Bhikshu Swami

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Namo Guru Devanam

णमो गुरुदेवाणं    (लयः श्रद्धा विनय…..) रचयिता : साध्वी सिद्धप्रज्ञाजी उगी सुनहली भोर, णमो गुरुदेवाणं ।  प्रमुदित है हर पोर, णमो आयरियाणं ।। १. तेरापंथ के भाग्य निराले,  एक-एक से बढकर आले । भैक्षवगण सिरमौर ।। २. आर्य भिक्षु की अभिनव शैली,  ना कोई अपना चेला चेली । अनुशासन की डोर ।। ३. धर्म-क्रांति की […]

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Ghana Suhao Mata Dipaji Ra Jaya

घणा सुहावो माता घणां सुहावो माता दीपांजी रा जाया ! थांनै तो ध्यावै सारो राजस्थान हो, सारो हिन्दुस्तान हो, मानवता रा मान हो, जिन-शासन री शान हो, माता दीपांजी रा जाया ।। १. शास्त्रां री गहराई में, अति गहराई स्यूं थे उतस्या,  कांटां रै बीहड़ मारग में, निर्भयता स्यूं चरण धरया ।  हो स्वामी! कीन्हो

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Swamiji Thari Sadhna Ri Meru Si Unchayi

(लयः मारूजी ! थांरै देश में ……) स्वामीजी ! थांरी साधना री स्वामीजी! थांरी साधना री मेरू-सी ऊंचाई । मेरू-सी ऊंचाई, है सागर-सी गहराई हो ।। १. सिंह-सपन स्यूं आया माता, दीपां रै प्रांगण में,  सिंह-वृत्ति स्यूं ही उतस्या संयम रै समरांगण में,  मरुधर रा धोरी वीर जी, चाल्या बाधावां चीर जी,  कान खड्या होग्या

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Shree Bhikshu Swami Ro Prabal Pratap Hai

(लयः आने वाले कल की तुम ) रचयिता : युवाचार्यश्री महाश्रमणजी भिक्षु-स्मरण श्री भिक्षु स्वामी रो परम प्रताप है।  श्रद्धा-विधियुत नाम समरतां, मिटै बहुल संताप है।। १. मिलै नहीं जद अन्य सहारो, महापुरुषां नै याद करां, दुःख भय री स्थितियां में, आस्थासिक्त स्वरां स्यूं नाद करां जन-जन रोज जपै जयकारी जाप है ।। २. सत्य,

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Prabhu Ye Terapanth Mahan

प्रभो ! यह तेरापंथ महान प्रभो ! यह तेरापंथ महान । मिला, मिलेगा जिससे सबको आध्यात्मिक अवदान । प्रभो! यह तेरापंथ महान ।। १. आर्हत-वाङ्मय का उद्‌गाता,  जीवन-दर्शन का व्याख्याता,  मानव संस्कृति का निर्माता ।  जिसके कण-कण में मुखरित है,  शाश्वत का संगान ।। २. अभिनव धर्म-नीति निर्णायक,  सबल संगठन-सूत्र विधायक,  श्रम सेवा समता संगायक

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Vandana Lo Jhelo Bhakta Ri Bhagwan

वन्दना लो झेलो वन्दना लो झेलो, भक्तां री भगवान ! अर्चना लो झेलो, भक्तां री भगवान ! धूप-दीप चंदन नहीं है, है श्रद्धा सम्मान ।।  मन-मन्दिर रा देवता! म्हारा प्रियतम ! जीवन प्राण ! पल-पल पूजा-आरती म्है करां समर्पण प्राण ।। २. साचेला शंकर बण्या, कर धरती रो विष-पान । कळजुग में पिण राखली थे,

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Devte Batlaao

(लय: आपणै भागां री) रचयिता : आचार्यश्री महाप्रज्ञ  देवते ! बतलाओ  देवते ! बतलाओ शासन का आधार,  भिक्षुवर ! कैसे तुम बन पाए अवतार,  रोम रोम में रम रहे हो, बनकर एकाकार ।। . १ अनुशासन ही बन रहा है, शासन का आधार । मर्यादा को सिर चढ़ाकर, बन जाता अवतार ।। २. तेला भारीमाल

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Swami Bhikhanji Ro Nam Aathu Yam Dhyawa

(लयः म्हरि आंगणिये में……) आचार्य श्री तुलसी  स्वामी भीखणजी रो नाम स्वामी भीखणजी से नाम आठू याम ध्यावा, बाबलियै रो उपकार किंयां भूल ज्या वा।  सांवरियो म्हांरै रूं  रू रम्यो है, पल-पल छिन-छिन स्मृति  सरसावां ।। मंत्राक्षर है नाम स्वाम रो, सरल मंत्र है परमधाम रो. भिक्खू नाम री गंगोतरी में नित न्हावां ।। २.

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Siriyari Ro Sant

भिक्षु स्तुति  (रचयिता: आचार्यश्री तुलसी) सिरियारी से संत (लय: म्हानै गंगाजी रो पाणी) तेरापंथ रो भाग्य विधाता, श्रमण संघ रो सक्षम त्राता, लाखां आंखड्ल्यां रो तारो, हार हिया रो लागे । महानै सिरियारी रो संत प्यारो प्यारो लागे ।। १. सत्य सिराणै सदा राखतो, त्यागी सारी सुविधावां, जिनवाणी पर जीवन-जामा, झोंक्या बलिहारी जावां । बणों

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Bhikshu Hai Imarat Ro Jharno

भिक्षु है इमरत रो झरणो   (लय : धर्म की लौ जलाएं) रचयिता : साध्वी फूलकुमारीजी भिक्षु है इमरत रो झरणो ।  जनम मरण री पीर निवारण, है साचो शरणो ।। १. सुमिरण करयां कटै संकट, दुःख गल्या लारली जावै, काळी काळी राता में भी, स्वतः उजासो आवै ।  पितवाणी पूरी करली अब, और न कुछ

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