Bhachya, Tapsya Geet

Chhai Khushiya Beandaj

छाई खुशियां बेअंदाज (लय – कितना बदल गया इन्सान)  रचयिता – नचिकेता मुनि आदित्य कुमार छाई खुशियां बेअंदाज । कुल पर कलश चढ़ाया तुमने, तुम पर हमको नाज ।। तप की महिमा प्रभु ने गाई, तप की महिमा गण में छाई। रोग-शोक बाधा विघ्नों का, तप है सहज ईलाज ।। छाई खुशियां…. साहस से जो […]

Hanuman Ji, Ram

Mhari Kutiya M Aao Bhagwan Jimau Thane Mijmani

(लय-म्हारे अब के बचाले म्हारी माय बटाऊ आयो लेवणन) महारी कुटिया में आओ भगवान, जिमावु थाने मिजमानी ऊंचा आसन आप बिराजो सेवा करूं भरपूर चरण धोय चरणामृत लेऊ हो हो—–२ लेके जी जनम सुधार, जिमाऊं थाने मिजमानी चावल दाल गंवा का फलका खूब बणायो साग – २. पूड़ी पकोड़ी और कचोरी, मुठडी बनाई मजेदार जिमाऊ

Shiv Bhajan

Bhole Ke Hatho Me Hai Bhakto Ki Dor

(लय -सावन का महीना)  शिव भजन भोले के हाथों में है भगतो की डोर 2  किसी को खींचे धीरे और किसी को खींचे जोर -2  मरजी है के इसकी हमको जैसे नचाये -2  जितनी जरूरत उतना जोर लगाये  ये चाहे किसी जितनी खींचे हम काहे मचाये शोर किसी को खींचे धीरे और किसी को खींचे

Aarti

Hanuman Ji Ki Aarti,

आरती श्री हनुमानजी की दोहा : संकट मोचन हनुमान प्रभु, भक्तों के प्रतिपाल । शरणागत की लाज राखियो, हे अंजनी के लाल। आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष भय निकट न झांके। अंजनी पुत्र महा बल दाई, सन्तन के प्रभु सदा सहाई। दे बीड़ा

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Mataji Ki Aarti

ॐ कर्पूर गौरं करूणावतारं, संसार सारं भुजगेन्द्र हारं । सदा वसन्तं हृदयार्विन्दे, भवं भवानी सहितं नमामि ।।  ॐ जय अम्बे गौरी, हो मैय्या जै मंगल मूरती, हो मैय्या जय आनन्द करणी । तुम को निश दिन ध्यावत, हरि, ब्रह्मा, शिवरी ।। ॐ जय मांग सिन्दूर बिराजत टीको मृगमद को, हो मैय्या टीको मृगमद को,  उज्जवल

Aarti

Anjani Mata Ki Aarti

श्री अञ्जनी माता की आरती ॐ जय अंजनी माता, मैया जय अंजनी माता । कपि केशरी महारानी, हनुमत की माता ॥ टेर।। चार भुजा अति सुन्दर, शीश मुकुट सोहे, मैया शीश.. गल मोतियन की माला, दर्शन मन मोहे ॥ॐ जय.. आदि कुमारी माता, शक्ति जगदम्बा, मैया शक्तिक उमा रमा ब्रह्माणी, त्रिभुवन जन पन्नाराम सुखदाता, जिन

Aarti

Ambe Tu Hai Jagdambe Kali

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्परखवाली :: आरती :: अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्परवाली, तेरे ही गुण गाये भारती, औ मैया हम सब उतारे तेरी आरती। तेरे जगत के भक्त जनन पर भीड़ पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी।। सौ सौ सिंहो से तू

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Jai Lakshmi Mata, Lakshmi Ji Ki Aarti

आरती श्री लक्ष्मी जी की ॐ जय लक्ष्मी माता मैय्या जय लक्ष्मी माता तुमको निशदिन सेवत हर विष्णु विधाता (जय०) ब्रह्माणी रूद्राणी कमला, तू ही हैं जग माता, सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता (जय०) दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता, जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता (जय०) तुम्ही है पाताल बसन्ती तुहीं

Aarti

Om Jai Jagdish Hare

ॐ जय जगदीश हरे ॐ जय जगदीश हरे, प्रभू! जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट क्ष्ण में दूर करे ।। ऊँ ।। जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।। सुख-सम्पति घर आवै, कष्ट मिटे तन का ।। ॐ।। मात – पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं

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Bheru Ji Ki Aarti,

श्री भैरू जी की आरती जय भैरू देवा, प्रभु जय भैरू देवा सुर नर मुनि सब, करते प्रभु तुम्हरी सेवा जय… तुम्ही पाप उधारक, दुख सिन्धु तारक भक्तों के सुख कारक, भीषण बकुधारक जय…. वाहन स्वान विराजत कर त्रिशुल धारी महिमा अमित तुम्हारी, जय जय भयहारी जय. तुम बिन शिव की सेवा, सफल नहीं होते

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