Tulsi

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Chanderi Ke Chand Dhara Par Nam Amar Tera

(लय- अंग्रेजी में कहते हैं) चंदेरी के चाँद धरा पर नाम अमर तेरा  राष्ट्र संत तुलसी दुनिया में  काम  अमर तेरा  मानवता के अमर मसीहा जन जन  की आस्था के धाम  परम पुण्य पावन चरणों में, करे हम भाव से वन्दन है, भक्ति से अर्चन है, तन मन अर्पणहै सहज समर्पण है बोले जयतुलसी । […]

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Kartik Dwitiya Ka Chand Guru Tulsi

गीत (स्वयं) कार्तिक द्वितीया का चांद गुरु तुलसी ,चाँद की कलाओं का विस्तार गुरु तुलसी गुरु का जन्म  ① वदना की गोद में प्रकाश दिव्य आ गया  लाडनू के लाल ने जगत जगमगा (झिलमिला) दिया. अनुठी आभा से सरोबार गुरु तुलसी  बीसवी सदी का उपहार गुरु तुलसी बीसवी सदी का अवतार गुरु तुलसी  गुरु की

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Kartik Dwitiya Ka Chand Guru Tulsi(s)

कार्तिक द्वितीया का चाँद गुरु तुलसी ।  चाँद की कलाओं का विस्तार गुरु तुलसी ।। जन्म वदना की गोद में प्रकाश दिव्यआ गया  लाडनूं के लाल ने जगत झिलमिला दिया-2  अनूठी आभा से सरोबार गुरु तुलसी  बीसवीं सदी का उपहार, गुरु तुलसी-2 संचित पुण्याइया उदय में जो आ गई  कांति वान मूरत कालू की मन

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Guru Tulsi Ke Avdano Ko Milkar Yad Karte Hai

* सौसो सुरज तप तपै चंदा उगै हजार।  इतना चानण होत भी गुरुबिन घोर अंधार ॥ गुरु, तुलसी के अवदानों को मिलकर याद करते है  तुम्हारी अर्चना में हम समर्पण भाव भरते हैं  हुआ घूंघट से माइक तक सफर संभव तेरे कारण  करो स्वीकार गुरूवर जी नमन शतबार करते हैं। ( लय-देखा एक ख्वाब) –

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Tulasi Archana

तुलसी अर्चना  (तर्ज – ऐ मेरे वतन के लोगों….) भैक्षव शासन नवमाधिप, तुलसी प्राणों से प्यारे । चरणों में तेरे वंदन, चंदेरी लाल दुलारे ।। मां वंदना के आंगन में, तुम नई रोशनी लाए । कुमकुम पगल्या प्रांगण में, पा दिव्य रूप हरसाए । द्वितीया के इस चंदा को, ये प्यासे नयन निहारे ।।1।। गुरु

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Dharm Vrati Namamy Ham(Tulasi Stuti)

धर्मवती नमाम्यहम्  कर्म व्रती नमाम्यहम्  ग‌णाधिपति नमाम्यहम्  मोक्ष गति नमाम्यहम्    गुरुवर को निकट बिठाये मानस  के मध्य सजाये-२  हम अमर संत और विश्व संत तुलसी को शीश झुकाए उन्हें श्रद्धा सुमन चढ़ाये ॥ मात वंदना तात झुमर मल के हा‌थों में पले ।    धार्मिक परिवार शुभ संस्कार सांचे में ढले ।  लाड करते थे

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Kaisi Vaha Komal Kaya Re (Mahapran Gurudev)

महाप्राण गुरुदेव कैसी वह कोमल काया रे, पुष्पों ने शीश झुकाया रे, कंचन सी कोमल काया रे, महाप्राण महाप्राण महाप्राण गुरुदेव । गुरुदेव । गुरुदेव ।। १. कानों की छटा निराली, आंखें इमरत की किसने सौंदर्य सझाया रे, महाप्राण प्याली । गुरुदेव ।। २. माधुर्य कंठ में घोला, ममता को किसने तोला । वात्सल्य मूर्त

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He Ganadhipati

(लय : होठो से छु लो तुम) हे गणाधिपति गुरुदेव, तुझे समझ नहीं पाये।  हे महाप्राण गुरुदेव, क्या महिमा बतलाये।  हे भिक्षु भक्त तुलसी, क्या गण गरिमा गाये अंतरा बालक वय में तुमने परिवार को त्याग दिया, यौवन वय में तुमने गण को संभाल लिया। अपने पद को तुमने जीते जी त्याग दिया ॥ हे

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Jago Re Jago Re

(लय : उड-उड रे म्हारा काला रे कागला) जागो रे जागो रे जागो रे म्हारा सोया सुवटिया  नित उठ तुलसी भजन करो।  सांझ सबेरे तुलसी भजो ॥ मन मन्दिर में तुलसी बिराजै।  श्रद्धा सुमन चढ़ालै जीवड़ा ॥ नित उठ .. ॥१ ॥ तुलसी मन्त्राक्षर है साचो  जप स्यू भव तर जारे जीवड़ा ॥ नित उठ

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Mhari Naiya Khevan Haar Guruvar Tulasi Gani

म्हारी नैया खेवणहार तुलसी लय : म्हारी नैय्या खेवणहार गुरुवर तुलसीगणी म्हारी नैय्या खेवणहार गुरुवर तुलसीगणी,  म्हारा मोहन मुक्ताहार गुरुवर तुलसीगणी। तुलसीगणी म्हारा हार हियारा,  तुलसीगणी म्हारा नयन सितारा,  च्यार तीरथ रा आधार गुरुवर तुलसीगणी ॥ स्थायी ॥ झुमरमलजी रा कुल उजियारा,  माँ वदना रा लाल दुलारा  सारै भूतल में गुलजार, गुरुवर तुलसीगणी ॥१ ॥

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