Bhachya

Bhachya, Tapsya Geet

Aayo Surango Sawan(Tap)

आयो सुरंगो सावन (तर्ज : आए हो मेरी जिंदगी में तुम बहार बनकर ,) आयो सुरंगो सावन, बरसी है मेघ धारा-२। तप री बहावो गंगा हो… – २ बुझ जावे अब अंगारा ।। ध्रव ।। भिक्षु री वा कहानी, सम्यकत्व साधना री।  घड़ियाँ सुहानी ल्याया, प्रभुवर आराधना री। अब तो रचाणी मेहंदी, आध्यात्म रा सिनारा […]

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Tap Ki Jhadiya Lagi Re

मेलों तपस्या रो  (लयः चालो देखण ने बाईसा) मेलो तपस्या रो साथीड़ा, तप री झडियाँ लागी रे।  झड़ियां लागी रे क आपा भजन सुणांवा रै।।  तपसी रो तो तेज सवायो देव मुनि चकरावै रे। पाप ताप सब नाश करै है महिमा भारी रे।। मेलो तपस्या रो…. भूखो रहणो सोरो कोनी दिन यें तारा दिख ज्यावेरे।

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Jeevan Ka Shubh Avsar

(लय- गुरुदेव दया करके) जीवन का शुभ अवसर, नई ज्योति जलाई है, हम सब मिलकर देते, तपसी को बधाई है। तप कठिन साधना है, हर एक न कर पाता,  आगम में गाई है, जिसकी गौरव गाथा  कितनो ने तप करके, महिमा महकाई है. जब भूख सताती है, मन चंचल हो जाता,  नयनो से नींद उडे,

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Tapsya Ki Bahar

तपस्या की बहार, देखो के  छाई है, अट्ठाई की आज, इनको बधाई है  शासन माता आती है, भाव जगा तो है, तपसन को रोज मां, शक्ति दे जाती है। 1. शासन माता को जो ध्यावे, मनवांछित फल वोही पावे 2-रूप अनुपम तेज निराला, मन को मेरे हरनेवाला शासन माता आती है – 2. धन्य हैं

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Tapsi Re Ghar Bag Khilyo

तपसी है घर बाग खिल्यो अन्तर मन से सपन फल्यो तपसी ने अब दर्शन देवण, आवो म्हारा स्वीमीजी, थे ही अन्तर्यामी जी, तप है मंगलकारी जी पाप ताप सब नाश करें, जीवन में उल्लास भरे ,तपसी में विश्वास जगावण, आओ म्हारा स्वामी जी,तप है मंगलकारी जी तन री ममता त्यागै तपसी, मन में समता राखै

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Tap Ki Mehandi

(तर्ज – मेहंदी राचन लागी ) मेहंदी राचन लागी हाथा में तपसी रे नाम री “आई शुभ घड़ी देखो महारे आंगन आज जी  ,बाजे -2 रे शहनाई तपसी रे नाम री,  आई शुभ घड़ी देखो म्हारे  तप करके तपसी, कुल को नाम दिपायो, अनुमोदना हो अनुमोदना, करूं तपस्वी थारे नाम री आई शुभ घड़ी  तपसी

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Tapsya Karlyo Re

लय : होली आई रे…. रचयिता : मुनि कन्हैयालालजी तपस्या करल्यो रे, हो तपस्या करल्यो रे, भव-भव का पातक, सगळा हरल्यो रे, तपस्या करल्यो रे।। काल अनन्तो बीत्यो भटकल, भव सागर नै तरल्यो रे, कर्मां रा अब बृन्द खपाकर, शीवपुर वरल्यो रे, तपस्या करल्यो रे।। आत्मिक बल स्यूं तपस्या होवै, कमजोरी नै हरल्यो रे, मन

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Tapsya Nirali Re

तपस्या निराली रे (लय : सावन आयो रे) रचयिता : साध्वी राजीमतीजी तपस्या निराली रे, देखो चमकै है तपसी रो दीदार, खुल ज्यावै सुरगां रा भी द्वार, मिट ज्यावै जनमां रा विकार। संयम री शक्ति, तपस्या निराली रे ।। करड़ो काम तपस्या रो, विरला ही कोई कर पावै,  नाम सुण्यां ही जीवड़ो कांपै, धड़कन भी

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Tapsya Ro Badliyo Barsyo

तपस्या रो बादलियो (लय : बादळियो आंखड़ल्यां में) रचयिता : साध्वी राजीमतीजी तपस्या से बादळियो बरस्यो, बादळियो बरस्यो, घोर घटा उमड़ाई है सावण में। बोलो-बोलो भायां बायां, कांई कांई करस्यो, -२, नई उमंगां आई है जन-जन में ।। तपसी रो तेज देख, देव चकरावै है, राजा और बादशाह भी, शीष झुकावै है। नई प्रेरणा पाई

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Lage Rom Rom Me Tap Ro Tej Suhavano Re

(लय-आयो जैन जगत रो प्रमुख पर्व संवत्सरी रे) लागे रोम रोम में तप रो तेज सुहावनणों रे,  म्हारे तपसी रो दीदार घणो मन भावणो रे।  लागे रोम रोम में 1. तपसी धीरे-धीरे चाले तन मन वाणी न संभाले,  दर्शन ज्ञान चरित्र रुखाले, घाले शुद्ध भावना रा रस,  आज घणो घणो रे।। लागे रोम रोम में

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