Na Swar Hai Na Sargam Hai
(तर्ज -ना धन है ना दौलत है…) ना स्वर है का सरगम है, ना लय ना तराना है, हनुमान के चरणों में, एक फूल चढ़ाना है।। तुम बाल समय में प्रभु, सूरज को निगल डाले, अभिमानी रावण के, सब दर्प मसल डाले, बजरंग हुए तब से, संसार ने जाना है।। सब दुर्ग ढहा कर के, […]