Mahavir Swami

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Baje Kundal Pur Me Badhayi

बाजे कुण्डलपुर में बधाई बाजे कुण्डलपुर में बधाई, कि नगरी में वीर जन्मे-2, महावीरजी। जागे भाग्य हैं त्रिशाला माँ के 2 कि त्रिभुवन के नाथ जन्मे 2, महावीरजी ।। शुभ घड़ी जन्म की आई 2, कि स्वर्ग से देव आये, महावीरजी। तेरा न्हावण करे मेरू पर 2, कि इन्द्र जल भर लाये, महावीरजी ।। तुझे […]

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Jhule Palane Me Jhule

श्री महावीर स्तवन झूले, पलने झूले  (तर्ज बच्चे मन के सच्चे ….. दो कलियाँ) झूले, पलने झूले, सारे जग के तारण हारे। इन्द्र इन्द्राणी हर्ष मनाये, आकर द्वार तुम्हारे ।। झूले चेत सुदी तेरस का दिन, हर्षित मात-पिता सब जन। चारों दिशी मंगल छाया, सबने सुर सरगम पाया ।। देव दुंदुभि बजने लगी, छुम छुम

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Hum Vinay Sunane Aaye Mahavir

महावीर तुम्हारे चरणों में  (तर्ज दिल लूटने वाले जादूगर … मदारी) हम विनय सुनाने आये हैं, महावीर तुम्हारे चरणों में।  मन सुमन चढ़ाने आये हैं, महावीर तुम्हारे चरणों में ।। तुम ज्योतिपुंज तुम दया निधि, हम दीन हीन संसारी हैं। दुःख पीड़ित 2 हैं हम पड़े हुए, महावीर तुम्हारे चरणों में ।।। ।। हम विनय

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Aao Prabhu Mohe Darshan Do

( लय- बारबार तोहे  क्या समझाऊं) आओ प्रभु मोहे दर्शन दो, मै कब से करु पुकार  तुम बिन प्रभुजी कौन करे कर भवपार  हाथ जोड़ में अर्ज करूं सुन जग के पालन हार  (तुम बिन प्रभुजी कौन करे भव पार ) लख चोरासी फिर कर आयो पास तेरे  जन्म मरण दुख मेटो दीनानाथ मेरे  छल

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Vartman Ko Vardhman Ki Aavshykata Hai

वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता हर आत्मा दुखी है, सुख शांति खो चुकी है, परदृष्टि होके व्याकुल, महावीर पे रुकी है महावीर… महावीर…महावीर…महावीर… हिंसा पीडित विश्व राह महावीर की तकता है, वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है पापों के दलदल में फ़ंसकर धर्म सिसकता है, वर्तमान…  हिंसा के बादल छायें संसार पर, सर्वनाश के दुनिया

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Arhata Ke Shikher Shree Mahavir Hai

(धुन : दिल के अरमां…) अर्हता के शिखर श्री महावीर हैं, शिखर को देखे, बने वह वीर है ॥ धन्य त्रिशला पारगत मातेश्वरी । खुले नृप सिद्धार्थ के तकदीर है ॥ चरम तीर्थंकर परम-पावन प्रभु । शान्ति समता के समंदर क्षीर है ॥ जगत के सब प्राणियों के मित्र हैं। त्याग तप करुणामयी तसवीर हैं

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Mahavir Charno Me Karte Naman

(लय -बहुत प्यार करते है तुमको सनम) महावीर-चरणों में करते नमन  देते हो नाथ! तुमही  सबको शरण 1 अंधकार में सूरज बन भू पर आए।  तपती दुपहरी में बन घन मंडराये ।  त्रिशला की गोद में था हुआ अवतरण ।। राजमहल तजकर संजम अपनाया।  भोगो से त्याग का पथ श्रेष्ठ बतलाया ।।  किया परम संपदा

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Jay Jay Jagdishwar Mahavir

(लय- धर्म की लौ जलाए हम) जय जय जगदीश्वर महावीर -2 तीर्थकर बन गए तोड़ कर कर्मों की जंजीर  चंड सर्प को डंक लगाया प्रभु ने करुणा रस बरसाया,  हुई नकिञ्चित कमपित् काया, राग द्वैष की पड़ी न छाया   द्वेषकी समता और सहजता से बन गये शांत गम्भीर ② अनेकान्त मय अमृतवाणी अंकित उसकी अमिटकहानी 

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Veer Aayenge

( लय- राम आयेगे) मेरी झोपड़ी के भाग के भाग, आज खुल जायगे  वीर आयेगे-2 वीरआयेगें वीर आयेंगे -2 – वीरआयेगेंतो अंगना सजाऊंगी, माणक मोती सै प्रभुकों मै बधाऊंगी  मेरे जन्मो कसारे पाप मिट जायेंगे, वीर आयंगे-2 मेरी झोपड़ी— मेरे वीर को में पालना झूलाऊगी,  माता त्रिशला  की लोरीमै सुनाऊंगी  मेरे रोम-2 में प्रभु बस

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Vir Tera Nam Humko Jan Se Bhi Pyara Hai

(लय -एक तेरा नाम) वीर तेरा नाम-2 हमको जान से भी   प्यारा ।  तू है तो हर सहारा है वीरं तेरा नाम…. ① क्षत्रिय कुल का लाल-2 माता त्रिशला का दुलारा है  तू है तो हर सहारा है वीर तेरा नाम…. ② भव-भव में भटका हूँ कहीं चैन ना पाऊ मै तो हार गया। दुखियों

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