Biro Mharo Aayo Bhawaj
(लय-म्हारा हथेल्या के बीच छाला) बीरो म्हारो आयो, भावज बांटा जोव – २ मायड़ स्यूं ओ, मायड़ स्यूं मिलण की मन में आवा म्हारा मारुजी रुंकड़ीयो बताद्यो म्हार पीर को, मारगियो बताद्यो म्हार पीरको गोडा आई बाजरी चिड़ीयां चुग चुग जाव – २ तील्ली रो ओ तील्ली रो नीनाण करणों पड़सी म्हारी गोरी ए पीवरीये […]