Jain Bhajan

Ab Saunp Diya Is Jeevan Ka Sab Bhar Tumhara Charno Me

अब सौंप दिया जीवन का अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में। है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में।। मेरा निश्चय बस एक यही, एक बार तुम्हें पा जाऊँ मैं। अर्पण कर दूँ दुनियाँ भर का, सब भार तुम्हारे हाथों में।।1।। अब सौंप दिया इस जीवन का जो […]

Jain Bhajan

Jai Jinendra Boliye

जय जिनेन्द्र बोलिये जय जिनेन्द्र, जय जिनेन्द्र, जय जिनेन्द्र बोलिये।  जय जिनेन्द्र के स्वरों से, अपना मौन खोलिये ।  जय जिनेन्द्र ही हमारा एक मात्र मंत्र हो,  जय जिनेन्द्र बोलने को, हर कोई स्वतंत्र हो,  जय जिनेन्द्र बोल 2 खुद जिनेन्द्र हो लिये ।।1 जय जिनेन्द्र, जय जिनेन्द्र बोलिए पाप छोड़,  धर्म जोड़, यह जिनेन्द्र

Adhyatmik, Nirgun, Vairagy

Suraj Ki Garmin Se Tapte Hue

सूरज तपे तपे रे माटी सूरज तपे तपे रे माटी, दीपक जले जले रे बाती तुझको तपना होगा, तुझको तपना होगा तप ही तो माटी को गागर बनाये गागर में सागर सहज ही समाये माटी का अर्पण, समर्पण जब होगा मुक्ति का अर्पण, वरण तब ही होगा। तुमको……. तपअग्नि के तप से, तू हो जारे

Adhyatmik, Nirgun, Vairagy

1.Is Bhav Me Jo Na Mile 2.Chala Jata Hai Ek Din Aadmi 3.Nahi Chahiye Dil Dukhana Kisi Ka

इस भव में जो न मिले (तर्ज : बस यही अपराध हर बार करता हूँ) इस भव में जो ना मिलें, परभव में मिलता है ,अपने-अपने कर्मों का, फल सबको मिलता है।। है वो भाई, दोनों ही तो, दुनियाँ के मेले में,  एक दर दर का भिखारी, दूजा महलों में,  होते पैदा एक से, नहीं

Jain Bhajan

1.Samvtsari Par 2.Shama Yachna Geet

पर्व संवत्सरी मनाते चलो (तर्ज : जोत से जोत जलाते चलो)  पर्व संवत्सरी मनाते चलो, सबको हृदय से खमाते चलो बैर विरोध भुलाकर सभी, सबको गले से लगाते चलो  पर्व संवत्सरी मनाते जीवन में है द्वेष घृणा का घोर अन्धेरा छाया मोहमाया की रंगरलियों में जीवन है भटकाया  दीप क्षमा का जलाते चलो, पर्व संवत्सरी

Jain Bhajan

Gyan Ka Deepak Jalte Chalo( Paryushan)

ज्ञान का दीपक जलाते चलो (तर्ज -जोत से जोत जगाते चलो) ज्ञान के दीपक जगाते चलो, पर्व सुखों का मनाते चलो, धधकते जो क्रोध शोले उठे, समता के जल से जगाते चलो  मन मन्दिर में जाने लगे है, चंदन झाड ले लो, प्रेम की उजली चादर ले के, जीवन को चमका लो सबको गले से

Adhyatmik, Nirgun, Vairagy

1,Tora Man Darpankahlaye, Obhatke Hue Insan

ओ भटके हुए इंसान (तर्ज: ऐ मेरे दिले नादान ….) ओ भटके हुए इन्सान, प्रभु शरण चले आना।  हो जाए सफल जीवन, घबराये क्यों दीवाना ।।  दो दिन की जिन्दगी को, क्या यूँ ही गँवाएगा।  आयेगा काल सिर पर, नहीं कोई बचाएगा।  मतलब का जमाना है, तूने ये नहीं जाना।।  सुख और दुःख जीवन में,

Mahavir

Hum Vinay Sunane Aaye Hai 2chohbisi3.Kabhi Vir Ban Ke Mahavir Ban Ke

हम विनय सुनाने आये है (तर्ज दिल लूटने वाले जादूगर … मदारी) हम विनय सुनाने आये हैं, महावीर तुम्हारे चरणों में।  मन सुमन चढ़ाने आये हैं, महावीर तुम्हारे चरणों में ।। तुम ज्योतिपुंज तुम दया निधि, हम दीन हीन संसारी हैं। दुःख पीड़ित 2 हैं हम पड़े हुए, महावीर तुम्हारे चरणों में।।1।। हम विनय सुनाने

Bana Bani, Bani

Mhara Sasu Maji (sasuma)

माला फेरो ने राजी राजी मारा सासू माजी, रोटी खावे तो मुखड़ो जी दुखे,  हलवो खावे तो घणा राजी, मारा सासू माजी.. मन्दिर जावे तो पगल्या जी दुखे,  घर घर फिरवा मे घणा राजी,  मारा सासू माजी.. गीता पड़े तो आंख्या जी दुखे,  टीवी देखे तो घणा राजी, मारा सासू माजी.. माळा फेरे तो हाथ

Bana Bani

Hansi Majak Ka Geet

हंसी मजाक के गीत (लय- माला फेरों नी राजी राजी म्हारा बुढा माजी)  क्या क्या बनाऊं साग सब्जी बाता के जाना ।ו गोल गोल आलू मेरा ससुरा लगे है  गोभी लगे है सास रानी बताते जाना  क्या क्या बनाऊ साग सब्जी बताते जाना। काला सा बेंगन मेरा देवर लगे है भिंडी लगे है दौरानी बताते

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