Raksha Bandhan

Rakhi Ka Parv Aaya

रक्षाबन्धन (लय-जय हो जय जगदंबे काली)  राखी का पर्व आया खुशियों ने रंग बरसाया मैत्री के मंगल मोती वॉरति  हो बहिन भाई की आरती उत्तारती  ① सजी कलाई भाईकी, बहना मन में हरसाती है  अपनी रक्षा का भैया से आश्वासन पा जाती है नाजुक धागे का बंधन रोली मोली और चन्दन प्रीत की बगिया संवारती  […]

Bana Bani

Bhaiya Re Bhaiya Re Aisi Bhabhi Lana

(लय-कांछी रे कांछी र प्रीत मेरी साची) भैया रे भैया एसी भाभी लाना जो सबके दिलो कोजोड़ दे बना रे बना रे ऐसी बन्नी लाना जो सबके दिलों को जोड़ दें हों हो—- पापा, चाचा  को प्रणाम करे और मम्मी चाची का सम्मान करे   हिल मिल के रहे सदा प्यार पाये मीठी-मीठी बोल के भैया

Anuvrat

Anuvrat Ka Deep Path Dikh Laye

अणुव्रत   (लय-हमने जग की की अजब तस्वीरदेखी)  अणुव्रत का  का दीप पथ दिखलाये,  छोटे -२ व्रत जीवन चमकाए  गुरु तुलसी ने वरदान दिया   जागृति का मंत्र महान  दिया  अणुव्रत की सुवास मन सरसाये,   छोटे-2 व्रत जीवन चमकाये ② मानवता का स्वर अणुव्रत है  नैतिकता कि स्वर अणुव्रत है संयम की सुरीली  सरगम गाये,  छोटे छोटे

Bana Bani

Bana Tera Mukhda Suhana

बन्ना बन्नी गीत 3 (तर्ज : दीदी तेरा देवर दीवाना) बन्ना तेरा मुखड़ा सुहाना, हाय राम नजरिया ना लगाना बन्ना तेरा मुखड़ा सुहाना, हाय राम नजरिया ना लगाना बन्ने का सेहरा बम्बई से आया, हीरा जड़ी कलगी से उसको सजाया धीरे से संभाल के लगाना, हाय राम नजरिया ना लगाना बन्ना तेरा मुखड़ा सुहाना, हाय

Beti, Mata Ji, Pita Beta

Pita

पिता मतलब – वो हाथ, जो थामते वक्त काँपते नहीं, पर छोड़ते वक्त पूरी दुनिया हिला देते हैं… पिता मतलब – वो जेब, जिसमें खुद के लिए कुछ नहीं, पर बच्चों के हर सपने की जगह होती है… पिता मतलब – वो साया, जो खुद धूप में चलता है, ताकि हम छाँव में रह सकें…

Suvichar

Suvichar (TAPSYA,KSHAMA–)

*निर्जरा का प्रमुख साधन है तप आत्म चिन्तन तपस्या है स्वाध्याय मे लीन रहना तपस्या है रात्रिभोजन तपस्या है प्रतिकूलता को सहना तपस्या  प्ररिग्रह के प्रति अनासक्ति तपस्या  इच्छाओका अल्पीकरण तपस्या खुद  खाद्य पदार्थो की सीमाकरता तपस्या  अपना स्वार्थ विसर्जन तपस्या  क्षमा जब वाणी में उतरती है तो वाणी अमृत बन जाती है नेत्र से

Tulsi

Kartik Dwitiya Ka Chand Guru Tulsi

गीत (स्वयं) कार्तिक द्वितीया का चांद गुरु तुलसी ,चाँद की कलाओं का विस्तार गुरु तुलसी गुरु का जन्म  ① वदना की गोद में प्रकाश दिव्य आ गया  लाडनू के लाल ने जगत जगमगा (झिलमिला) दिया. अनुठी आभा से सरोबार गुरु तुलसी  बीसवी सदी का उपहार गुरु तुलसी बीसवी सदी का अवतार गुरु तुलसी  गुरु की

Barah Vrat Sadhna

Vrat Diksha (12Vrat Sadhna)

व्रत दीक्षा श्रावक की पहली भूमिका है- सम्यक्त्व दीक्षा। सम्यक्त्व की पुष्टि के बाद श्रावक की दूसरी भूमिका व्रत-दीक्षा स्वीकार की जाती है। व्रत-दीक्षा का अर्थ है-असंयम से संयम की ओर प्रस्थान। एक गृहस्थ श्रावक पूरी तरह से संयमी नहीं हो सकता, पर वह असंयम की सीमा कर सकता है। इसी दृष्टि से भगवान महावीर

Shrawak Sambodh

Shrawak Sambodh

श्रावक-संबोध (पूर्व भाग) समर्पण 1. अणुव्रत-त्रिपथगांप्रेक्षा-प्रद्योतनात्मजाम् । जीवनविज्ञान-ब्रह्पुत्रीं तरंगिणीत्रयम् ॥ 2. स्मृत्वा स्नात्वा च विस्तार्य,बोधत्रयं वितीर्य च। अथ श्रावकसंबोधः,श्रीसंघाय समर्प्यते ॥ (युग्मम्) धर्म का काम है मनुष्य को मनुष्यता का बोधपाठ देना, अच्छा जीवन जीने की कला सिखाना। अणुव्रत मानवीय मूल्यों की न्यूनतम आचार-संहिता है। इससे जीवन पवित्र बनता है। इस दृष्टि से अणुव्रत को

Mata Pita

Mata, Pita, Guru Mahima

माता-पिता-गुरु महिमा तर्ज : कितना बदल गया इन्सान…… मात-पिता गुरु प्रभु चरणों में वंदन बारम्बार,  हम पर किया बड़ा उपकार – २ ।। माता ने जो कष्ट उठाया, वह ऋण कभी न जाये चुकाया, अंगुली पकड़कर चलना सिखाया, ममता की दी शीतल छाया,  जिनकी गोदी में पलकर हम, कहलाते होशीयार ।  हम पर किया बड़ा

Scroll to Top