Terapanth

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Jago Bahino Navprabhat Ye Jagriti Ka Aavan Kare (Mahila Mandal)

जागो बहिनो नव प्रभात यह जागृति काआह्रान करे  हम आज नया निर्माण करे हम युगधारा मे प्राण भरे  एक लक्ष्य से -2 एक दिशा में  एकसाथअभियानकरे  हम आज नया निर्माण करें, हम युग धारा में प्राण भरे १.श्रद्धा सेवा सहन शीलता नारी के श्रृंगार है  समता और सृजनता सुखमय ,जीवन के आधारहै-2 महिलाओं की कार्यकुशलता […]

Terapanth

He He Sangh Ki Bel Fale

(लय-नीले गगन के तले)  हे संघ की बेल  फले जग में ज्योति जले-2  ऐसे ही फैले एैसे ही पसरे ऐसे ही फूले फले हे हे संघ की बेल फले  जग मे ज्योति जले । भिक्षु  राज की सुन्दर बगिया देखो ये कैसे फलेऽऽऽ खुशबू फैले महके चहुं दिश सुरभित जग को करें  जगमे ज्योति जले 

Gyanshala, Terapanth

Arham Arham Ki Vandana Fale (Gyanshala Geet)

अर्हम अर्हम की वंदना फले,अर्हम अर्हम की वंदना फले अर्हम की वंदना फले जीवन विकास हो, मन में सुवास हो, देखो दीपक से दीपक जले । विद्या के पावन मंदिर में सच्ची शिक्षा हम पाएं,  सदाचार के सुन्दर पथ पर कदम-कदम बढ़ते जाएं । चाहे रात या प्रभात हो भले ।। हम सारे हैं भाई-भाई

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Gyanshala Ke Liye

(लय-भकतामर) सुरतरु समान शीतल शासन ‌की छाया  सौभाग्य है हमारे यह  हमने पाया   आचार्य श्रृंख‌ला  ने सींचा है इसको  महाश्रमण जी ने इसको आगे बढ़ाया  शासन के गौरव मुनितारक सुहाते  सहयोगी सन्त पथ दर्शन है कराते ।  विश्न विनय मूर्ति है यशोधरा जी  संयोग साध्वियों का खुशिया मनाते  संस्कार संवरधंनी है, ज्ञान शाला  देती है

Gyanshala, Terapanth

Bachcho Ho Jao Tum Ab Jaldi Se Taiyar

ज्ञान शाला लय- (सावन का महीना)  बच्चों हो जाओ तुम अब जल्दी से तैयार  चले ज्ञान शाला मिलजुल, हम बहे ज्ञान की धार  कितनी है प्यारी ज्ञान शाला हमारी  बनते है नन्हे मुन्ने यहाँ संस्कारी  अनुशासन सांचे में ढल पाए  नया निखार  बाल बोध पुस्तक सुन्दर नन्ही सी माला  मुख वस्त्र आसन चादर वेश है

Guru, Terapanth

Sashanmata Pramukha Shree Ji

आरती जय जय शासन माता कृपा नजर पा तेरी, रू रूं खिल जाता। 1 संतों की धरती पर, जन्म हुआ तेरा । संतो की सेवा से जुड़ा रहा नाता। 2. निर्मलता निश्छलता, रग-रग में तेरे। परम तितिक्षा समता, घट घट की ज्ञाता।। 3. विनय विवेक देखकर, अहंकार झुकता। स्वाद कषाय विजेता, शिव सुख सन्धाता ।।

Terapanth

Shrawak Nishta Patra

श्रावक निष्ठा पत्र मैं जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ का अनुयायी श्रावक हूँ / श्राविका हूँ। इसका मुझे गौरव है। में इसे जीवन-विकास का तथा समस्याओं के समाधान में सबसे बड़ा आलम्बन मानता हूँ / मानती हूँ। अतः अपने दायित्व निर्वाह तथा आस्था की पुष्टि के लिए मैं इन संकल्पों को स्वीकार करता हूँ। करती हूँ-

Terapanth

Hamare Bhagya Bade Balwan

(लयः बना मन मंदिर आलीशान) रचयिता : आचार्यश्री तुलसी हमारे भाग्य बड़े बलवान हमारे भाग्य बड़े बलवान, मिला यह तेरापंथ महान । करने जीवन का कल्याण, मिला यह तेरापंथ महान ।। १. भिक्षु ने ढूंढ़ निकाला, कैसा अमृतमय प्याला ।  आला धार्मिक जग की शान ।। २. जो व्यापक बनने आया, है वर्गातीत कहाया ।

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Ho Sankalp Satya Shiv Sundar (Mahila Mandal)

हो संकल्प सत्य शिव सुन्दर ऊंची एक उड़ान भरें । बनकर हम सूरज की किरणें युगधारा में प्राण भरें । आओ बहनों ! जागो बहनों । हो …. लिखें क्रान्ति की नई ऋचाएँ खुद उनको पढ़ते जाए  शक्ति भक्ति की ज्योत जला, इतिहास नया गढ़ते ज … मजबूत इरादों वादों से हम जागृति का आह्वान

Terapanth

Shobhagi Sangh Hamara

सौभागी संघ हमारा (लय-जहाँ जहाँ डाल डाल पर ) जहां श्रद्धा सेवा और समर्पण की बहती है धारा।। संघ हमारा पावन मंदिर, यही देव यही पूजा, यही जिनालय, यही शिवालय, तीर्थ न कोई दूजा-2  इसके कण-कण में गूंजित है-जय भिक्षु का नारा ।।1।। सौभागी.. उन बलिदानी मुनि सतियों के, चरणों में सौ सौ वन्दन, जिनके

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