Jain Bhajan

Shudh Man Navkar Japlo

(लय – भाव भीनी वंदना) शुद्ध मन नवकार जप लो, है सदा कल्याणकारी ।  डूबती मझधार नैया, पार कितनों की उतारी।।. ① एक आस्था हो ह्रदय में, एक स्वर हो एक लय में। पंच परमेष्ठी का स्मरण कर, जिन्द‌गी जिसने निखारी॥ ② मंत्रबल से नाग काला, काला,  बन गई थी फूलमाला। नाचती थी मौत लेकिन, […]

Jain Bhajan

Sans Sans Me Rahe Ninadit Mahamantra Navkar

(बार-2 तोहे क्या समझाऊं) सांस सांस में रहे निनादित महामंत्र नवकार  ले-ले सहारा हो जाए बेड़ा पार ।। महामंत्र नवकार हृदय का अमृत है।  एक-2 अक्षर ऊर्जा से संमप्रक्त है।  जपे जाप तो खपे पाप यह लोकोत्तर उपहार । पूज्य स्मरण से पजो करता, दिनकी शुरुआत  उदिता मुदिता शुचिता की होती बरसात !!  मन प्राणों

Jain Bhajan

Likh Dyo Mhare Rom Rom Me

*(लय- चांद चढ़‌यो गिगनार ) लिख दयो म्हारे रोम-रोम में लिख द‌यो म्हारे रोम रोम में अरिहंता रो नाम प्रभु-2  लिख दयो म्हारे रोम रोम में शीश पर म्हार रिषभ नाथ जी ,माथे अजित प्रभु रो नाम काना म्हारे संभव लिख दयो, आंख्यामें अभिनन्दन नाम-2 नाक पर प्रभु सुमति लिखदयो, होटा पदम प्रभुरो नाम -2

Guru

Mahamanasvi Mahayashsvi

(लय- प्रभो तुम्हारे पावन पथ पर)  महा मनस्वी महायशस्वी तेजस्वी गण वन‌माली -2 महा तपस्वी महाश्रमण से संघ बना है गौरवशाली  श्रुत की पावन गंगा बहती विविध रूप धर प्रवचन मे-2 गहरीआस्था जिनवांग्मय में और भिक्षु के चिन्तन में  आ अनुभव के उज़ले दिवलो से -2 हर मौसम में है दीवाली 2 गायन का अंदाज़

Guru

Jay MahaTapasvi Mahashraman

(लय – स्वामीजी थारी साधना री मेरू सीऊंचाई) जय महातपस्वी महाश्रमण जय वीतराग अवतारी -2 वीतराग अवतारी-2 जय-2 प्रभुता धारी  जय महातपस्वी महाश्रमण जय वीतराग अवतारी -2 ओ मेरे भगवान तुम्हारा धाम हृदय ये मेरा -2  देखो ध्यान लगा कर निशदिन ध्यान धरू में तेरा-2  तू ही मेरा आधार है, प्राणों का पालन हार है-2 

Guru

Mahashraman Chalisa &Aarti

श्री महाश्रमण चालीसा रचनाकार-मुनि श्री कमल कुमार जी ।। दोहा ।। महिमा गुरू महाश्रमण की, फैल रही चहुं ओर। भूतल में उतरी नई, स्वर्ण सुहानी भोर ।।।।। महाप्रज्ञ वर से मिला, तेरापथ का ताज। महाश्रमण जुग जुग तपो, अंतर की आवाज ।।2।। चालीसा का पाठ नित, करें सुबह या शाम। नियमित दिनचर्या बने, मन पर

Shiv Bhajan

Mere Bhagwan Karo Vishram

Bhajan मेरे भगवन करो विश्राम भगवन करो विश्राम के सत्संग पूरा हुआ रणथंभोर को गणपति चले हैं रिद्धि सिद्धि के साथ के सत्संग पूरा हुआ ब्रह्म लोक को ब्रह्माजी चले हैं माता ब्रह्माणी के साथ के सत्संग पूरा हुआ कैलाश पर्वत को भोले चले हैं गौरा मैया के साथ के सत्संगपूरा हुआ बैकुंठ लोक को

Jain Bhajan, Santhara

Lagi Lagi Nav Kinare Ab Lagi Ho

लागी लागी नाव किनारे तर्ज : तेजा रे…. लागी लागी नाव किनारे अब लागी हो। जनम सुधार्यो थे तो सांतरो। । ध्रुव ।। कुण बेटो कुण बाप जगत में, सारी सुपने री माया। ममता मत करज्यो नश्वर देह री।।१ ।। बड़ो कठिन है मन नै दमणो, खमणो और खमाणो हो। गांठां मत रखज्यो मन में

Krishna Ji, Shyam

Milta Hai Sachcha Sukh Kewal

प्रार्थना मिलता है सच्चा सुख केवल भगवान तुम्हारे चरणों में। यह विनती है पल पल छिन्न छिन्न, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में। चाहे काँटो पे मुझे चलना हो, चाहे अग्नि में मुझे जलना हो।  चाहे छोड़ के देश निकलना हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में।। मिलता है. चाहे बैरी कुल संसार बने, चाहे जीवन मुझ

Bana Bani, Vivah

Mhe Aawala Lekar Barat

विवाह गीत,  म्हे आवाला, म्हे तो आवाला लेकर बारात सगोजी थारे आंगणिये-2,  सगीजी थारे  आंगणिये -2,  सगा सम्बन्धी बनड़े रा साथी, सज धज आवेला सारा बाराती बाजे नौवत बाजे शहनाई नाचा गावा बांटा। बधाई – 2 म्हेतो पावाला आदर सत्कार –2 सगोजी थारै  आंगणिये आंगणिये  ओजी मामाजी आसी, मासीजी आसी भुवासा । आसी जीजाजी आसी

Scroll to Top