Paras Prabhu

Paras Prabhu

Pyara Hai Paras Prabhu Ka Nam

पारस प्रभु का नाम (लय : राजा की आयेगी बारात) प्यारा है पारस प्रभु नाम  सुमिर सुबह शाम किनारा मिल जायेगा पारस प्यारा तारणहारा पारस परम कृपाल जो मनसे ध्याये बन जाऐ पारस सरिस विशाल निर्धन हो चाहे धनवान सुमिर सुबह शामकिनारा मिल जायेगा अश्वसेन वामा का लाल काशी कुंवर कमाल दिनकर सी देदीप्यमान छवि […]

Paras Prabhu

Tuti Footi Naiya Tu Hi Khevaiya

(तर्ज: जादुगर सैंया छोड़ मोरी बैंया ) टूटी फूटी नैया. तूं ही खेवैया.  हे प्रभु पार्श्वनाथ. अब भव पार करो । बचपन में प्रभु अद्भुत ज्ञानी जलते नाग निकारे,  महामंत्र नवकार सुनाकर उनको जग से उबारे,  हम पर भी दया कर नाथ, अब भव पार करो ।। १ ॥ पर उपकारी जग हितकारी, अश्वसेनजी के

Paras Prabhu

Shree Parshv Nath Bhagwan

तर्ज:- (तेरे द्वार खड़ा भगवान) श्री पाश्वनाथ भगवान अरज सुन लेना मेरी,  मेरे पूरे करो अरमान कि निश दिन धरु तुम्हारा ध्यान । जीवन को राहों पे चल रहा, मैं राही अलबेला,  कभी सुखों का कभी दुःखों का, देख रहा हूँ मेला रे २. प्रभु तुम हो शक्तिवान, मुझे भी दे दो मुक्ति दान ॥

Paras Prabhu

Shree Parshv Prabhu Chintamani

तर्ज : (जरा सामने तो आओ छलिये ) श्री पार्श्व प्रभु चिन्तामणी, दीन बन्धु तँ ही दीना नाथ है. भव-भव के तो बन्धन काट दो, तेरे शरणे पड़े हम अनाथ हैं। जलते नाग नागिन को बचाया, नवकार मंत्र सुनाया, कमठ योगी का मान मिटाकर, सच्चा मार्ग दिखाया,  फिर हम पै क्यों इतने नाराज हैं, क्यों

Paras Prabhu

He Paras Chintamani

तर्ज:- (सारंगा तेरी याद में) है पारस चिन्तामणि, अर्ज करें तुम से प्रभु,  चिन्ता चूरण हार, भव से पार उतार । जीवन में दुःखड़े मिले, हमको बारम्बार,  आशाओं की वीण के, टूट चुके हैं तार, जो तुम रूठ गये प्रभु रूठ गया संसार ।। १ ॥ है पारस ।। आज तेरे दरबार में, दीन रहे

Paras Prabhu

Dwar Tere Darshan KO Aaye

तर्ज :- (बार बार तुझे क्या समझाये) द्वार तेरे दर्शन को आये दिल में ले अरमान  सद्बुद्धि दो, पार्श्वनाथ भगवान २ मतलब का संसार हार खाये यहाँ,  छोड़ तेरा दरबार कहो जायें कहाँ  एक नजर तो इधर निहारौ हम बालक अनजान ॥ १ ॥ पथरीले हैं टेढ़े मेढ़े रास्ते,  निकल पड़े हैं हम मंजिल के

Paras Prabhu

Shraddha Ke Suman

(तर्ज -चन्दन सा बदन) श्रद्धा के सुमन मेरे मन में लगन, शंखेश्वर प्रभु अन्तर्यामी. मैं वन्दू बारम्बार तुम्हें, तुम तीन भुवन के हो स्वामी ॥ वो शुभ दिन पोष बदी दशमी, हुआ जन्म जगत में जिनेश्वर का, गूंजा ये गगन जय के स्वर में,आवन सुनके परमेश्वर का. है धन्य धन्य वामा माता. सौंपा जग को

Paras Prabhu

Chintamani Parshv Jinanada

तर्ज:- (तुझे सूरज कहूँ या चन्दा) चिन्तामणी पार्श्व जिनन्दा, वामा माता के नन्दा, करो चिन्ता चूर हमारी, काटो भव-भव का फन्दा। हम तो दर्शन अभिलाषी, तेरे मन्दिर में आये,  हो जाये धन्य ये जीवन, जो शरण तुम्हारी पाये,  दर्शन कर नाथ तुम्हारा, मन पावे अति आनन्दा ।। १ ।। तुम तो करुणा के सागर, परमातम,

Paras Prabhu

Sunlo Sunlo Hamari Ardas Re

(तर्ज आजा तुझको पुकारे मेरे गीत रे) सुनलो, सुनलो हमारी अरदास रे,  प्रभु पार्श्व रै, ओ मेरे जिनवर, प्रभु पार्श्व रे । तुमनें तो प्रभुजी लाखों को तारे, कितने उबारे,  भक्तों की नैया लगादी किनारे. लगादी किनारे,  हम भी तेरे चरण पुजारी, पूरो हमारी आश रे ॥ १ ॥ चंचल चित्त ये तो उड़ उड़

Paras Prabhu

He Prabhu Parshv Nath

तर्ज:- (सात अजूबे इस दुनियाँ में) हे प्रभु पार्श्वनाथ सदा हम बोले जय जय तेरी,  भव सागर से पार करो, अब नाथ करो ना देरी.  जय जय हो जय जय हो जय जय हो ॥ कमठ योगी का तँ ने मान मिटाया था.  जलते नाग और नागिन को बचाया था,  तेरी महिमा अपरमपार प्रभु,  हम

Scroll to Top