-२ जय शासनम् जिन शासनम् ।। ध्रुव ।। यहां कालचक्र की गति बनाई, नहीं अंत नहीं आदि’  घट बढ़

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Barse Bhadudo Rim Jhim (paryushan Parv)

बरसै भादूड़ो रिमझिम रिमझिम (लय-अपने पिया की…) मिलजुल कर आज सारा पर्युषण मनावां । बरसै भादूड़ो रिमझिम रिमझिम । धर्म जगावा आवो पर्युषण मनावां ।। आं ।। जैन धर्म रो महापर्व ओ शुभ संदेशो ल्यायो है । मोह नींद स्यू जागो लोगां सुंदर अवसर आयो है । मैत्री रा गीत गावां होSSSSS हरषावां ।।१।। अपणै

Jain Bhajan, Paryushan, Terapanth

Kshamayachana Geet (Saptlaskh Je Jati Prithwi) पर्युषण

क्षमा याचना गीत श्रीमज्जयाचारय‌ सप्त लक्ष जे जाती पृथ्वी श्री सप्त लक्ष अपकाय, इत्यादिक चउरासी लाख जे जीवायोनि खमाय ।  सुगुणा ! खमावियै तज खार ।।१।। गण में सन्त सती गुणवन्ता, सगला भणी खमाय ।  निज आतम प्रति नरम करी नै, मच्छर भाव मिटाय ।। सुगुणा ! खमावियै तज खार ।।२।। किणहिक सन्त सती सूं

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