Bhikshu Swami

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Subah Subah Uth Kar Bhikshu Bhikshu Bol Tu

भिक्षु स्तुति (रचयिता : मुनि सुमतिकुमारजी)  (लय- बादलियो आंखडल्या में) सुबह-सुबह उठकर भिक्षु-भिक्षु बोल तूं, संकट सब कट जावैला, ओ सुजना ।। विघ्न हरण ओ मंगलकारी नाम है, दुःख में आडो आवैला, ओ सुजना ।। १. सांवरिये रो सुन्दर नाम, प्राणां स्यूं भी प्यारो है, बल्लूशा रो पुत्र, माता दीपां रो दुलारो है ।  भक्तां […]

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Munind Mora

मुणिन्द मोरा श्रीमज्जयाचार्य  मुणिन्द मोरा, भिक्षु ने भारीमाल, वीर गोयम-सी जोड़ी रे, स्वामी मोरा । अति भली रे, मोरा स्वाम ।। मुणिन्द मोरा, चोथा आरा नी चाल, विविध मर्यादा बांधी रे, स्वामी मोरा । निरमली रे, मोरा स्वाम 11१11 मुणिन्द मोरा, आप मांहि तथा गण में जाण, सुध संजम जाणो तो रे, स्वामी मोरा ।

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Rat Ri Andheri Me Jo Jap Karela

– सांवरिये रो नाम.  (लय: इक परदेसी.) रात री अन्धेरी में जो जाप करैला । सांवरिये रो नाम लियां काम सरैला ।। १. साचै मन स्यूं नाम लियां, जोश घणो जागै है, डरनै रो काम कांई, बोलतां भय भागै है ।  ।।  श्रद्धा री नाव आपो आपतरैला २. सपनो साकार हुयो, सिंह बणगूंज्यो  वेरी विरोधी

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Babe Ro Nam Bado Hai Pyaro

बाबै रो नाम बड़ो.   (लयः बन्ना ओ बागां में झूला) रचयिता : मुनि विजय  भिक्षु स्तुति  बाबै रो, नाम बड़ो है प्यारो ओ ।  म्हारी आंख्यां रो, तारो जीवन रो है उजियारो ।। १. सिंह री, ज्यूं गूंज्यो जीवन रण में ओ,  कायरता, कभी न ल्यायी मन में ओ । नहीं पायो है, पार प्रभु

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Om Bhikshu Bhikshu Nit Dhyawa

भिक्षु स्तुति (लय- संयम मय जीवन हो) रचयिता -साध्वी श्री रतनश्रीजी  ॐ भिक्षु भिक्षु नित ध्यावां ॐ भिक्षु भिक्षु नित ध्यावां । भिक्षु की म्हे अलख जगाकर आनन्दित बण ज्यावां ।। १. प्रातः भिक्षु सांयः भिक्षु, चलतां फिरतां भिक्षु,  उठतां भिक्षु, सोतां भिक्षु, तन में मन में भिक्षु ।  भिक्षु-भिक्षु-भिक्षु-भिक्षु, भिक्षु रो ध्यान लगावां ।।

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Bhikshu Swam Jyotirdham

भिक्षु स्वाम ज्योतिर्धाम  (लयः जय हनुमान अति बलवान) रचयिता- साध्वी कनक श्रीजी भिक्षु स्वाम, ज्योतिर्धाम पावन नाम, दीपानंदन !  म्हारै तो थांरो ही आसरो, हे सब दुःख भंजन !  म्हारै तो थांरो ही आसरो । थांरो ही आसरो, सदा सुखवास रो ।। १. बाबो है भक्त वत्सल, भगतां नै तारै,  सारै है काम सब रा,

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Bhikshu Bhikshu Hi &. Swami Ji Tharo Sangh Nirlo

भिक्षु भिक्षु ही जबां पर (लयः दिल के अरमां ……..) रचयिता : साध्वी चाँद कुमारी जी भिक्षु भिक्षु ही जबां पर नाम है।  तेरे नाम से मिलता बड़ा आराम है ।। १. हृदय की धड़कन तुझे पुकारती,  दर्श पाने को ये पलकें निहारती ।  जिन्दगी का तूं सही विश्राम है ।। २. हर सांस में

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Bhikshu Ki Abhivandana Hu Kar Rahe

भिक्षु की अभिवन्दना  (लय- दिल के अरमां) साध्वी -जयश्री जी भिक्षु की अभिवन्दना हम कर रहे  स्मरण से मन में खुशाली भर रहे।। १. आ गये वे विश्व की तकदीर बन ।  नाम से भव-सिन्धु सारे तर रहे ।। २. जिन्दगी भर बन शमां जलते रहे रोशनी से हर अंधेरा हर रहे ।। ३. संघ-हित

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Om Bhikshu Jai Bhikshu

(लयः पायलिया) रचयिता : साध्वी यशोधराजी ॐ भिक्षु जय भिक्षु ॐ भिक्षु जय भिक्ष, मंत्र बड़ा ही सुखकार रे तन्मय हो जपने से, होगा निश्चित ही बेड़ा पार रे, सांवरिया हो…हो..हो.., दीपांलाल हो…हो…हो.. ।। नाम तेरा संकट मोचक, जन-मन रोचक, मंगलकारी हो…. प्रभुवर… हो ।। १. भिक्षु तू मेरा राम है, तू ही मेरा घनश्याम,

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Bhikshu Ashtakam

भिक्षु अष्टकम् आचार्य भिक्षु के १८८ वें निर्वाणोत्सव पर सिरियारी में आचार्य श्री महाप्रज्ञ द्वारा समुच्चारित १. अकम्पः संकल्पः क्वचिदपि न केनापि चलितः , न चित्ते चांचल्यं न च विपथगामीन्द्रियगणः ।  समं सोढा गालिः क्वचन घनमुष्टेः प्रहरणं,  प्रसन्नात्मा भिक्षुर्नयनमवतारं नयतु मे ।। २. न रागो न द्वेषो घटितघटनासु प्रतिकृतः,  विरोधः सद्भावे परिणतिमुपागात् प्रतिपदम् ।  न

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