Jain Bhajan

Adhyatmik, Jain Bhajan

Ki Man Ko Shant Banaye Hum

सांस सांस पर परमात्मा का ध्यान लगाये हम  किमन को शान्त बनाये हम 1 जीवन है संग्राम से जीना सीखे हम  अमृत व विष दोनो को पीना सीखे हम  लाभ अलाभ हर्ष, शोक में सम् बन जाए हम  कि मनको मन को शान्त बनाये हम  2. वर्तमान में जीने का अभ्यास बढ़ाते जाये  भूतकाल के […]

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Parmeshti Stavan

परमेष्ठी स्तवन (लय- नीले घोड़े रा असवार) मंगल महामंत्र नवकार, ऋद्धि सिद्धि का भंडार । भक्ति रस से गावो रे, सिद्धि पथ अपनावो रे । परमेष्ठी पंचक में पहला, अरिहंतों का नाम । तीर्थंकर पद किया सुशोभित, सफल हुए सब काम । चारों तीर्थ बने गुलजार, पाकर तुम जैसा आधार ||1|| परमात्मा पद पर हैं

Jain Bhajan

Duniya Me Dev Aneko Hai Arhant Dev Ka Kya Kahna

दुनिया में -2देव अनेको है, अरिहंत देव का क्या कहना  उनकेअतिशय का क्याकहना,उनकेआश्रय का क्याकहना दुनिया में देव अनेको है अरिहंत देव का क्या कहना  जो दर्शन ज्ञान अनंता है ,जो राग दैष जंयवता है-२  जहाँ समकित -2दीप जले नित है  उनकी क्षमता का क्या कहना   जो आदि,धर्म की करते हैं, भव्यों के भव को

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Mantra Navkar Hame Prano Se Pyara

मंत्र नवकार हमें प्राणों से प्यारा, ये है वो जहाज जिसने लाखों को तारा अरिहंतों का नमन हमारे, अशुभ कर्म अरि हनन करे । सिद्धों के सुमिरन से आत्मा, सिद्ध क्षेत्र को गमन करे । भव भव में नहीं जन्में दुबारा ॥मंत्र नवकार…॥१॥ आचार्यों के आचारों से, निर्मल निज आचार करें । उपाध्याय का ध्यान

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Mangal Bhavna

मंगल भावना श्री सम्पन्नोऽहं स्याम् मैं आभा – सम्पन्न बनूँ ही सम्पन्नोऽहं स्याम् मैं लज्जा – सम्पन्न बनूँ धी सम्पन्नोऽहं स्याम् घृति सम्पन्नोऽहं स्याम् शक्ति सम्पन्नो ऽहं स्याम् शांति सम्पन्नोऽहं स्याम् मैं बुद्धि – सम्पन्न बनूँ मैं धैर्य – सम्पन्न बनूँ मैं शक्ति – सम्पन्न बनूँ मैं शांति – सम्पन्न बनूँ नन्दी सम्पन्नोऽहं स्याम् मैं

Jain Bhajan

Chidanand Roopam Namo Vitragam

वीतराग वंदना (मंगला चरण) ① शिव शुद्ध बुद्धं परम विश्व नाथं  न देवन बन्धू न कर्माणि कर्ता  न अंगं न संगं न इच्छा न कामं,  चिदानंद रूपं नमो वीतरागं  ②न बंधो न मोक्षो न रागादि दोषं  न योगं न भोगं न व्याधि न शोकं न क्रोधं न मानं न माया न लोभं चिदानद रूपं– ③न

Jain Bhajan

Jhum Jhum Prabhu Ke Gun Gale

झूम – २प्रभु के गुण गाले,गुण गाले प्रभू गुण गाले भव बन्धन कट जायेगा जो शरण प्रभु की आयेगा हिल मिल्‌कर जिन मन्दिर आये आज  दर्शन पाये धन्य घड़ी धन्य भाग  हमबार  करे नमस्कार जो शुद्ध भावना भायेगा,  वो मन वांछित  फल पायेगा लोभ क्रोध को इस जीवन से त्याग  माया मम ता छोद द्वेष

Jain Bhajan

Jay Bolo Jay Bolo

तर्ज-सायोनारा (लव इन टोकियो। जय बोलो   जयबोलो, जैन धर्म कीजय बोलो  दुनिया के हर कोने से सब मिल करके जयबालो ये वो शीतल छाया  है नहीं जहाँ छल माया है,  सत्य अहिंसा और धरम जहाँ सभी को भाया हैं  जय बोलो… महावीर को ये वाणी सारी दुनिया नेजानी जीओ सबको जीने दो मत करना तुम

Jain Bhajan

Namo Arhantam Namo Bhagvantam

(लय- बाबो. अलबलो) नमो अरहन्तं नमोभंगवतं पार लगाए नौका नमो महामतं ① राग व द्वेष न जिसमे समता सुनाए।  एक ही घाट बकरी शेर आए जाए।  महिमा निराली प्रभु की नमो धैरयवन्तं ॥ ② कोईनभाऐ तुमको दिल में बिठाऊं    रात् दिवस क्या पल -२छिन-२धयाऊ  अपने बराबर करलो नमो सिद्धिवंत ॥ एक जनम क्या लाखों जन्म

Jain Bhajan, Paryushan

Koti Koti Kantho Se Gaye

क्षमा दिवस (मैत्री मंत्र) (तर्ज : कोटि कोटि कंठों से गाएं……) बड़े प्रेम से मिलजुल सीखें, मैत्री-मंत्र महान रे । औरों से ले क्षमा स्वयं, औरो को करे प्रदान रे ।। व्यक्ति – व्यक्ति में जाति-जाति में, वैमनस्य जो बढ़ता, प्रातं-प्रांत में राष्ट्र-राष्ट्र में, अन्तर जाता पड़ता । यह भारी, विश्व-शान्ति को खतरा, हो इसका

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