Jain Bhajan

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Duniya Me Mantra Aneko Hai

दुनिया में मंत्र अनेको है नवकार मन्त्र का क्या कहना  इस महामंत्र का क्या कहना, नवकार मंत्र का– ① गणधर गौतम इसको जपते  साधु श्रावक इसमे जपते यह कामधेनु यह कल्प वृक्ष  इसकी महिमा का क्या कहना  ② प्रातः उठकर सब ध्यान घरे  पल-2 में इसको हम समरे  सब पाप ताप संताप ह रे इस […]

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Chod Diya Gharbar Nemaji

(लय : चांदी की दीवार न तोड़ी) छोड़ दिया घरबार नेमजी, सुखवैभव को छोड़ दिया, संयमपथ को धार नेमजी, भवसागर को पार किया ।। ध्रुव ॥ १. आये तो थे ब्याह रचाने, छाई हुई थी खुशियाली  तीन लोक के जानने वाले, देखी वहां घटा काली  लाखों पशु बिलखते रोते, मौत अभी आने वाली  उनकी करुण

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Shanti Jineshwar

शांति जिनेश्वर शांति करो लय : शान्ति करों सव विघ्न हरों ओम शांति जिनेश्वर शांति करो, शांति करो सब विघ्न हरो। घट घट में अभय पीयुष भरो ॥ ध्रुव ॥ १. तुझ नाम लिया दुःख द्वन्द मिटै, झट डाकिन भूत पिशाच हटे विष उतरै विषधर काले रो॥ २. दुष्काल मृगी अरु मरी टलै, भूचाल भयंकर

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Neminath

भगवान नेमिनाथ की बारात (लय : चांदी की दीवार) शादी करने आये नेमजी कांकड़ डोरा तोड़ दिया  तोरण पर आकर प्रभु ने रथ का मुखड़ा मोड़ दिया हाथी, घोड़े, रथ पैदल बारात बड़ी ही भारी थी  श्याम सलौने नेम कंवर की छवि बड़ी ही प्यारी थी  छप्पन कोड़ी आये बाराती यह तो सब से न्यारी

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Lelyo Shanti Prabhu Ro Nam

लेल्यो शान्ति प्रभु रो नाम लेल्यो शान्ति प्रभु रो नाम, जिनवर शांति-२ रो धाम । धोल्यो दिल रा पाप तमाम, बेगी मुक्ति मिलसी, हो बेगी.. ॥ ध्रुव ॥ १. नहीं है जीवन रो विश्वास, अचानक रुक जावे लो सांस । पूरी हुई न किणरी आश, मन की मन में रहसी, हो मन की.. ।। २.

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Jin Shasan Tej Badhaiya Re

जिन शासन तेज बढ़ाया रे (लय : कैसी वह कोमल काया रे…) जिन-शासन तेज बढ़ाया रे, तीर्थंकर भगवान, हे कल्पवृक्ष की छाया रे, तीर्थंकर भगवान,  कितनों को पार लगाया रे, तीर्थंकर भगवान। अर्हत् है महिमा शाली, प्रवचन की छटा निराली, द्वादश गुण रूप कहाया रे, तीर्थंकर भगवान । है सिद्ध मुक्त अविकारी, शुभ आठ गुणों

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Tirthankar Chobis

तीर्थंकर चौबीस लय : चांद चढ्यो गिगनार तीर्थंकर चौबीस नित उठ ध्यान धरूं जी, ध्यान धरूं । मंगलमय जगदीश, महिमा गान करूं जी, गान करूं ॥ १. रिषभ, अजित भगवान संभव सुखकारी जी, सुखकारी। अभिनंदन जग त्राण, सुमति जयकारी जी, जयकारी ॥ २. पद्म सुपारसनाथ, चंदन चंद्रप्रभु जी, चंद्र प्रभु। सुविधि, शीतल, श्रेयांस, वंदन वासुप्रभु

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Prath Uth Parmeshthi Vandan

प्रातः उठ परमेष्ठी वंदन करूं (लय : कितना बदल गया संसार ) प्रातः उठ परमेष्ठी वंदन, करूं सदा निष्काम। शांति रहेगी आठों याम। १. ऋषभ, अजित, संभव, अभिनन्दन, सुमति, पद्मप्रभु पाप निकंदन, नाथ सुपार्श्व, चंद्रप्रभु, सुविधि, शीतलप्रभु से चाहूं सिद्धि, समरूं नित श्रेयांसदेव अरु वासुपूज्य अभिराम। २. विमल, अनंत, धर्म सुखकारी, शांति, कुंथु, अरि अरसंहारी,

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Simandhar Bhagwan

सीमंधर भगवान जी मैं चरणां शीश नमाऊ जी मैं दर्शण किण विध पाऊं। जी म्हारी वीनतड़ी अवधारो, जी मोहे तारो पार उतारो। जी संसार लगै छै खारो, जो वैराग्य लगै छै प्यारो। जी म्हारा आवागमन निवारो, जी सीमंधर भगवान ।। १. सीमंधर प्रभु नै प्रणमुं, चरणां शीश नमाय, आप तणां गुण मुख स्यूं गायों म्हारा

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Om Mangalam

मंगल वाणी ओम मंगलं ओंकार मंगलं आदि मंगलं आदिनाथ मंगलं ओम मंगलं ओंकार मंगलं शांति मंगल शांतिनाथ मंगलं ओम मंगलं ओंकार मंगलं वीर मंगलं महावीर मंगलं ओम मंगलं ओंकार मंगल नमो मंगलं सिद्धिनाम मंगलं ओम मंगलं ओंकार मंगलं साधु मंगलं साधुनाम मंगलं ओम मंगलं ओंकार मंगल धर्म मंगलं धर्मनाम मंगलं ओम मंगलं ओंकार मंगलं गुरु

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