Bhikshu Swami

Bhikshu Swami

Om Bhikshu OM Japo Sada

ओम भिक्षु जपो सदा ओम भिक्षुओम भिक्षु जपो सदा, चाह फले मुक्ति मिले । है नाम मंगलकारी, विघ्न बाधाहारी, विघ्नबाधा हारी इसने लाखों नैया तारी ।। असहायों का भिक्षु नाम सहारा है-सहारा है,  घोर अमा में करता दिव्य उजारा है, उजारा है,  ओम भिक्षु पंगु को पहाड़ चढाता है,  मूक मनुज को वाणी वर मिल […]

Bhikshu Swami

Kelawa Ke Yogi Tere Nam Ka Sahara Hai

शूरवीरो को धरा महान राजस्थान है  भिक्षु की जन्म भूमि कंटालिया ग्राम है।  गुलामी की जंजीरों से त्रस्त सारा देश था।  शिथिल विचारों से धर्म निस्तेज था ।।  आषाढी तेरस सन्‌ तैयासी प्यारा है  दीपाजी के लाल (बल्लूशा) जन्मा कुल उजियारा  है केलवा के योगी तेरे नाम, का सहारा  है।   बचपन प्रखर प्रतिभाकी निशानी

Bhikshu Swami, Terapanth

अ भी रा शि को उदारी हो (विघ्न हरण की ढाल)Abhi Ra Shi Ko Udari Ho (Vighn Haram Ki Dhal)

 धम्म-जागरणा विघ्न-हरण  श्रीमज्जयाचार्य अ.भी.रा.शि.को. उदारी हो, धर्ममूर्ति धुन धारी हो, विघ्नहरण वृद्धिकारी हो, सुख संपति दातारी हो । भजो मुनि गुणां रा भंडारी हो ।। १. भिक्षु भारीमाल ऋषिरायजी, खेतसीजी सुखकारी हो, हेम हजारी आदि दे, सकल संत सुविचारी हो । प्रणमूं हर्ष अपारी हो ।। २. दीपगणी दीपक जिसा, जयजश करण उदारी हो,  धर्म-प्रभावक

Bhikshu Swami

Terapanth Prabodh(Shradha Swikaro Terapanth Ra Adhidevta

धम्म-जागरणा तेरापंथ-प्रबोध श्रद्धा स्वीकारी तेरापंथ रा अधिदेवता !  शक्ति संचारों तेरापंथ शासन-देवता । थारै पर म्हांरी आस्था अपरम्पार हो,  जन जीवन आधार हो, ह्रत्-तन्त्री रा तार हो,  मरुधर रा मन्दार हो, तेरापंथ रा अधिदेवता । १. राजस्थान गाम कंटालिय आषाड़ी तेरस आई,  बल्लू शा दीपां घर जायो, पुत्र फळी है पुण्याई ।  हो सन्तां। सतरैसै

Bhikshu Swami

Munind Mora

मुणिन्द मोरा – श्रीमज्जयाचार्य  १. मुणिन्द मोरा, भिक्षु नै भारीमाल, बीर गोयम-सी जोड़ी रे, स्वामी मोरा । अति भलो रे, मोरा स्वाम ।। मुणिन्द मोरा, चौथा आरा नी चाल, विविध मर्यादा बांधी रे, स्वामी मोरा । निरमली रे, मोरा स्वाम ॥ २. मुणिन्द मोरा, आप मांहि तथा गण में जाण, सुध संजम जाणो तो रे,

Bhikshu Swami

Swam Sacha Adbhut Vacha Kahi Re

स्वाम साचा अनुभुत वाचा कही रे  स्वाम साचा अदभुत वाचा कहीरे कही रे-2 1 स्वाम भिक्षु परगटया जग माही माही कीरत थई रे-2 श्री जिन आणा सिर धरी-2 वर न्याय मतना कही  रे स्वाम साचा, अदभुत वाचा कही रे  2आगूच उत्तराध्ययन में इन धार पंचम बही रे-2  जिन बिना शिव पंथ होसी-2संत  शब्द सही रे,

Bhikshu Swami

Swamiji Aao Dekh Lyo

( लयः सारंगा तेरी याद में) रचयिता : मुनि मधुकरजी स्वामीजी ! आवो देखल्यो स्वामीजी! आवो देखल्यो, नैणां में तसवीर ।  तरस रह्या म्है दरस बिना, मछल्यां ज्यूं बिन नीर ।। १. पल-पल जोवै बावरी, पलकां थांरी बाट,  मिलणो चावै मोद स्यूं, बंधन सारा काट ।  दिखलाद्यो प्रभु वेग स्यूं, अपणो रूप विराट ।। २.

Bhikshu Swami

Bhikshu Bhikshu Bhajan Ho

भिक्षु स्तुति  .(लय : संयममय जीवन हो ) रचयिता : मुनि सुमेरमलजी, ‘लाडनूं’ भिक्षु भिक्षु भजन होभिक्षु-भिक्षु भजन हो। तन से, मन से और वचन से प्रतिपल यही रटन हो। भिक्षु-भिक्षु भजन हो ।। १. जब-जब जाप किया श्रद्धा से, अयि गुरुदेव तुम्हारा, तब-तब नष्ट अरिष्ट हुए सब, दुःख से मिला किनारा ।  देव! तुम्हारे

Bhikshu Swami

Bhikhanji Swami Bhari Maryada Bandhi Sangh Me Lyrics

(लय : बधाओ गावो) भीखणजी स्वामी! भीखणजी स्वामी! भारी मर्यादा बांधी संघ में।  प्रबल प्रतापी शासन वीर रो, जिण में जग रही जगमग ज्योत हो ।। १. देखी दशा दयामणी, आ तो साधु-संघ की आप हो । कांप्यो कळेजो म्हारै पूज्य रो, किन्ही मूल सहित थिर थाप हो ।। २. सकल साधु अरु साधवी, बहो

Bhikshu Swami

Swami Ji Mhane Darshan Dinha Ji

(लय – कुरजा ए म्हारा भंवर मिला दे)  मुनीश्री श्रमण सागर स्वामी जी म्हाने दर्शन दीन्हा जी-2 दर्शन दिन्हा प्रेम स्यू-२ म्हार माथ पर धर हाथ  स्वामी जी म्हाने दर्शन दिन्हा जी  दिन्हा दर्शन प्रेम स्यू, म्हार मनडे री पूछी दोय बात -2  स्वामी जी म्हाने दर्शन दीन्हा जी-2 सांवली सूरत सोहणी-2  टप टप करतो

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