गुरु

Guru Suvichar

गुरु सुविचार  मन को निराश न कर, बस गुरू पर तू विश्वास कर,  हर पल साथ है गुरु देव तेरे, इस बात का एहसास कर।

Bhasha, Vani

Bhasha,Vani

बाग बिगाड़े बान्दरो ,जीभड़ल्या विष होय । बोलण हूं ही ठा पड़े  कागो कोयल दोय।।

Dipawali

Diwali Par Kavita

DIWALI छट जाये अज्ञान अंधेरा तो फिर रोज़दिवाली है।  ज्ञान उजाला डाले डेरा तो फिर रोज़दिवाली है।  मन अवध में राम जो आये तो फिर रोज़दिवाली है।  अहंकार का वध हो जाये तो फिर रोज़दिवाली है।  ज्योत से ज्योत जगाते जायें तो फिर रोज़ दिवाली है।  रोशन राह बनाते जायें तो फिर रोज़दिवाली है। प्रेम

Shravak Pratikraman

Sachhitra Shrawak Pratikraman

   सचित्र श्रावक प्रतिक्रमण   प्रस्तुत संस्करण संशोधित व परिवर्धित है। नये सिरे से सीखने वाले श्रावक-श्राविकाएं प्रस्तुत संस्करण को काम में लें। जिन्होंने पहले से सीख रखा है उनके लिए इस नये संस्करण की भाषा को सीखना जरूरी नहीं है। आचार्य महाश्रमण प्रतिक्रमण संबंधी ध्यातव्य बिन्दु दैवसिक, पाक्षिक, चातुर्मासिक, सांवत्सरिक प्रतिक्रमण का कालमान सूर्यास्त से

Deshbhakti

A Vatan Mere Vatan Abad Rahe ( Arijit Sing)

ऐ वतन मेरे वतन ऐ वतन आबाद रहे तू आबाद रहे तू आबाद रहे तू (आबाद रहे तू) ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू मैं जहाँ रहूँ जहाँ में याद रहे तू मैं जहाँ रहूँ जहाँ में याद रहे तू

Mantra, Vedic

Kalbhairav Ashtkam

देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् । नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ १॥ भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् । कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ २॥ शूलटंकपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् ।  भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ३॥ भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं  भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम् । विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ४॥ धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशनं  कर्मपाशमोचकं सुशर्मधायकं विभुम् । स्वर्णवर्णशेषपाशशोभितांगमण्डलं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ५॥ रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं 

14 Niyam Sadhna

14( Chaudah) Niyam Sadhna

चवदह नियम साधना सचित्त प्रतिदिन अनाज, फल, कच्ची सब्जी, कच्चा पानी आदि सचित्त वस्तुओं की सीमा करना। २. द्रव्य- खाने-पीने की वस्तुओं की सीमा (द्रव्यों की संख्या गणना के आधार पर निश्चित करना। ३. विगय  घी, तेल, दूध, दही, गुड़ और मिठाई इन छह विगयों में दैनिक सेवन की सीमा। ४. पन्नी-  जूते, मोजे, चप्पल

Jain Bhajan

Solah Sati Stawan

सोलह सती स्तवन आदिनाथ आदि जिनवर बंदी, सफल मनोरथ कीजिये ए । प्रभाते उठी मांगलिक कामे, सोलह सतीनो ना लीजिए ए ।। १. बाल कुमारी जग हितकारी, ब्राह्मी भरत नीं बेनडी ए। घट-घट व्यापक अक्षर रूपे, सोलह सती मांही जे बड़ी ए ।। २. बाहुबल भगिनी सती सिरोमणी, सुन्दरी नामे ऋषभ सुता ए ।  अंक

Vedik Mantra

Bharat Ke Prasidh Mandir

भारत के प्रसिद्ध मंदिर (Temple… राजस्थान * मेहंदीपुर बालाजी मंदिर * खाटू श्याम जी मंदिर * रणकपुर जैन मंदिर * करणी माता मंदिर * एकलिंगजी मंदिर ब्रह्मा मंदिर & गलता जी मंदिर जम्मू कश्मीर * वैष्णो देवी मंदिर * रघुनाथ मंदिर रणबीरेश्वर मंदिर मध्यप्रदेश खजुराहो मंदिर महाकालेश्वर मंदिर भारत ओंकारेश्वर मंदिर चौसठ योगिनी मंदिर *

Mantra, Vedic

Mahishasur Mardini Stotra (Aayi Giri Nandini)

(अयि गिरि नन्दिनी) Aigiri Nandini Lyrics in Hindi, with meaning in Hindi ।।१।। अयि गिरि नन्दिनी नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते। गिरिवर विन्ध्यशिरोधिनिवासिनी विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते । जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।। अर्थ- हे हिमालायराज की कन्या, विश्व को आनंद देने वाली, नंदी गणों के द्वारा नमस्कृत, गिरिवर विन्ध्याचल के

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