Tapasya

Tapasya

Sangh Maduwan Me Aaya MadhuMas

(लय – आलौट केआजा ) संघ उपवन में आया मधुमास करें तपस्या का अभिनन्दन  तप गीतों से गाये गुणगान  करे तपस्या का अभिनन्दन महाश्रमण गुरू की करुणा नजर से पावस  अनूठा पाया मीठा उपदेश देकर घर घर मे जाकर सतिवर ने हमको जगाया हुआ घट घट  में उजला प्रकाश तपस्या से कटते जनमो के फेरे […]

Tapasya

Tapasi O Tapasi Teri Seva Karu Mai

तपसी ओ तपसी तेरी सेवा करू मै-2 हर पल तेरे साथ रहू मै  सावन का महीना होगा जिसमे होंगे चौमासे  , जिसमें तपसी तू तप करसी – – तेरी अनुमोदन करू मैतेरी सेवा करू मै-2 हर पल तेरे साथ रहू मै   भादव का महीना होगा जिसमे होगे बादल , तपसी तू बादल तेरा नीर बनू

Tapasya

Aaj Hamare Ghar Aangane Me Dekho(Tapsya)

(तर्ज-माईनी माई) आज हमारे मन आंगन में देखो खुशीयाँ छाई  सौ सौ साधुवाद उन्ही को तप में शक्ति जगाई भिक्षु शासन की बगिया में तप का फूल खिला है  बड़े भाग्य से ऐसा नन्दन वन् गण हमे मिला है  इस आंगन की-2 -ठंडी लहरें   चले पवन पुरवाई। सो सो साधुवाद — तप के पथ पर

Tapasya

Karte Miljul Kar Ham

(तर्ज – होठो से छूलो तुम) करते मिलजुल कर हम् तप का अभिनन्दन है  तपसी के चरणों में करते शत वन्दन है दृढ़ मजबूती हम देख देख हरखे  छोटी वय में तेरा, ये तप ‌बिरवा सरसे ॥  सौ बार बधाई है भावोका अर्चन हैं  * निर्मल तप गंगा में कलमष तुमने धोया  अपनी दृढ़ इच्छा

Tapasya

Abhinandan Tapsya Ro Kara Swikaro

(लय- तेरी दोस्ती मेरा प्यार) अभिनन्दन तपस्या रो करां स्वीकारों,  भूख रो काम रो करारों—- ,तप री जय-जयकार  गण उपवन गुलजार – ① तप स्यू मिटे तन रो रोग  तपस्यू बढ़े सुखद संयोग तप जीवन से परम प्रयोग २  तप रो मिल्या सहारो, हुवै निस्तारो, सुधरसी मिनख जमारो तपरी जय-2 कार ,गण उपवन गुल्जार पल-2

Tapasya

Tapasya Ra Gun Gao

Tapasya ra Gun gao तपस्या का गुण गालो रे वन्दे ! (तर्ज : कस्में वादे प्यार वफा सब…..) रचयिता : अभय बरड़िया तपस्या का गुण गालो रे बन्दे, तप से होता बेड़ा पार आत्मा की उज्ज्वलता बढ़ती, मिट जाता कर्मों का ताप क्रोध मान माया और लोभ के चक्कर में पड़ मत जाना राह पकड़ले

Tapasya, Vashitap

Akshay Tritiua Ka Supawan (varshitap)

(लय- आत्मसाक्षात्कार प्रेक्षाध्यान  के द्वारा) अक्षय तृतीया का सुपावन पर्व आ गया देरहा-2 संदेश तप का हर्ष छागया  प्रथम तीर्थंकर ऋषभगवान मुनि बनकर  आहार पानी के लिये वे घूमते घर-घर।। सुपौत्र श्रेयांस सारा राज पागया   मात्र भिक्षा ग्रहण करना चाहते बाबा  लोग देते जो नहीं वो  चाहते बाबा  देह दुर्बल 2 बदन पर तप

Scroll to Top