Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Tap Ko Shat Shat Vandan

(लय- संयममय जीवन) तप को शत शत वंदन वर्षीतप का तप कर तुमने तोड़े कर्मों के बंधन । तप को शत् शत वंदन… दिन में दिख रहे है तारे, तप का काम करारा,  महावीर के तप के आगे, यक्षदेव भी हारा,  धन्ना शालिभद्र की तपस्या मानो शीतल चन्दन ।। तप को शत-शत वंदन तप से […]

Bhachya, Tapsyageet, Varshitap

Bhari Hai Samta Jivan Me, Varshitap Geet

(लय-चुड़ी जो खनकी) भरी है समता जीवन में, किया काम बड़ा ही कमाल देखो इस परिकर में 1. कहने में आसान लगे, करने पर ही पता चले,  मन पर जीत करे जो भी, पाए मंजिल वो पहले वर्षीतप का जीवन में, किया काम बडा ही कमाल इस परिकर में। 2. दृढ़ता और विश्वास रखा, संयम

Bhachya, Tapsya Geet

Yadi Krodh Tumhara Kam N Huaa (Tap)

,(लय-दिल लूटने वाले जादूगर) यदि क्रोध तुम्हारा कम न हुआ तो,तप का सिर झुक जाएगा,  यदि अहम् हमारा सम न हुआ, तो तप फिर धोखा खाएगा।  यदि क्रोध तुम्हारा कम न हुआ तो तप का सिर झुक जाएगा। 1 . तप उतर जाये आचारों में, जीवन के हर व्यवहारों में, बदली नहीं-2 जीवन की धारा,

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Abhinandan Varshitap Ro

(लय-बादलियो आंखडल्या) अभिनंदन वर्षीतप तप रो, सब मिल मंगल गावांला, आंगन में।  अभिनंदन तपसी रे तप रो, तप री, अलख जगावालां परिकर में।।  सब मिल मंगल गावाला आंगन में,। 1. वर्षीतप रे शुभ अवसर पर, फेल्यो तप रो च्यानणों,  उल्लासां स्यु भरग्यो म्हारों, आज पूरा आंगणियो  नयो उजाला आवैला कण-कण में।। सब मिल मंगल गावांला

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Mangal Geet Sunayenge, Varshitap Geet

(लय-यह भारत देश है) रंग बिरंगी तप सुमनों से, सुरभित दशों दिशाएं। लो मंगल गीत सुनाएं।। 1. हर फूल खिला, हर कली खिली, वरसा वर्षीतप सावन, जुही चंपा और चमेली, बना गुलाब यह शतदल। भीनी भीनी सौरभ से, गाती है गीत हवाएं। 2. नन्दनवन के इस उपवन में, बहते तप के झरने, तप गंगा में

Bhachya, Tapsya Geet

Tapsya Ka Matalab Samta Ki Sadhna

लय-तुम्ही मेरे मंदिर तपस्या का मतलब होता, समता की साधना, समता की साधना, समता की साधना, आत्मशुद्धि का लक्ष्य इसका नहीं और कामना, नही और कामना, नहीं और कामना 1. तन की तपन में तपकर चेतना निखरती है, मलिनतायें मन की तप की, आँच में पिघलती है, अन्तर में स्थित होकर जब होती उपासना, आत्मशुद्धि

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Tap Ki Aavaj, Varshitap Geet

(लय -मेरे सर पर रख दो) तपस्वी के कण-कण में गूंजे तप की ही आवाज,  खूब बधाई लीजिये, तुम पर हमको नाज,  वर्षीतप मंगल मंगल, तपस्या संबल संबल ।। 1. तप से आती तरुणाई, उससे तन मन स्वस्थ रहे, प्रतिदिन जिनके चले दवाई, वे भी तन में मस्त रहे।  यह जीर्ण रोग भी मिटते, है

Jain Bhajan, Tapsya Geet

Sur Se Sunau Sargam Se Sunau

सुर से सुनाऊं, सरगम से सुनाऊं जन-2 को सुनाऊं, तन मन से सुनाऊँ सबको, महिमा वीर नाम की-2 ओ महिमा वीर नाम की 1. ओ आदिनाथ भगवान जिनका पालीतना है धाम-2 उन आदिनाथ भगवान की मेरा बारम्वार प्रणाम-2 सुर से सुनाऊँ…. 2. ओ वासुपूज्य भगवान जिनका चम्पापुर है धाम-2 उन वासुपूज्य भगवान को मेरा बारम्बार

Bhachya, Tapsya Geet

Maha Kathin Hai Kam Tapsya

महा कठिन है काम तपस्या, कर बाते करना बहुत सरल है, मुश्किल है बलिदान रे ।। स्थायी तप की महिमा मुक्त कंठ से, गाते शास्त्र मनस्वी,  नहीं भटकता गहन तिमिर में, विजयी दिव्य तपस्वी, मिल जाता, लक्ष्य स्वयं उसको जो, करता अनुसंधान रे…।। 1 ।। तपे तपस्वी देखो कितने, एक – एक से भारी, धनजी,

Bhachya, Tapsya Geet

Karo Tapsya Mite Samsya,

करो तपस्या, मिटे समस्या, सुनलो रे,  भवजल तरणी, निर्मल करणी, करलो रे,  ऐसा अवसर, मिले न फिर, संभलो रे ॥ स्थायी ॥ तन धन यौवन चंचल माया, ज्यों बादल की छाया, दुनियांदारी झूठी यारी, क्यों मन को भरमाया।  मन समझाना, धर्म खजाना, भर लो रे।॥1॥ तप जप करते यौवन बीते, तो हम धन्य बनेंगे,  तन

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