Paras Prabhu

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Tu Hi Moksh Gami Prabhu Parshv Swami

तर्ज :- ( तू ही मेरा मन्दिर तुम्ही मेरी पूजा) तू ही मोक्षगामी प्रभु पार्श्व स्वामी,  तेरे चरण में मेरी वन्दना है। नहीं कोई साथी जहाँ में है मेरा,  जीवन है सूना छाया अन्धेरा,  हे दीन बन्धु, तूं ही ज्ञान सिन्धु,  करूँ तेरी भक्ति यही भावना है ।। १ ।। तू ही मोक्ष कहूँ किसको […]

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Hum To Aaye Hai Tere Sharne

तर्ज: (ले तो आये हो हमें) हम तो आये हैं तेरे, शरर्णे प्रभु पार्श्वजी २ हम सब की लाज प्रभु, तँ ही रखना, रखना SSSSS जलती लकड़ी से जोड़ा नाग का बचाया था,  तू ने ही मन्त्र नवकार भी सुनाया था.  कमठयोगी, अभिमानी का मान मिटा,  जगमग जगाई ज्योति ज्ञान प्रकाश की, हम तो आये

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Lino Sharan Tere Charanan Ki

तर्ज:– (मैं तुलसी तेरे आंगन की) लीनो शरण, तेरे चरणन् की  चिन्ता चूरो, चिन्ता चूरो, चिन्ता चूरो मेरे मन की ॥ लीनी शरण ॥ हे प्रभु पार्श्वनाथ कृपालु, मेरी भी सुध लेना दयालु, प्यासी अंखियाँ दर्शन की ॥ १ ॥ लीनी शरण ॥ क्रूर कषायों ने मुझे घेरा, इनमें उलझा जीवन मेरा, काटो बेड़ी भव

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He Shankheshawar Parshv Nataha

(तर्ज:– तू ने मुझे बुलाया शेरावालिए) हे शंखेश्वर पार्श्वनाथा, नाथा, तेरी जय जय कार, जय जय कार, जय जय कार, जय जय कार । शरणों लियो तुम्हारो प्रभु पार्श्वजी,  भव-सागर से तारो प्रभु पार्श्वजी, साँवलिया पाश्र्वजी, शंखेश्वरा पाश्र्वजी, नाकोड़ा पार्श्वजी । योगी कमठ को मान मिटायो,  जलते नाग को जोड़ो बचायो, पंच परमेष्ठी मंत्र सुनाकर,

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Parshv Jinanada Ananad Kanda

तर्ज :–(सागर किनारे ) पाश्च जिनन्दा, आनन्द कन्दा,  दो ज्ञान ऐसा जीवन, यूं हीं ना गंवाये, हो हो हो  पाश्च जिनन्दा । संसार सागर में, हम गोते खाते,  अज्ञानता वश, नहीं पार पाते,  करके दया अब तूं ही, राह दिखाये ।। १ ।। पाश्व जिनन्दा ।। सदा सत्य बोलें हम, झूठ को त्यागें,  पाप कर्म

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Chinta Churo He Chintamani

तर्ज :- (राग मालकोश) चिन्ता चूरो हे चिन्तामणी, पार्श्वनाथ भगवान्,  पाश्र्वनाथ भगवान् हमें दो सद्बुद्धि और ज्ञान। हम मूरख अज्ञानी, हमें कोई सच्ची राह दिखादो,  अष्ट कर्मों को क्षय, करने का सरल उपाय बता दो,  तू है पार ब्रह्म परमेश्वर, हम बालक नादान ।। १ ।। बड़ी मुसीबत के मारे, भव-भव के हम दुःखियारे,  महिमा

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Samru Samru Re Paras Dev Ne

समरूं समरूं रे पारस देव ने (लय : जन्मया-2 रे मीराबाई मेड़ते) समरूं समरूं रे पारस देव ने कांई समरयां संकट जाय, वामा सुत प्यारो रे  वासि वासि रे काशी देस रा कांई वाराणसी रो वास वामा सुत प्यारो रे कुल रो दिवलो रे, कंवर अश्वसेन रो कांई है त्रिभुवन रो ताज, वामा सुत प्यारो

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