Tapsya Geet

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Ki Mehandi

(तर्ज – मेहंदी राचन लागी ) मेहंदी राचन लागी हाथा में तपसी रे नाम री “आई शुभ घड़ी देखो महारे आंगन आज जी  ,बाजे -2 रे शहनाई तपसी रे नाम री,  आई शुभ घड़ी देखो म्हारे  तप करके तपसी, कुल को नाम दिपायो, अनुमोदना हो अनुमोदना, करूं तपस्वी थारे नाम री आई शुभ घड़ी  तपसी […]

Bhachya, Tapsya Geet

Tapsya Nirali Re

तपस्या निराली रे (लय : सावन आयो रे) रचयिता : साध्वी राजीमतीजी तपस्या निराली रे, देखो चमकै है तपसी रो दीदार, खुल ज्यावै सुरगां रा भी द्वार, मिट ज्यावै जनमां रा विकार। संयम री शक्ति, तपस्या निराली रे ।। करड़ो काम तपस्या रो, विरला ही कोई कर पावै,  नाम सुण्यां ही जीवड़ो कांपै, धड़कन भी

Bhachya, Tapsya Geet

Tapsya Ro Badliyo Barsyo

तपस्या रो बादलियो (लय : बादळियो आंखड़ल्यां में) रचयिता : साध्वी राजीमतीजी तपस्या से बादळियो बरस्यो, बादळियो बरस्यो, घोर घटा उमड़ाई है सावण में। बोलो-बोलो भायां बायां, कांई कांई करस्यो, -२, नई उमंगां आई है जन-जन में ।। तपसी रो तेज देख, देव चकरावै है, राजा और बादशाह भी, शीष झुकावै है। नई प्रेरणा पाई

Bhachya, Tapsya Geet

Lage Rom Rom Me Tap Ro Tej Suhavano Re

(लय-आयो जैन जगत रो प्रमुख पर्व संवत्सरी रे) लागे रोम रोम में तप रो तेज सुहावनणों रे,  म्हारे तपसी रो दीदार घणो मन भावणो रे।  लागे रोम रोम में 1. तपसी धीरे-धीरे चाले तन मन वाणी न संभाले,  दर्शन ज्ञान चरित्र रुखाले, घाले शुद्ध भावना रा रस,  आज घणो घणो रे।। लागे रोम रोम में

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Varshitap Geet,

(लयः- देख तेरे संसार की)  वर्षीतप धाराहै इन्होंने, बहिना (भाई )है पुण्यवान।  इनके खूब करो गुणगान ॥ रहे समाधि और सुखसाता, यही करे अरमान।  इनके खूब करो गुणगान ॥ 1. बहुत कठिन है, तप का करना, बहुत कठिन है धीरज रखना, बहुत कठिन है लक्ष्य को वरना बहुत कठिन है इस पथ पर चलना, हममें

Adinath, Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Aayi Aayi Akshay Tritiya

(लय-मांयन-मांयन मुडेर) आई आई अक्षय तृतीया, दिल में खुशियां छाई। ऋषभ प्रभु ने किया पारणा, मंगल बेला आई। हो—- ऋषभ देवा 1. त्याग तप की लेकर शक्ति, घुमें बाबा ज्ञानी।  ऋषभ प्रभु थे मोनी-ध्यानी, वीतराग अनुरागी। तप की साधना से तुमने ज्ञान की ज्योति जलाई।। 2. एक वर्ष तक घूमे बाबा, अन्नजल नहीं है पाया।

Tapsya Geet, Varshitap

Varshitap Ro Parniyo Aayo Rang Udao Kesriyo

तेरह मास री कठिन साधना-2 फिर आयो क्षण पावनियों, वर्षीतप रो पारणो आयो, रंग उड़ावों केसरियो-2  देखो धरती महक रही है-2 वैशाखा लगे मन भावनियो।। वर्षीतप रो पारणो आयो, रंग उड़ाओ केसरिय-2, 1. देखो परम तपस्वी आये, फूल बरसाओ स्वागत में, सारी चिंता छोड़ दिए, जो लीन हुए प्रभु जप तप में , नमन करो

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Varshitap Geet, Aao Hum Khushi Ke Geet Gaye

(लय- झिलमिल सितारों का) आओ खुशी के हम गीत गाएं, मंगल घड़ी वर्षीतप की मनाएं, संयम ही जीवन है, इसको जीवन लक्ष्य बनाएं।। 1. वर्षीतप निर्मल गंगा है, इसमें तो सबको नहाना है, मिटेगें विकार मन के तपमय सुख को पाना है।  मन में प्रभु का ध्यान लगाएं।। मंगल घड़ी वर्षीतप की मनाएं। 2. तप

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Pyaari Lage Tapsan Jiri Sohni Surtiya, Varshi Tap

(लय-नगरी-नगरी द्वारें द्बारे) प्यारी लागे तपसन जी री सोहनी सुरतिया, प्यारी लगे तपसनजी री मोहनी मुरतिया।। 1. वीर वृत्ति साकार आपरी नैना आगे नाचणी,  रग-रग थांरी म्हें तो देखी तप संयम में राचणी।  सुपनै में भी सुनी ना कानां कायरता री बतिया ।।  प्यारी लगे तपसनजी सोहनी सुरतिया। 2. तपस्या में वर्षीतप रो तो बण्यो

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Jivan Sanyam Se Mahkaya Hai,geet Varshitap

(लय-दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है) जीवन संयम से यहां महकाया है, वर्षीतप का उत्सव खुशियां लाया है। तप के मंगल गीत झिलमिल करते हैं पुण्य का प्रकाश आंगन छाया है।। 1. आसमां से आज सुख कितना बरसता है,  ऐसा सुख तो पाने को हर कोई तरसता हैं।  धन्य है तपसी जो वर्षीतप कर पाया

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