Bhachya

Bhachya, Tapsya Geet

Manava Hilmil Tapsya Ro Tyohar

मनावां…. हिलमिल सारा आज म्हें तो,  तपस्या रो त्यौंहार। तपस्या रो त्यौंहार,  तप है जीवन रो आधार ॥ स्थायी ॥ तप रै मार्ग ऊपर चलणो, बहुत बड़ो है भारी,  इण पर चलणे स्यूं आवेला, थांरै जीवन में निखार । जीवन में निखार, तप है जीवन रो आधार ॥ 1 ॥ कांटा सो ओ जीवन थांरो, […]

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Tapsya RI Mahima Bhari

(लय- खिण – खिण ए बीत्या) तपस्या री महिमा भारी, तपस्या है मंगलकारी,  तपस्या जीवन रो सिणगार है।  हो भाया! तपस्या स्यूं होवे नैया पार है ॥ स्थायी ।। तप है गंगा तप है जमना, तप है तीरथ धाम जी , तप रा जठे नगारा बाजे, सरे अचिंत्या काम जी, आत्मिक शांति रो पथ है,

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Tap Sukhkari,Mangalkari

(लय-पीलो) तप सुखकारी, मंगलकारी, हो तप री महिमा अति भारी, भव-भय हारी जी, तपस्या है तरणी ॥ स्थायी ॥ तन मन रा सब रोग मिटावै, ही आत्मा ने ऊजळी बणावे, शिखर चढ़ावे जी-तपस्या है तरणी ॥१॥  वीर पुरुष ही तप अपणावै, ही कष्टां, स्यूं नहीं घबरावै, शौर्य दिखावे जी-तपस्या है तरणी ॥2॥ कायर री तो

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Tap Me Tej Gajab Ko Bhai

तप में तेज गजब रो भाई! आशा आंबो फल ज्यावै। संच्योड़े करमां रो कचरो, एक पलक में जळ ज्यावै ॥ स्थायी ॥ वै जनम जनम रा बंध्योड़ा, बंधन घालै भारी फोड़ा। अटकावै आगै बढ़ती, आत्मा रै मारग में रोड़ा। दौड़ा-दौड़ मचावै तो भी, कोई नजर न हल आवै ॥1॥ आळस में उलझ्योड़ो मनड़ो, गोते पर

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Tap Ri Shakti Mahan,

सब धर्मों में बतलाई रे, तप री शक्ति महान। देवों ने गरिमा गाई रे, तप री शक्ति महान ॥स्थायी।। तपस्या है मंगलारी, तपस्या है भवभय हारी। तपस्या केशर री क्यारी रे ॥ 1 ॥ तप से टूटे अघबंधन, आत्मा बन जाती कुंदन। मिट जाती उलझन सारी रे ।। 2 ।। करता जो भाव तपस्या, उसकी

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Sab Dharmo Me Batlayi Hai Tap Ki Shakti Mahan

सब धर्मों में बतलाई रे, तप री शक्ति महान। देवों ने गरिमा गाई रे, तप री शक्ति महान ॥स्थायी।। तपस्या है मंगलारी, तपस्या है भवभय हारी। तपस्या केशर री क्यारी रे ॥ 1 ॥ तप से टूटे अघबंधन, आत्मा बन जाती कुंदन। मिट जाती उलझन सारी रे ।। 2 ।। करता जो भाव तपस्या, उसकी

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Tap Ki Baje Shahanayi

तप की बाजे शहनाई (लय- हम होंगे कामयाब) तप का करते सब सम्मान  है तप जिन शासन की शान, तप है जीवन का वरदान,  मान लो हो हो, मन में है उल्लास, तप में है विश्वास, जीवन का आश्वास अर्हम्-३ १. तप को हम करते वन्दन । कटते कर्मों के काया बनती है कुन्दन, बन्धन

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Tapsya Shravak Jivan Ka Abhinav Shringaar Hai

(तर्ज : प्रभु पार्श्व देव चरणों में) तपस्या श्रावक जीवन का अभिनव श्रृंगार है। तपस्या से होती नैया भव सागर पार है ॥ १. तप करने वाले होते सौभाग्यशाली हैं। कर्मों के वृन्द टूटते, होता उद्धार है ॥ २. यह तन अनाज का पुतला खाऊं खाऊं करता। जिसने ही मन को साधा, जीवन का सार

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Tapsya Ki Mahima Aparmpar L

(लय-आपण भागां री) तपस्या री महिमा देखो अपरंपार  करम निरजरा साथ में हुवै, आधि-व्याधि उपचार। लौ लागे अध्यात्म मेरी झट, सिद्धि हुवै साकार। तपस्या री महिमा……॥ स्थायी ॥ बाजीगर ज्यूं मिनख नै अँ, करम नचावै नाच, एकमेक सा हो रया से, पत्थर-हीरा-काच। तपस्या री महिमा…….||1|| मन मुट्ठी में जो करै, बो ही मानव मतिमान, च्यार

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Tap Re Jhule Me Jhula Aanand Aave Re

तप रै झूलै में तप रे झूलै में झूल्या आनन्द आव है,आनन्द आव है कि  झूल्या आनन्द आव  है, आनन्द आव है क मन म्हारो मोद मनाव है।तप रे झूले में झूल्या — १. ऋषभ, अजित, संभव ,अभिनन्दन, सुमति ,प‌द्म सुखकारी  श्री सुपार्श्व ,चंदा प्रभु ,सुविधी, शीतल प्रभु भयहारी,  श्री श्रेयांस ,वासु पूज्य जिन न

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