Tapsya Geet

Bhachya, Tapsya Geet

Tapsya Shravak Jivan Ka Abhinav Shringaar Hai

(तर्ज : प्रभु पार्श्व देव चरणों में) तपस्या श्रावक जीवन का अभिनव श्रृंगार है। तपस्या से होती नैया भव सागर पार है ॥ १. तप करने वाले होते सौभाग्यशाली हैं। कर्मों के वृन्द टूटते, होता उद्धार है ॥ २. यह तन अनाज का पुतला खाऊं खाऊं करता। जिसने ही मन को साधा, जीवन का सार […]

Bhachya, Tapsya Geet

Tapsya Ki Mahima Aparmpar L

(लय-आपण भागां री) तपस्या री महिमा देखो अपरंपार  करम निरजरा साथ में हुवै, आधि-व्याधि उपचार। लौ लागे अध्यात्म मेरी झट, सिद्धि हुवै साकार। तपस्या री महिमा……॥ स्थायी ॥ बाजीगर ज्यूं मिनख नै अँ, करम नचावै नाच, एकमेक सा हो रया से, पत्थर-हीरा-काच। तपस्या री महिमा…….||1|| मन मुट्ठी में जो करै, बो ही मानव मतिमान, च्यार

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Re Jhule Me Jhula Aanand Aave Re

तप रै झूलै में तप रे झूलै में झूल्या आनन्द आव है,आनन्द आव है कि  झूल्या आनन्द आव  है, आनन्द आव है क मन म्हारो मोद मनाव है।तप रे झूले में झूल्या — १. ऋषभ, अजित, संभव ,अभिनन्दन, सुमति ,प‌द्म सुखकारी  श्री सुपार्श्व ,चंदा प्रभु ,सुविधी, शीतल प्रभु भयहारी,  श्री श्रेयांस ,वासु पूज्य जिन न

Adinath, Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Avasar Aaya Hai, Akshay Tritiya

अवसर आया है अवसर आया है अवसर आया है अक्षय तृतीया आज मनाएं तप की महिमा खूब बढ़ाएं प्रभु चरणों में भेंट चढ़ाएं १. मरुदेवा पाता के नन्दन। नाभिराज के तुम कुल चन्दन। श्रद्धा से हम करते वन्दन ॥ २. कर्म भूमि के प्रथम प्रणेता। प्रथम महीपति, युग के नेता। वने प्रथम मुनि आत्म विजेता

Tapsya Geet, Varshitap

Akshay Tritiya Ka Su Pawan Parv Aagaya

अक्षय तृतीया का सुपावन पर्व आ गया ।  दे रहा-२, संदेश तप का हर्ष छा गया ॥ १. प्रथम तीर्थकर ऋषभ भगवान मुनि बन कर।  आहार पानी के लिए वे घूमते घर-घर।  अन्त में-२, श्रेयांस सारा राज पा गया ॥ २. मात्र भिक्षा ग्रहण करना चाहते बाबा।  लोग देते जो, नहीं वो चाहते बाबा । 

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Ki Jyoti Me Tapkar Atma Banti Hai Kundan,

तप की ज्योति में तपकर (लय: कल्पतरू रा बीज फल्या) रचयिता : साध्वी निर्वाणश्रीजी तप की ज्योति में तपकर, आत्मा बनती है कुन्दन। तप की महिमा है भारी, तप से टूटे अघ बंधन ।। है धर्म निर्जरा संवर, मिलती मंजिल मनचाही,  टूटे बेड़ी कर्मों की, मिट जाए भव की त्राही।  लक्षित मग में गतिमय हो,

Bhachya, Tapsya Geet

Cocakola Tamatar Aalu Chhola

कोका कोला टमाटर आलू छोला, इन सब का त्याग है देखो तपसण के आज उपवास है। वो मारासा आएं, वो पचखाण कराएं, वो मांगलिक सुनाए, इन सब का का ठाठहै हे, देखो तपसण के आज उपवास है वो सुसरासा आए, वो सासुजी आए वो चौबीसी सुनाएं, इन सब का ठाठहै देखो 3 बो जेठसा आए,

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Aaya Shubh Avsar Ye Aao Kare Bahuman

(लय-मुझसे जुदा होकर) आया शुभ अवसर ये, आओ करे बहुमान ।  अभिनंदन वर्षीतप का, गाएं मिलकर गुणगान। । वंदना, तप को मेरी वंदना साधना तप है कठिन साधना 1. वर्षीतप का तप है, तपस्या का रंग चढ़े,  भाभी वर्षीतप कर, दो कुल पर कलश चढ़े  तू धार सके तो धार, तप है जीवन का सार

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Ki Mahima Ajab Nirali

(तर्ज – माईन माई मुंडेर पे…) तप की महिमा अजब निराली, तप जीवन उजियारा  तप गंगा में नहायेगा जो, पाये भव से किनारा  तप गुण गाये हम ॥   १. तप वीरों का आभुषण, तप मुक्ति का महापथ है  मोक्ष नगर ले जाने वाला, तप ही सच्चा रथ है।  तप नौका से मंजिल पायें, तप ही

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Rang Birange Tap Sumano Se , Varshitap

(लय-यह भारत देश है) रंग बिरंगी तप सुमनों से, सुरभित दशों दिशाएं। लो मंगल गीत सुनाएं।। 1. हर फूल खिला, हर कली खिली, वरसा वर्षीतप सावन, जुही चंपा और चमेली, बना गुलाब यह शतदल। भीनी भीनी सौरभ से, गाती है गीत हवाएं। 2. नन्दनवन के इस उपवन में, बहते तप के झरने, तप गंगा में

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