Jain Bhajan

Jain Bhajan

Michhami Dukkadam Geet,jain Bhjan

जो कुछ भी पाप हुआ तुमसे मिच्छामि दुक्कडं लेता हूं, भगवान आपकी साक्षी से मिच्छामि दुक्कडं लेता हूं  गुरु देव आपकी, साक्षीसेमिच्छामिदुक्कडंलेताहूं, अपनी आत्मा की साक्षी से मिच्छामि दुक्कडं लेता हूं  1.पंचाश्रव पाप अठारह का, जो सेवन किया कराया हो। इस भवमे या पिछले भवमे, मिच्छामि दुकक्डं लेता हूं  2.कर्मों के र्कता राग द्वैष,ये नाच […]

Jain Bhajan, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagya

Chetan Lele Sharna Char

चेतन ले लै शरना चार, सांचों आरो ही आधार, सारो स्वार्थियो संसार,कोई थारो नही है। 1.श्री अरिहंत सिद्ध अणगार,सांचों धर्म हिय में धार ओ ही करंसी बेड़ा पार,और चारों नहीं है,। 2.जो तू होणो चावे न्याल,आं च्यारा रो पल्लों झाल थारे माथे उभो काल,कोई पतियारो नहीं है  3.जिला होकर रही सचेत,आं च्यारा स् यु राखी

Jain Bhajan

Bhavo Bhawna,Nirgun Geet

भावे-भावना-आचार्य तुलसी भावे भावना, मन मोद न मावे रे ।। मुगती रा मारग प्रभु च्यार बतावै रे तिण में भावना अग्रेस कहावै रे ॥ भावे — जो दान शील तप आदरणी नी आवे रे। तो आ एकली शिवपुर पहुँचावे रे… जो दान शील तप अघ बंध रुपाने रे। तिन में भावना रो सहारो चावे रे 

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