Author name: Sunita Dugar

Tulsi

Tulasi Archana

तुलसी अर्चना  (तर्ज – ऐ मेरे वतन के लोगों….) भैक्षव शासन नवमाधिप, तुलसी प्राणों से प्यारे । चरणों में तेरे वंदन, चंदेरी लाल दुलारे ।। मां वंदना के आंगन में, तुम नई रोशनी लाए । कुमकुम पगल्या प्रांगण में, पा दिव्य रूप हरसाए । द्वितीया के इस चंदा को, ये प्यासे नयन निहारे ।।1।। गुरु […]

Guru

Jyoti Charan Abhyarthana

ज्योतिचरण अभ्यर्थना चरण शरण गुरु महाश्रमण की, झंकृत मन तंत्री के तार । श्रद्धा सुमनों से आपूरित, झेलो भक्ति भरा उपहार ।। विहस उठी थी दशो दिशाएं, पाकर झूमर कुल नंदन । मंगल गीतों से अभिगुंजित, माँ नेमा का घर आंगन । मोहनगारी मूरत तेरी, बन गई जन जन प्राणाधार ।।1।। सरदारशहर की पुण्यधरा पर,

Mahapragya

Mahapragya Gururaj

स्तवना महाप्रज्ञ गुरुराज ।, चरणों श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं। हम सविनय शीष झुकाते हैं ।। पुण्यधरा टमकोर, छाई खुशियां चिहुं ओर, मां बालू हरसाई । प्रभु जन्म हुआ सुखकर, चौरड़िया कुलशेखर, दो बहनों के भाई। हो… स्वप्न हुआ साकार, सब मिल गीत खुशी के गाते हैं ।।111 वैराग्य भाव जागा, मां बालू का सागा, दीक्षा

Mahavir Swami

Mahavir Aap Padhare

महावीर भजन (लय- जहां डाल डाल पर) शुभा तिथि शुक्ला तेरस को प्रभुवर आप पधारे । त्रिशलानंदन प्रभु प्यारे ।। विपुल बढ़ा धन धान्य जन्म से, वर्धमान कहलाए । देव पराजित हुआ खेल में, महावीर बन छाए । देवों को सन्मति प्रदान की, सन्मति के रखवारे ।।1।। सिद्धार्थ कुल के नंदन तुम हो, नंदीवर्धन भ्राता

Jain Bhajan

Parmeshti Stavan

परमेष्ठी स्तवन (लय- नीले घोड़े रा असवार) मंगल महामंत्र नवकार, ऋद्धि सिद्धि का भंडार । भक्ति रस से गावो रे, सिद्धि पथ अपनावो रे । परमेष्ठी पंचक में पहला, अरिहंतों का नाम । तीर्थंकर पद किया सुशोभित, सफल हुए सब काम । चारों तीर्थ बने गुलजार, पाकर तुम जैसा आधार ||1|| परमात्मा पद पर हैं

Mata Ji, Mata Mataji

Mandirwa Me Maiya Baithi

(लय- अंखियों से गोली मारे ) माता रानी का सुन्दर भजन  मंदिरवा में मैया बैठी करके सिंगार हो-2, मंदिरवा में मैया बैठी- मैया के माथे पे बिन्दिया चमके 2 ,टीका के आरे तीरे सिंदुरा हजार हो मंदिरवा में मैया – मैया के कानों में झुमका चमके-2 नथिया के आरे तीरे मोतिया हजार हो- मंदिरवा में

Hanuman Ji, Ram

Thumak Chalta Ram Chandra

ठुमक चलत रामचंद्र ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां ठुमक चलत रामचंद्र किलकि-किलकि उठत धाय किलकि-किलकि उठत धाय, गिरत भूमि लटपटाय धाय मात गोद लेत, दशरथ की रनियां ठुमक चलत… बाजत पैंजनियां ठुमक चलत रामचंद्र अंचल रज अंग झारि अंचल रज अंग झारि, विविध भांति सो दुलारि विविध भांति सो दुलारि

Krishna Ji, Shyam

Kabhi Ram Banke Kabhi Shyam Banke

कभी राम बनके कभी श्याम बनके, चले आना प्रभुजी चले आना ॥ तुम राम रूप में आना, तुम राम रूप में आना सीता साथ लेके, धनुष हाथ लेके, चले आना प्रभुजी चले आना ॥ कभी राम बनके कभी श्याम बनके, चले आना प्रभुजी चले आना ॥ तुम श्याम रूप में आना, तुम श्याम रूप में

Bana Bani, Bani

Pili Pagdiya Wala Mera Bana Jug Jug Jiye

(लय- होलिया में उड़े रे गुलाल) पीली पगड़िया वाला बन्ना मेरा जुग जुग जिए बन्ना बन्नी गीत पीली पगड़िया वाला बन्ना मेरा जुग जुग जिए-२ * बन्ने का मुखडा है भोला भाला  गालों पे तिल काला काला  बन्ना मेरा जुग जुग जिए  पीली पगड़िया वाला— 2. बन्ने के माथै पे रोली का टीका गले में

Bana Bani, Bani

Foolo Se Saji Gadi Dware Khadi Re

फूलों से सजी गाड़ी द्वारे पर खड़ी रे आज मेरी बन्नो ससुराल चली रे.. बाबा भी रोवे दादी भी रोवे, बन्नो के मन में उमंग भरी रे, आज मेरी बन्नो ससुराल चली रे. फूलों से.. पापा भी रोवे मम्मी भी रोवे, मेरी बनों के मन में उमंग भरी रे, आज मेरी बन्नो ससुरा दली रे,

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