Bhachya

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Ka Hum Karte Abhinandan

तप का हम करते अभिनंदन (लय – कैसी वह कोमल काया रे….) रचयिता – नचिकेता मुनि आदित्य कुमार तप का हम करते अभिनंदन, गूंज रही आवाज।  तप है सचमुच कितना पावन, गूंज रही आवाज।  हिम्मत से खिलता तप उपवन, गूंज रही आवाज। तप का काम निराला, कर सकता साहस वाला।  तप से बनती काया कुन्दन […]

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Swagat Tapsya Ro

स्वागत तपस्या रो  (लय – होली आई रे….)  रचयिता – नचिकेता मुनि आदित्य कुमार स्वागत तपस्या रो, तपसी नै सगला आज बधावै रे तप गुण गरिमा गावे रे, स्वागत…. नाम सुण्या ही छुटे धूजणी, दिन में तारा दिख ज्यावै। सुदृढ़ मानस बलवालो ही, तप मे स्वागत. काटै तपसी अनगिन पातक, अभय जन चार कषायां री

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Shubh Sanskaroday Dwara

शुभ संस्कारोदय द्वारा (लय – ऐ मेरे वतन के लोगों….) रचयिता – नचिकेता मुनि आदित्य कुमार शुभ संस्कारोदय द्वारा, तप पथ पर कदम बढ़ाया। पाकर आनंद अनोखा, निज जीवन धन्य बनाया।। आसान नहीं तप करना, आवश्यक मानस बल हैं,  पातक सारे धुल जाते, चेतन बनता निर्मल हैं।  हिम्मत दिखलाई तुमने, गण-गौरव शिखर चढ़ाया ।। पाकर

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Tapsi Bhai Ke Angan Me Bol Rahi Hai Devi

तपस्या गीत,( लय- माई नी माई मुंडेर पे तेरी) तपसी भाई के आंगन में, बोल रही है देवी,  तप करलो थे बेला आई, कह रही है देवी,  जैनम् जयति शासनम्, शासन देवी शासनम्- चांद की तरह चमक रही थी, उस देवी की काया,  द्वार पे मेरे, आके उसने, नींद से मुझे जगाया,  तप का रंग

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Dekho Tapsan Ke Aaj Upwas Hai

(लय- फिरकी वाली तू कल फिर आना) कोका कोला टमाटर आलू छोला, इन सब का त्याग है देखो तपसण के आज उपवास है। वो मारासा आएं, वो पचखाण कराएं वो मांगलिक सुनाए, इन सब का का ठाठ है  देखो तपसण के आज उपवासहै वो सुसरासा आए, वो सासुजी आए वो चौबीसी सुनाएं, इन सब का

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Mhe Bhav Badhavan Aaya

म्है भाव बढावण आया (तर्जः चैत्य पुरुष जग जाए) म्है भाव बढावण आया, म्है साता पूछण आया,  तपसण थांरी साता पूछण, दूर दूर स्युं आया । म्है भाव बढावण आया.. 1 १) काम है पुरो टेढो मेढो, विरला हीं कर पावै,  नाम सुन्या हीं गुड गुड बाजे, आंख्या बारै आवै,  ललचाई जिह्वा पर (सृष्टि) आज

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Tapsya Ki Jisne Jyoti Jagayi

( लय- हमे ओर जीने की चाहत न होती) तपस्या की जिसने ज्योति जलाई शतः शतः बधाई -2 तपस्या है जीवन की अनुपम ज्योति, आत्माएँ इससे पावन होती, देवो ने तपकी महिमा है गाई, शतः शतः बधाई-2  मन को वश में करना कठिन है? जिसने किया वो मुक्ति पथिक है  मुक्ती जिसने राह बनाई शत-शतः

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Tap Ka Laddu Mitha

तप का लड्डू (तर्ज – सावन का महीना…) चातुर्मास का महीना, तपस्या का है दौर। तप का लड्डू मीठा, मीठी है हर कोर।।  श्रेणिक की रानियों ने, तप किये भारी, माला पहन तप की, मोक्ष पधारी  अक्षय सुख को पाया, जंजीरे सारी तोड़ तप का लड्डू मीठा. तपस्वी तपस्या में, आनन्द मनाए  त्यागियों की खुशबू

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Tapsya Ki Sijan Aayi Re

तपस्या री सीजन आई रे (तर्ज : एक तो संदेशो म्हारो सालासर में दीज्यो रे) सीजन आई रे तपस्या री, अब थे तपस्या करल्यो रे। क सीजन आइ रे ।। ध्रुव ।। तपस्या री है रूत मस्तानी, सावण भाद्रव महिना रे। तपस्या री गंगा में न्हावो, भाई-बहनां रे। क सीजन आइ रे ।।१।। बेलो-तेलो और

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Melo Tapsya Ro,

मेलो तपस्या रो (तर्ज : धरती धोरां री) मेळो तपस्या रो, मेळो तपस्या रो, मेळलो तपस्यो रो ।। ध्रुव ।। ओ तो दरियो ज्यूं लहरावै-२, देखण लोग हजारां आवै, सागै साथ्या ने भी ल्यावै ।।१ ।। इण स्यूं मिलै प्रेरणा भारी-२, मिलजुल आवै सब नर-नारी, कैसी खिली धर्म फुलवारी ।।२ ।। बिना बुलायां सगळा आवै-२,

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