Tulasi Archana
तुलसी अर्चना (तर्ज – ऐ मेरे वतन के लोगों….) भैक्षव शासन नवमाधिप, तुलसी प्राणों से प्यारे । चरणों में तेरे वंदन, चंदेरी लाल दुलारे ।। मां वंदना के आंगन में, तुम नई रोशनी लाए । कुमकुम पगल्या प्रांगण में, पा दिव्य रूप हरसाए । द्वितीया के इस चंदा को, ये प्यासे नयन निहारे ।।1।। गुरु […]