Bhachya

Adinath, Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Avasar Aaya Hai, Akshay Tritiya

अवसर आया है अवसर आया है अवसर आया है अक्षय तृतीया आज मनाएं तप की महिमा खूब बढ़ाएं प्रभु चरणों में भेंट चढ़ाएं १. मरुदेवा पाता के नन्दन। नाभिराज के तुम कुल चन्दन। श्रद्धा से हम करते वन्दन ॥ २. कर्म भूमि के प्रथम प्रणेता। प्रथम महीपति, युग के नेता। वने प्रथम मुनि आत्म विजेता […]

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Ki Jyoti Me Tapkar Atma Banti Hai Kundan,

तप की ज्योति में तपकर (लय: कल्पतरू रा बीज फल्या) रचयिता : साध्वी निर्वाणश्रीजी तप की ज्योति में तपकर, आत्मा बनती है कुन्दन। तप की महिमा है भारी, तप से टूटे अघ बंधन ।। है धर्म निर्जरा संवर, मिलती मंजिल मनचाही,  टूटे बेड़ी कर्मों की, मिट जाए भव की त्राही।  लक्षित मग में गतिमय हो,

Bhachya, Tapsya Geet

Cocakola Tamatar Aalu Chhola

कोका कोला टमाटर आलू छोला, इन सब का त्याग है देखो तपसण के आज उपवास है। वो मारासा आएं, वो पचखाण कराएं, वो मांगलिक सुनाए, इन सब का का ठाठहै हे, देखो तपसण के आज उपवास है वो सुसरासा आए, वो सासुजी आए वो चौबीसी सुनाएं, इन सब का ठाठहै देखो 3 बो जेठसा आए,

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Aaya Shubh Avsar Ye Aao Kare Bahuman

(लय-मुझसे जुदा होकर) आया शुभ अवसर ये, आओ करे बहुमान ।  अभिनंदन वर्षीतप का, गाएं मिलकर गुणगान। । वंदना, तप को मेरी वंदना साधना तप है कठिन साधना 1. वर्षीतप का तप है, तपस्या का रंग चढ़े,  भाभी वर्षीतप कर, दो कुल पर कलश चढ़े  तू धार सके तो धार, तप है जीवन का सार

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Tap Ki Mahima Ajab Nirali

(तर्ज – माईन माई मुंडेर पे…) तप की महिमा अजब निराली, तप जीवन उजियारा  तप गंगा में नहायेगा जो, पाये भव से किनारा  तप गुण गाये हम ॥   १. तप वीरों का आभुषण, तप मुक्ति का महापथ है  मोक्ष नगर ले जाने वाला, तप ही सच्चा रथ है।  तप नौका से मंजिल पायें, तप ही

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Rang Birange Tap Sumano Se , Varshitap

(लय-यह भारत देश है) रंग बिरंगी तप सुमनों से, सुरभित दशों दिशाएं। लो मंगल गीत सुनाएं।। 1. हर फूल खिला, हर कली खिली, वरसा वर्षीतप सावन, जुही चंपा और चमेली, बना गुलाब यह शतदल। भीनी भीनी सौरभ से, गाती है गीत हवाएं। 2. नन्दनवन के इस उपवन में, बहते तप के झरने, तप गंगा में

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Ghor Tapsi Ki Dhal

(तर्ज और रंग दे रे..) घोर तपस्वी मुनि श्री सुखलालजी घोर तपसी हो मुनि घोर तपसी, थारो नाम उठ-उठ जन भोर जपसीजी।  घोर तपसी हो ‘सुख’ घोर तपसी, थारो जाप जप्यां करमां ही कोड़ खपसी ।। दो सौ बरसां ही भारी ख्यात है बणी, थांरो नाम मोटा तपस्यां रेसाथ फबसी।  ओअनशन आ सहज समता, लाखों

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Tapsya Ro Melo Mandyo In Nagari Me

(तर्ज : रुणझुणियो) तपस्या रो मेलो मंडयो इण नगरी में। छाई है अजब बहार, मोद मनाओ जी ॥ १. सावणियै में रिमझिम मेहड़लो बरसै, त्यूं तप री झड़ी सुहाय ॥ २. तप री करणी मोटी विरला कर पावै । हिम्मत स्यूं बेड़ो पार ॥ ३. तप रै झीणै मारग वीर पुरुष चालै । कायर दिल

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Tap Ka Jab Deep Jale

(तर्ज: मेरे गीत अमर कर दो) जीवन का शुभ अवसर, तप ज्योति जलाई है। तप की महिमा गाते, कलियां विकसाई है ॥ १. तप कठिन साधना है हर एक न कर पाता।  आगम में गाई है जिसकी गौरव गाथा।  कितनों ने तप करके महिमा महकाई है ॥ २. जब भूख सताती है मन चंचल हो

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Mahavir Re Shasan Ri Mahima Mahkava,

(तर्ज : स्वामी भीखणजी रो नाम) महावीर रै शासण री, महिमा महकावां । स्वामी भीखणजी रै संघ री, गुण गाथा गावां ।। आओ तपस्या री गंगा में, संयम साबुन स्यूं आ आतमां री, चादर धोवां ।। १. तप की गरमी तेज बढ़ावै, तन मन का सब रोग मिटावै । शासन माता रा सब आओ, मिलजुल

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