Bhachya, Tapsya Geet

Tap Su Atma Me Bhari Bal Aave,

तप स्यूं आतमा में भारी बळ आवै, कचरो करमा रो पल भर में जळ ज्यावै, कंचन वरणी होवै काया, रोग-दोख खनै आंतां ही घबरावै ॥ स्थायी ॥ कोरी बातां करणी सोरी, मन री तिषणा, तजणी दोरी, उर में ऊंदरा कूदै जद धीरज ढह ज्यावै-तप स्यूं…..॥1॥ इन्द्रयां चंचळ नाच नचावै, बड़ां – बड़ां रो रोब गमावै, […]

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Ro Tyohar Manaoji,

(लय-ओ म्हांरा गुरुदेव)  तप रो त्योहार मनावोजी, नस-नस में जोश जगावोजी ॥ स्थायी ॥ जो तपरी ज्योत जलावै, वो अजर अमर बण ज्यावै । थे समता श्रोत बहावो जी, ओ तपस्या रो रंग…. 111 || जो लेवै तप रो शरणो, बह ज्यावै अमृत झरणो। निज घर में मौज उड़ावो जी, ओ तपस्या रो रंग….112 ||

Bhachya, Tapsya Geet

So So Sadhuvad Unhi Ko Tap Se Shakti Jagayi

(तर्ज. माईनी माई मुंडेर पे) आज हमारे मन आंगन में देखो खुशीया छायी , सौ सौ साधुवाद उन्हीं को तप से शक्ति जगाई 1 भिक्षु शासन की बगिया में तप का फूल खिला है, बडे भाग्य से ऐसा नन्दन वन गण हमें मिलाहै  इस उपवन की-2 ठंडी लहरे चले पवन पुरवाई , सौ-सौ– 2 तप

Jain Bhajan

Shasan Mila Prabhu Ka

(लय- तुझे सुरज कहुँ या चंदा’) शासन मिला प्रभू का, सौभाग्य है हमारा, आराधना हो ऐसी, न जन्म ले दुबारा 1. रिश्ते अनन्त हमने, हर जीवन में बनायें, कोई जगह नही है ऐसी, जहाँ जन्म हम ना पाये, चारों गति भटकते, नही पा सके किनारा ।। 2. नरभव मिले थे पहले, उपयोग ना करपाये,  सम्यक्त्व

Jain Bhajan

Sanyam Chalisa,jain Bhajan

संयम चालीसा’ मन में संयम तन में संयम, और वचन में भी हो संयम सांस सांस में संयम-संयम, जिन शासन है संयम-संयम 1. छह काय का रक्षक संयम, है पापों का तक्षक संयम तीर्थकर की ऊर्जा संयम, महाव्रतों की पूजा संयम -2 2. संयम से अरिहंत बने हैं, सिद्ध प्रभु जयवंत बने हैं, संत सती

Bhachya, Tapsya Geet

Koi Khel Nahi Hai Karna Tap Aradhana,

(तर्ज: कब तक चुप बैठे,) कोई खेल नही है, करना तप-आराधना  तन-मन रसना को वश  करना, और साधना, 4-2  जो साधे, निश्चित पाता मुक्त्ती धाम ना,  सुख साधना- आराधना। तपस्वी तेरी हिम्‌मत, बेजोड़ अनोखी निराली ,जिन-शासन को चमकाया  गुरु किरपा पक्की जिसकी    है धारना, सुख साधना, आराधना  श्रीसंघ की शान बढाई, परिवार में खुशीया

Bhachya, Tapsya Geet

Melo Tapsya Ro

मेलो तपस्या रो (तर्ज : धरती धोरां री) मेळो तपस्या रो, मेळो तपस्या रो, मेळलो तपस्यो रो ।। ध्रुव ।। ओ तो दरियो ज्यूं लहरावै-२, देखण लोग हजारां आवै, सागै साध्यां ने भी ल्यावै ।।१ ।। इण स्यूं मिलै प्रेरणा भारी-२, मिलजुल आवै सब नर-नारी, कैसी खिली धर्म फुलवारी ।।२।। बिना बुलायां सगळा आवै-२, मन

Bhachya, Tapsya Geet

Aao Hum Aaj Kare Tapsya Ka Abhinandan

(तर्ज : होठों को छू लो तुम) आओ हम आज करें, तपस्या का अभिनन्दन । तप ज्वाला में तपकर काया बनती कुन्दन ॥ ध्रुव ॥ अठाई तप करना, आसान नहीं कोई।  तप धारा में बहना, आसान नहीं कोई। तन मन की मजबूती, से शोभे तप आसन ॥१ ॥ मुक्ति की राहों मेंतपबहुत जरुरी है,  अध्यात्म

Bhachya, Tapsya Geet

Aisi Chundar Lana Bhaiya, Tapsya

ऐसी चूंदड लाना भैया तर्जः (देना है तो दिजिये) ऐसी चूंदड लाना भैया, मेरे लिए तुम आज-२,  जिसे ओढ के पल में होवे-२, मुझको केवल ज्ञान, ऐसी चूंदड लाना भैया.. १) भक्ताम्बर की सुन्दर झालर, चारो ओर लगाना  तुम, महामंत्र के चौसठ अक्षर, पल्लू में बंधवाना तुम, जिसे ओढ के स्वाध्याय कर लू-२, तेरी बहिना

Bhachya, Jain Bhajan, Tapsya Geet

Mahima Jain Dharm Ki,

सुर में गाऊं ,सरगम में गाऊं, गा गा के सुनाउ सबको-२ महिमा जैन धर्म  की ,सबको – २  आदिनाथ हैं, जिनका पालीताणा हैं उनका धाम नाम धाम ऐसे आदिनाथ को वंदन बारम्बार हैं। सुर– नेमिनाथ हैं, जिनका नाम गिरनार उनका द्याम  ऐसे नेमिनाथ को वंदन बारम्बार हैं। सुर– शान्तिनाथ हैं जिनका नाम हैं हस्तिनापुर हैउनका

Scroll to Top