Guru

Guru, Mahashraman

Shree Mahashraman Charno Me

महाश्रमण स्तुति  श्री महाश्रमण चरणों मे (लय : प्रभु पार्श्व देव चरणों में) श्री महाश्रमण चरणों में, श्रद्धा उपहार है।  जिनके मुख दर्शन से ही होता उद्धार है।। 1. है सहज शांति की मूरत, मुख पर मुस्कान है।  शब्दों से अधिक भावों को, देते आकार है।। 2. बाहर में जी कर करते, आत्मा में वास […]

Guru

Mahashrmani Ji(pramukha Shree Ji)

Manbhawvan mousam mahak raha ye Mangal bela aayi hai Guruvar ki charan Sharan pakar murjhi bagiya viksayi hai He sarswati sakshat Mahasativsr hum Vandan karte hai Singapur ke shrawak shradha se jhuk Abhinandan karte hai He mrudubhashi Mamata ki Murat Tav sannidhi Shukh dayi hai He shakti ki sanvahini humoko bhi aisa vardan mile Gyan

Guru

Vari Jaau Re Guru Balihaari Jau Re

वारी जाऊं रे गुरु बलिहारी जाऊं रे  मैं वारी जाऊं रे, बलिहारी जाऊं रे मारे सतगुरु आंगड़ आया, मैं वारी जाऊं रे सतगुरु आंगड़ आया, हे गंगा गोमती लाया रे मारी निर्मल हो गयी काया, मैं वारी जाऊं रे… सब सखी मिलकर हालो, केसर तिलक लगावो रे घड़ी हेत सूं लेवो बधाई, मैं वारी जाऊं

Guru

He Prabhu Gyan Ka Dan Do

(तर्ज- ज़िन्दगी प्यार का गीत है जिसे हर)  हे प्रभु ज्ञान का दान दो, हम सभी की यही वन्दना है दूर दुर्गम सभी तुम करो हम सभी की यही अर्च‌ना है  धर्म रक्षा में हम प्राण दे प् ना अधरमी कभी हम बने  झूठे वैभव को हम त्यागकर ,सर्वदा सत्य वादी बने  नाकभी हम को

Guru

Aasra Ek Tera

(लय- थोड़ा सा प्यार हुआ है थोड़ा सा बाकी) आसरा एक तेरा एक तेरा सहारा मेरी फरियाद सुनलो SSS -2 देदो कोई किनारा जख्म खाये है इतने घाव कितने गिनाऊ-2   कोई सुनता, नहीं ..जाके किसको सुनाउ  एक तुमपे ही गुरु वर जोर चलता हमारा  आसरा एक तेरा एक तेरा सहारा  टूटी   किश्ती हमारी  टूटे सारे

Guru, Terapanth

Sashanmata Pramukha Shree Ji

आरती जय जय शासन माता कृपा नजर पा तेरी, रू रूं खिल जाता। 1 संतों की धरती पर, जन्म हुआ तेरा । संतो की सेवा से जुड़ा रहा नाता। 2. निर्मलता निश्छलता, रग-रग में तेरे। परम तितिक्षा समता, घट घट की ज्ञाता।। 3. विनय विवेक देखकर, अहंकार झुकता। स्वाद कषाय विजेता, शिव सुख सन्धाता ।।

Bhikshu Swami, Guru

Dena Hai To Dijiye Janm Janm Ka Sath

देना है तो दीजिये जन्म 2 का साथ  मेरे सिर पर रखदो गुरु वर अपने ही दोनो  हाथ झुलस रहे हैं गमकी धूप में प्यार की छैंया करदे तू  बिन पानी के नाव चलेना । अब पतवार पकडले तू  मेरा रस्ता रोशन करदे छाई अंधियारी रात इस जनम में सेवा देकर  बहुत बड़ा अहसान किया 

Guru

Mahamanasvi Mahayashsvi

(लय- प्रभो तुम्हारे पावन पथ पर)  महा मनस्वी महायशस्वी तेजस्वी गण वन‌माली -2 महा तपस्वी महाश्रमण से संघ बना है गौरवशाली  श्रुत की पावन गंगा बहती विविध रूप धर प्रवचन मे-2 गहरीआस्था जिनवांग्मय में और भिक्षु के चिन्तन में  आ अनुभव के उज़ले दिवलो से -2 हर मौसम में है दीवाली 2 गायन का अंदाज़

Guru

Jay MahaTapasvi Mahashraman

(लय – स्वामीजी थारी साधना री मेरू सीऊंचाई) जय महातपस्वी महाश्रमण जय वीतराग अवतारी -2 वीतराग अवतारी-2 जय-2 प्रभुता धारी  जय महातपस्वी महाश्रमण जय वीतराग अवतारी -2 ओ मेरे भगवान तुम्हारा धाम हृदय ये मेरा -2  देखो ध्यान लगा कर निशदिन ध्यान धरू में तेरा-2  तू ही मेरा आधार है, प्राणों का पालन हार है-2 

Guru

Mahashraman Chalisa &Aarti

श्री महाश्रमण चालीसा रचनाकार-मुनि श्री कमल कुमार जी ।। दोहा ।। महिमा गुरू महाश्रमण की, फैल रही चहुं ओर। भूतल में उतरी नई, स्वर्ण सुहानी भोर ।।।।। महाप्रज्ञ वर से मिला, तेरापथ का ताज। महाश्रमण जुग जुग तपो, अंतर की आवाज ।।2।। चालीसा का पाठ नित, करें सुबह या शाम। नियमित दिनचर्या बने, मन पर

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