Nirgun Bhajan

Adhyatmik, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagya

Bada Dukh Paya Re Tujhko Bisar Ke

(लय- छुप गया कोईरै) बड़ा दुख पाया रे तुझको बिसार के  रंग अनोखे देखें, इस संसार के भूले उपदेश तेरा ये, जगवासी,  चोला अनमोला खोये बनकर विलासी  कर्मों की वीणा बाजे पापों के तार से ।। भटके पथिक अब हुए हैं. दीवाने गकर्म की गति को कोई नहीं पहिचाने    प्यासे है सब तेरी अमृत सी […]

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Meettho Meettho Bol Tharo Kai Bigade

(तर्ज-धीरे-2 बोल कोई सुन ना ले) मीठो-२  बोल थारो काई बिगड़े ,काई बिगडै़ थारो काई बिगडै़-३  इस दुनियां में गम नहीं ,कब निकले प्राण मालुम नहीं   सोच समझ लेना तु ये संसार  खाली झोली मत भरना तु यार  तु जान ले पहचान ले, संसार किसी का घरनहीं कब निकले प्राण मालूम नही भूल गया  क्यों

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Is Madhur Jingani Ka Bharosa Nahi

( तर्ज – तुम अगर साथ देने का वादा करो) इस मधुर जिन्द‌गानी का भरोसा नहीं । कोन जाने ये पंछीकब उड़‌ जायेगा  तेरा वश न चलेगा कोई भी वंहा काल जब सिर पे आकर के मंडरायेगा ये मानव का भव् है बड़ा कीमतीपुण्य काहोउदय  तब कहीं ये मिले गर विषय‌वासनाओं में डूबे रहे पाप

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Jo Bhi Mila Khajana Use Bant Jana Re

मिला खजाना (तर्ज : नानी तेरी मोरनी को मोर ले गया……….) जो भी मिला खजाना उसको बांट जाना रे। क्या जाने कब होगा इस धरा पर आना रे । । ध्रुव ॥ बहुत कमाया बहुत ही खाया काफी मौज उड़ाई। श्रम से कोड़ी कोड़ी जोड़ी पूंजी खूब बढ़ाई। मिट्टी के सब खेल खिलौने मत फस

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Durlabh Manav Jeevan

दुर्लभ मानव जीवन (लय : ऐ मेरे दिले नादान……..) दुर्लभ मानव जीवन तेरे हाथ मे आया है,  इस क्षण भंगुर जग में, मन क्यों ललचाया है। दुर्लभ……. ॥ ध्रुव ॥ यह तन तो मिट्टी का, एक बना खिलौना है,  इस नश्वर तन को तो, इतना क्या धोना है,  जिसने छोडी ममता उसने सुख पाया है।

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Mat Kar Re Mat Kar Re

-: आखिर तो जाणो पड़सी :- (लय : सुण सुण रे…………) मत कर रे, मत कर रे मत कर रे तूं मोह जगत स्यूं, आखिर तो जाणो पड़सी ॥ १. सुख स्यूं जीणो, सुख स्यूं मरणो, अरिहन्तां रो साचो शरणो । बेटा पोता के करसी, आखिर तो जाणो पड़सी ॥ २. चार दिनां री चमक

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Kiwadi Khol Hiye Ri

किंवाडी खोल हियैरी (लय : मिलो न तुम हम घबरायें) माटी री मूरत है काया, क्यूं तू देख लुभायो ? किंवाड़ी खोल हियै री। झूठी सारी ममता माया, थोथै भरम भुलायो, किंवाड़ी खोल हियै री ॥ स्थायी ॥ जीणो है थोड़ो सो, किसी बात पर तूं बण्यो आकरो ? खावै पंसेरी री, फैंके जो दूजां

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Jhuthi Jag Ki Maya

झूठी जग की माया (लय : मेरे मन की गंगा) झूठी जग की माया, और मिट्टी की यह काया रे। बोल बन्दे ! बोल, तूने जाना क्यों नहीं। १. खाली हाथ तूं आया जग में, खाली हाथ ही जायेगा, चुग जायेगी खेत ये चिड़िया, हाथ मसल रह जायेगा। पग पग खड़े लुटेरे, तूं लूट जाना

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Thari Ankhya Me Loi Ro Ufan

थांरी आंख्या में लोही रो ऊफाण थांरी आंख्या में लोही रो ऊफाण। छोड़ो क्यूं कोनी क्रोध रो नशो ?  थांरी अक-बक बकणै री पड़गी बाण। दूजां नै काले नाग ज्यूं डसो ॥ ध्रुव ॥  क्रोध बड़ो दुर्गुण दुनिया में, घट-घट में वसनारो। जिण घट में नहि क्रोध निवासी, बो नर जगत-सितारो ॥ पंचेन्द्रिय प्राणी री

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Jindagi Anmol Hai Yah

जिंदगी अनमोल लय : मेरा जीवन कोरा कागज जिंदगी अनमोल है यह, क्यों तूं खो रहा है यही जगने की बेला, क्यों तूं सो रहा। १. तुच्छ भौतिक आस में क्यों, हारता जीवन। मानता जिसको तू अपना, वह पराया धन। है नहीं कुछ भी यहां तू, व्यर्थ रो रहा ॥ २. जाग निद्रा त्याग कर

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