Bhachya

Bhachya, Tapsyageet, Varshitap

Aapne Kiya Varshi Tap

(लय-फूलो सा चेहरा’) वर्षीतप आपने किया हम सब का अरमान है-2  आओ भाभी धीरे-धीरे, बैठो भाभी सज-धज के मंगलगीत गाएंगे हम  हो आओ भाभी धीरे-धीरे, बैठो भाभी सज-धज के मंगलगीत गाएंगे हम। 1. सासुजी थारां सिक्का बंटावें, काकीसा लाड लडावे घणा। जेठसा थारा ढांला गुआवे, जेठानी जी ढाल गावे घणां ननदल बाई आवे लाङकोड करे, […]

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Varshitap Geet,

(लयः- देख तेरे संसार की)  वर्षीतप धाराहै इन्होंने, बहिना (भाई )है पुण्यवान।  इनके खूब करो गुणगान ॥ रहे समाधि और सुखसाता, यही करे अरमान।  इनके खूब करो गुणगान ॥ 1. बहुत कठिन है, तप का करना, बहुत कठिन है धीरज रखना, बहुत कठिन है लक्ष्य को वरना बहुत कठिन है इस पथ पर चलना, हममें

Adinath, Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Aayi Aayi Akshay Tritiya

(लय-मांयन-मांयन मुडेर) आई आई अक्षय तृतीया, दिल में खुशियां छाई। ऋषभ प्रभु ने किया पारणा, मंगल बेला आई। हो—- ऋषभ देवा 1. त्याग तप की लेकर शक्ति, घुमें बाबा ज्ञानी।  ऋषभ प्रभु थे मोनी-ध्यानी, वीतराग अनुरागी। तप की साधना से तुमने ज्ञान की ज्योति जलाई।। 2. एक वर्ष तक घूमे बाबा, अन्नजल नहीं है पाया।

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Varshitap Geet, Aao Hum Khushi Ke Geet Gaye

(लय- झिलमिल सितारों का) आओ खुशी के हम गीत गाएं, मंगल घड़ी वर्षीतप की मनाएं, संयम ही जीवन है, इसको जीवन लक्ष्य बनाएं।। 1. वर्षीतप निर्मल गंगा है, इसमें तो सबको नहाना है, मिटेगें विकार मन के तपमय सुख को पाना है।  मन में प्रभु का ध्यान लगाएं।। मंगल घड़ी वर्षीतप की मनाएं। 2. तप

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Pyaari Lage Tapsan Jiri Sohni Surtiya, Varshi Tap

(लय-नगरी-नगरी द्वारें द्बारे) प्यारी लागे तपसन जी री सोहनी सुरतिया, प्यारी लगे तपसनजी री मोहनी मुरतिया।। 1. वीर वृत्ति साकार आपरी नैना आगे नाचणी,  रग-रग थांरी म्हें तो देखी तप संयम में राचणी।  सुपनै में भी सुनी ना कानां कायरता री बतिया ।।  प्यारी लगे तपसनजी सोहनी सुरतिया। 2. तपस्या में वर्षीतप रो तो बण्यो

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Jivan Sanyam Se Mahkaya Hai,geet Varshitap

(लय-दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है) जीवन संयम से यहां महकाया है, वर्षीतप का उत्सव खुशियां लाया है। तप के मंगल गीत झिलमिल करते हैं पुण्य का प्रकाश आंगन छाया है।। 1. आसमां से आज सुख कितना बरसता है,  ऐसा सुख तो पाने को हर कोई तरसता हैं।  धन्य है तपसी जो वर्षीतप कर पाया

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Varshitap Ki Roshni Me Jivan Chamkaye

(लय-जनम जनम का साथ) वर्षीतप की रोशनी में जीवन चमकाएं, ये जीवन चमकाए, आओ तप की धारा में, जीवन नैया को तिराएं।। 1. मिट जाता है सारा, जीवन में अंधियारा,  मिलता रहा हरदम, सुख का ही उजियारा।  तप का तेज अनूठा, हम इसको शीश नमाएं।। 2. काम नहीं आसान ये, सरल लगे कहने में,  मन

Bhachya, Tapsyageet, Varshitap

Varshitap Ki Mahima Ko Gaye

(लय-फिरकी वाली तू) वर्षीतप की महिमा को गाये, खुद तपमय बन जायें,  तप साधना का द्वार हैं तप से पल-पल घटता आत्मा का भार है। वर्षीतप की महिमा को गाये – 1. आत्मशुद्धि का सच्चा साथी मन का मैल मिटाता है, तप में तप कर स्वर्ण स्वयं की आभा को बतलाता है,  तप प्रकाश है-2

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Tap Ko Shat Shat Vandan

(लय- संयममय जीवन) तप को शत शत वंदन वर्षीतप का तप कर तुमने तोड़े कर्मों के बंधन । तप को शत् शत वंदन… दिन में दिख रहे है तारे, तप का काम करारा,  महावीर के तप के आगे, यक्षदेव भी हारा,  धन्ना शालिभद्र की तपस्या मानो शीतल चन्दन ।। तप को शत-शत वंदन तप से

Bhachya, Tapsyageet, Varshitap

Bhari Hai Samta Jivan Me, Varshitap Geet

(लय-चुड़ी जो खनकी) भरी है समता जीवन में, किया काम बड़ा ही कमाल देखो इस परिकर में 1. कहने में आसान लगे, करने पर ही पता चले,  मन पर जीत करे जो भी, पाए मंजिल वो पहले वर्षीतप का जीवन में, किया काम बडा ही कमाल इस परिकर में। 2. दृढ़ता और विश्वास रखा, संयम

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