Gyanshala Geet, Jain Bhajan

Arham Arham Ki Vandana Fale Gyanshala Geet

अर्हम अर्हम  की वन्दना फले । जीवन विकास हो, मन में सुवास हो, देखो दीपक से दीपक जले । विद्या के पावन मंदिर में सच्ची शिक्षा हम पाएं, सदाचार के सुन्दर पथ पर कदम-कदम बढ़ते जाएं । चाहे रात या प्रभात हो भले ।। : हम सारे हैं भाई-भाई भ्रातृभाव से सदा बढ़ें, अपना संयम […]

Bhachya, Tapsya Geet

Sab Dharmo Me Batlayi Hai Tap Ki Shakti Mahan

सब धर्मों में बतलाई रे, तप री शक्ति महान। देवों ने गरिमा गाई रे, तप री शक्ति महान ॥स्थायी।। तपस्या है मंगलारी, तपस्या है भवभय हारी। तपस्या केशर री क्यारी रे ॥ 1 ॥ तप से टूटे अघबंधन, आत्मा बन जाती कुंदन। मिट जाती उलझन सारी रे ।। 2 ।। करता जो भाव तपस्या, उसकी

Jain Bhajan

Matbhedo Ki Tod Diware

मतभेदों की तोड़ दीवारें आर्हत वाणी प्राण हमारा, हम इसका सम्मान करें। अपना जीवन बलिदान करें, सब मिल जुल नव्र अभियान करें।॥ -. महावीर तीर्थकर ही हम सबके भाग्य विधाता ‘है। महामंत्र नवकार हमारे जीवन का निर्माता है। फिर क्यों दूरी रहे परस्पर युग हमको आह्वान करे ॥ 2. जिन शाासन की प्रभावना में दूरी

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Ki Baje Shahanayi

तप की बाजे शहनाई (लय- हम होंगे कामयाब) तप का करते सब सम्मान  है तप जिन शासन की शान, तप है जीवन का वरदान,  मान लो हो हो, मन में है उल्लास, तप में है विश्वास, जीवन का आश्वास अर्हम्-३ १. तप को हम करते वन्दन । कटते कर्मों के काया बनती है कुन्दन, बन्धन

Dance, Geet, Marwari Lokgeet, Rajsthani

Naina Ra Dhaniya,

“नेणा रा धणी” सजी धजी म्हारी बाईसा राज,  जाणे उग्यो पूनम रो चाँद  पग में पायल हाथा में चुड़लो  घना फूटरा बाईसा राज  तारा जड़ी में पैरी चुंदड़ी, पेरयो गले में हारजी  म्हान हिवड़े आय लगाल्यो म्हार नेणारा धणी  म्हारो काजल सारि आंख्या सबको मन बह‌कावे  जद में चालू जोधाणे री चुनड़ चुनड़ उड़ उड़

Bhachya, Tapsya Geet

Tapsya Shravak Jivan Ka Abhinav Shringaar Hai

(तर्ज : प्रभु पार्श्व देव चरणों में) तपस्या श्रावक जीवन का अभिनव श्रृंगार है। तपस्या से होती नैया भव सागर पार है ॥ १. तप करने वाले होते सौभाग्यशाली हैं। कर्मों के वृन्द टूटते, होता उद्धार है ॥ २. यह तन अनाज का पुतला खाऊं खाऊं करता। जिसने ही मन को साधा, जीवन का सार

Bhachya, Tapsya Geet

Tapsya Ki Mahima Aparmpar L

(लय-आपण भागां री) तपस्या री महिमा देखो अपरंपार  करम निरजरा साथ में हुवै, आधि-व्याधि उपचार। लौ लागे अध्यात्म मेरी झट, सिद्धि हुवै साकार। तपस्या री महिमा……॥ स्थायी ॥ बाजीगर ज्यूं मिनख नै अँ, करम नचावै नाच, एकमेक सा हो रया से, पत्थर-हीरा-काच। तपस्या री महिमा…….||1|| मन मुट्ठी में जो करै, बो ही मानव मतिमान, च्यार

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Re Jhule Me Jhula Aanand Aave Re

तप रै झूलै में तप रे झूलै में झूल्या आनन्द आव है,आनन्द आव है कि  झूल्या आनन्द आव  है, आनन्द आव है क मन म्हारो मोद मनाव है।तप रे झूले में झूल्या — १. ऋषभ, अजित, संभव ,अभिनन्दन, सुमति ,प‌द्म सुखकारी  श्री सुपार्श्व ,चंदा प्रभु ,सुविधी, शीतल प्रभु भयहारी,  श्री श्रेयांस ,वासु पूज्य जिन न

Jain Bhajan, Paryushan

Maitri Ke Anupam Deep Jale

मैत्री के अनुपम दीप जले, पर्युषण पर्व सुहाना है। श्रद्धा के सुरभित सुमन खिले, पर्युषण पर्व सुहाना है। १. मुश्किल से मानव जन्म मिला। जिन शासन पा सौभाग्य खिला। तप जप करने वे क्षण उजले ॥ २. माला जपने मन टिका नहीं। ना सामायिक स्वाध्याय कहीं। अवसर है आराधन कर लें ॥ ३. ये बीत

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Parv Aaya,

पर्युषण पर्व आया, इन्तजार करते करते।  श्रद्धा का रंग लाया, उत्साह भरते भरते ॥ १. अनमोल है यह अवसर, अब धर्म साधना का।  उड़ जाए मोह निद्रा, नवकार जपते जपते ॥ २. सामायिकें तपस्या, स्वाध्याय लीनता हो।  आत्मा में हो सरलता, जिनवाणी सुनते सुनते ॥ ३. मौसम सुहावना है, हर दिल में जोश जागे।  निपजाओ

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