Tapsya Shravak Jivan Ka Abhinav Shringaar Hai
(तर्ज : प्रभु पार्श्व देव चरणों में) तपस्या श्रावक जीवन का अभिनव श्रृंगार है। तपस्या से होती नैया भव सागर पार है ॥ १. तप करने वाले होते सौभाग्यशाली हैं। कर्मों के वृन्द टूटते, होता उद्धार है ॥ २. यह तन अनाज का पुतला खाऊं खाऊं करता। जिसने ही मन को साधा, जीवन का सार […]