Tapsya Geet

Bhachya, Bhikshu Swami, Tapsya Geet

Badliyo Aankhdlya Me Barsyo,

बादलियों आंखडल्यां में बरस्यो, आंखडल्या में बरस्यो गण बाड़ी खिल ज्यावैला, ओ संतां। मुरझ्‌योडो ओ मनड़ो हरस्यो, ओ मनड़ों हरस्यो, अनुशासन मिल ज्यावैला, ओ संता ॥ तपस्या री जोत ले-र देह न सुकाई है, नदियों री ताती रेत शीतल बणाई है। इन्द्रासन हिल ज्यावैला, ओ संतां ॥१॥ विनती रा बोल सुणो ऊभां हां म्हे सामने, […]

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Ghunghroo Chham Chhama Chham Chhan Nan ..Baje Re

घुंघरू छम छमा छम छण छण ण ण ण ण णण बाजैरे बाजे रे। तपस्या री अनुपम महिमा जन जन में राजै रे । स्थायी॥ निज रै तन स्यूं जंग जबर ओ, जीतै कोइक शूर।  तप तलवार बजै हाडां पर, कायर भागे दूर ॥1॥ तपसी रे तो खेल तपस्या, तन रो निकलै तेल।  वज्र जिसो

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Karlyo Karlyo Athaya Ab Maskhaman

(लय- तेजा) करल्यो-करल्यो अठायां अब मास खमण थे करल्यो हो। तप ही जीवन रो साचो सार हो । स्थायी ॥ मन रो मैल उतर तन हो ज्या, सागीड़ो नीरोग हो। साचो गंगाजल तप है आपणै ।। 1 ।। हाड मांस मिट्टी री काया, चमक देख क्यूं चकरावै। कांई भरोसो बोलो सांस रो ॥2॥ बड़ी तपस्या

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Manava Hilmil Tapsya Ro Tyohar

मनावां…. हिलमिल सारा आज म्हें तो,  तपस्या रो त्यौंहार। तपस्या रो त्यौंहार,  तप है जीवन रो आधार ॥ स्थायी ॥ तप रै मार्ग ऊपर चलणो, बहुत बड़ो है भारी,  इण पर चलणे स्यूं आवेला, थांरै जीवन में निखार । जीवन में निखार, तप है जीवन रो आधार ॥ 1 ॥ कांटा सो ओ जीवन थांरो,

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Tapsya RI Mahima Bhari

(लय- खिण – खिण ए बीत्या) तपस्या री महिमा भारी, तपस्या है मंगलकारी,  तपस्या जीवन रो सिणगार है।  हो भाया! तपस्या स्यूं होवे नैया पार है ॥ स्थायी ।। तप है गंगा तप है जमना, तप है तीरथ धाम जी , तप रा जठे नगारा बाजे, सरे अचिंत्या काम जी, आत्मिक शांति रो पथ है,

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Tap Sukhkari,Mangalkari

(लय-पीलो) तप सुखकारी, मंगलकारी, हो तप री महिमा अति भारी, भव-भय हारी जी, तपस्या है तरणी ॥ स्थायी ॥ तन मन रा सब रोग मिटावै, ही आत्मा ने ऊजळी बणावे, शिखर चढ़ावे जी-तपस्या है तरणी ॥१॥  वीर पुरुष ही तप अपणावै, ही कष्टां, स्यूं नहीं घबरावै, शौर्य दिखावे जी-तपस्या है तरणी ॥2॥ कायर री तो

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Tap Me Tej Gajab Ko Bhai

तप में तेज गजब रो भाई! आशा आंबो फल ज्यावै। संच्योड़े करमां रो कचरो, एक पलक में जळ ज्यावै ॥ स्थायी ॥ वै जनम जनम रा बंध्योड़ा, बंधन घालै भारी फोड़ा। अटकावै आगै बढ़ती, आत्मा रै मारग में रोड़ा। दौड़ा-दौड़ मचावै तो भी, कोई नजर न हल आवै ॥1॥ आळस में उलझ्योड़ो मनड़ो, गोते पर

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Tap Ri Shakti Mahan,

सब धर्मों में बतलाई रे, तप री शक्ति महान। देवों ने गरिमा गाई रे, तप री शक्ति महान ॥स्थायी।। तपस्या है मंगलारी, तपस्या है भवभय हारी। तपस्या केशर री क्यारी रे ॥ 1 ॥ तप से टूटे अघबंधन, आत्मा बन जाती कुंदन। मिट जाती उलझन सारी रे ।। 2 ।। करता जो भाव तपस्या, उसकी

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Sab Dharmo Me Batlayi Hai Tap Ki Shakti Mahan

सब धर्मों में बतलाई रे, तप री शक्ति महान। देवों ने गरिमा गाई रे, तप री शक्ति महान ॥स्थायी।। तपस्या है मंगलारी, तपस्या है भवभय हारी। तपस्या केशर री क्यारी रे ॥ 1 ॥ तप से टूटे अघबंधन, आत्मा बन जाती कुंदन। मिट जाती उलझन सारी रे ।। 2 ।। करता जो भाव तपस्या, उसकी

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Tap Ki Baje Shahanayi

तप की बाजे शहनाई (लय- हम होंगे कामयाब) तप का करते सब सम्मान  है तप जिन शासन की शान, तप है जीवन का वरदान,  मान लो हो हो, मन में है उल्लास, तप में है विश्वास, जीवन का आश्वास अर्हम्-३ १. तप को हम करते वन्दन । कटते कर्मों के काया बनती है कुन्दन, बन्धन

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