Jain Bhajan

Gyanshala Geet, Jain Bhajan

Arham Arham Ki Vandana Fale Gyanshala Geet

अर्हम अर्हम  की वन्दना फले । जीवन विकास हो, मन में सुवास हो, देखो दीपक से दीपक जले । विद्या के पावन मंदिर में सच्ची शिक्षा हम पाएं, सदाचार के सुन्दर पथ पर कदम-कदम बढ़ते जाएं । चाहे रात या प्रभात हो भले ।। : हम सारे हैं भाई-भाई भ्रातृभाव से सदा बढ़ें, अपना संयम […]

Jain Bhajan

Matbhedo Ki Tod Diware

मतभेदों की तोड़ दीवारें आर्हत वाणी प्राण हमारा, हम इसका सम्मान करें। अपना जीवन बलिदान करें, सब मिल जुल नव्र अभियान करें।॥ -. महावीर तीर्थकर ही हम सबके भाग्य विधाता ‘है। महामंत्र नवकार हमारे जीवन का निर्माता है। फिर क्यों दूरी रहे परस्पर युग हमको आह्वान करे ॥ 2. जिन शाासन की प्रभावना में दूरी

Jain Bhajan, Paryushan

Maitri Ke Anupam Deep Jale

मैत्री के अनुपम दीप जले, पर्युषण पर्व सुहाना है। श्रद्धा के सुरभित सुमन खिले, पर्युषण पर्व सुहाना है। १. मुश्किल से मानव जन्म मिला। जिन शासन पा सौभाग्य खिला। तप जप करने वे क्षण उजले ॥ २. माला जपने मन टिका नहीं। ना सामायिक स्वाध्याय कहीं। अवसर है आराधन कर लें ॥ ३. ये बीत

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Parv Aaya,

पर्युषण पर्व आया, इन्तजार करते करते।  श्रद्धा का रंग लाया, उत्साह भरते भरते ॥ १. अनमोल है यह अवसर, अब धर्म साधना का।  उड़ जाए मोह निद्रा, नवकार जपते जपते ॥ २. सामायिकें तपस्या, स्वाध्याय लीनता हो।  आत्मा में हो सरलता, जिनवाणी सुनते सुनते ॥ ३. मौसम सुहावना है, हर दिल में जोश जागे।  निपजाओ

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Parv Hariday Me Ullas Bhar Raha

पर्व पर्युषण हृदय उल्लास भर रहा। जागरण का जागरण का, अनवरत आह्वान कर रहा। २. जन्म मृत्यु अनन्त अब तक हो गए चेतन । और होते ही रहेंगे, ज्ञान कर चेतन ! मोह का मोह का, है उदय जिससे चक्र चल रहा ॥ २. कर्म फल भुगतान करते अन्त कुछ आया। उच्च कुल में पुण्य

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Yah Parv Mahan,

(तर्ज : मेहंदी रची थारै) पर्युषण यह पर्व महान्, करते हम दिल से सम्मान।  छाई अजब बहार हो, हर घर घर में। १. चौरासी के चक्कर में, हम सबने जन्म किए कितने ।  जन्म मरण की परम्परा में, सहन वेदना की हमने।  अब तो मिला किनारा है, श्री जिन धर्म सहारा है।  जीवन की पतवार

Jain Bhajan, Terapanth

Mahima Shasan Ri

(तर्ज: धरती धोरां री) महिमा शासण री… भैक्षव गण री गरिमा भारी।  जागी भाग्य दशा आपांरी।  फूली फूलां स्यूं फुलवारी ॥ १. तुलसी उपवन नै जीणै रो विज्ञान सरसायो।  सिखायो । पार समन्दर जश फहरायो ॥ २. जो भी मर्यादा में चालै।  गुरुवर हाथ पकड़ कर झाले।  पग पग सारा संकट टालै ॥ ३. विनयी

Jain Bhajan

Shasan Mila Prabhu Ka

(लय- तुझे सुरज कहुँ या चंदा’) शासन मिला प्रभू का, सौभाग्य है हमारा, आराधना हो ऐसी, न जन्म ले दुबारा 1. रिश्ते अनन्त हमने, हर जीवन में बनायें, कोई जगह नही है ऐसी, जहाँ जन्म हम ना पाये, चारों गति भटकते, नही पा सके किनारा ।। 2. नरभव मिले थे पहले, उपयोग ना करपाये,  सम्यक्त्व

Jain Bhajan

Sanyam Chalisa,jain Bhajan

संयम चालीसा’ मन में संयम तन में संयम, और वचन में भी हो संयम सांस सांस में संयम-संयम, जिन शासन है संयम-संयम 1. छह काय का रक्षक संयम, है पापों का तक्षक संयम तीर्थकर की ऊर्जा संयम, महाव्रतों की पूजा संयम -2 2. संयम से अरिहंत बने हैं, सिद्ध प्रभु जयवंत बने हैं, संत सती

Bhachya, Jain Bhajan, Tapsya Geet

Mahima Jain Dharm Ki,

सुर में गाऊं ,सरगम में गाऊं, गा गा के सुनाउ सबको-२ महिमा जैन धर्म  की ,सबको – २  आदिनाथ हैं, जिनका पालीताणा हैं उनका धाम नाम धाम ऐसे आदिनाथ को वंदन बारम्बार हैं। सुर– नेमिनाथ हैं, जिनका नाम गिरनार उनका द्याम  ऐसे नेमिनाथ को वंदन बारम्बार हैं। सुर– शान्तिनाथ हैं जिनका नाम हैं हस्तिनापुर हैउनका

Scroll to Top