Author name: Sunita Dugar

Batisi, Bhat, Mamera, Mayra

Biro Mharo Aayo Bhawaj

(लय-म्हारा हथेल्या के बीच छाला) बीरो म्हारो आयो, भावज बांटा जोव – २ मायड़ स्यूं ओ, मायड़ स्यूं मिलण की मन में आवा म्हारा मारुजी रुंकड़ीयो बताद्यो म्हार पीर को, मारगियो बताद्यो म्हार पीरको गोडा आई बाजरी चिड़ीयां चुग चुग जाव – २ तील्ली रो ओ तील्ली रो नीनाण करणों पड़सी म्हारी गोरी ए पीवरीये […]

Batisi, Bhat, Mamera, Mayra

Kathe Su Aayi Sunth

कठे स्यूं आई सूंठ कठ स्यूं आयो जीरो  कठ स्यूं आयो ए म्हारो मां को जायो बीरो  दिल्ली स्यूं आई सूंठ, जैपुर स्यूं आयो जीरो  बम्बइ स्यूं आयो ए म्हारो मां को जायो बीरो ।  आ क्या में चइय सूंठ ओर क्या मं चइय जीरो  ओर क्याम चहीय ए थारो मां को जायो बीरो  आ

Batisi, Bhat, Mamera, Mayrageet

Leke Kumkum Chawal Hath

(तर्ज – लेके पहला पहला प्यार …) लेके कुकुं चावल हाथ, बहना उभी जोवे बाट बीरा आवोजी आवो म्हारे आंगणीये शीश बीराजी टीका लाना, टीके में बिरा मेरे हीरा जड़ाना झुमके लटकन लाना साथ, मेरे कानों का श्रृंगार । बीरा ओवोजी कंठ बीराजी दूलड़ी लाना, दूलड़ी में बीरा मेरे मोती पीरोना संग में लाना चन्द्रहार,

Batisi, Bhat, Mamera, Mayra Geet

Bhat Bharan Aayo Re Jaman Jayo

७. भात भरण आयो म्हारो रे जामण जायो, तारां जड़ी ल्यायो चुनड़ी फुल्यो न समायो म्हारो मनड़ो उमायो, बाई हीरां बीच लाल जड़ी – २ नौलख हीरा चुनड़ी जडावै, दसलख मोतीड़ा चमकै – २ सवा लाखको ओढरे गोरवरु घुंघट पर चन्दा चमकै – २ हियो हरषावै उर आनन्द समावै, जद बीरो जी ओढावै चूनड़ी, फूल्यो

Batisi, Mamera, Mayra Bhat

Kunku Bhariyo Chopdo

(लय- उमराव) कुंकु भरीयो चौपड़ो मोत्यां भरीयो थाल ।  बिरोजी बेगा भात भरणन आवो म्हारा राज ॥ बिरोजी बेगा आइज्यो, भावज ल्याज्यो साथ  बिरो जी प्यारा भाई भतीजा न ल्यावो म्हारा राज  थे बिरा उमराव घणां, सगला में सीरदार  बिरोजी म्हारो मान बढ़ावण आज्यो म्हारा राज  चम चम चमके चून्दड़ी, चमके बाइजी रो बीर  बिरो

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Mayro Bai Ro Bharba

(तर्ज : सारी सारी रात तेरी याद……) मायरो बाई रो भरवा विरो म्हारो आयो रे ।  बिरो म्हारो आयो साग भोजाई न ल्यायो रे ॥  बीरो भनावण जाऊ आरती रो थाल सजाऊं  मधुर मधुर गीत गाऊ,  मीठो मीठो शर्बत पाऊ  जामण जायो बीरो म्हारो, अति हर्षायो ॥ बीरो .. . हाथांरी रेखा म्हारी, मेहन्दी स्यूं

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Bandh Kesriya Pag Bhai

(तर्ज – फूल तूम्हे भेजा है…) बांध केशरीया पाग, भाई थांरा भात भरणन आया है, भाइ भतीजा, बहन भाणजा, भावज साग ल्याया है ॥ हशी खुशी गाजे बाजे स्यूं, मायरो ले आया है,  मारी जायी बेनड़ चूनड़, थारे खातिर ल्याया है,  कठे छीपी म्हारी मांरी जाई, अब क्यू तू तरसावै है ॥  करे आरती री

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Bada Beera

बडोड़ो बिरो बीरा झिरमीर, जामण जाया झीरमीर बरसलो मेह ओ बीरा नानी सी बून्द सवावणी जी । बीरा न्यूतो, जामण जाया न्यूतो नाइक र हाथ ओ बीरा थान तो नूतण धण गई जी । बाई न्यूतो, जामण जाई न्यूतो म्हासु झेल्यो ए न जाय ओ बाई सांपत बोली बिराजी र धन घणो जी सापतड़ी –

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Batisi Bhat Ke Geet

बतीसी1 बीरा झिरमीर जामण जाया झिरमीर बरसलो मेह ओ बीरा नानी सी बुन्द सवावणी जी बीरा न्यूतो जामण जाया न्यूतो नाइकर हाथ ओ बीरा वान तो न्यूतण धण गई जी थान न्यूतो, थान न्यूतो (नाम )सा रा जोध ओ (नाम)जी पधारो म्हार मायर जी। थान न्यूतो थे इस तरह पुरा परिवार का नाम लेणा) ***

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Rishtedaro Par Geet (Susroji, Jeth, Devar, Jethuta, Nanda, Nandoi)

संक्रान्ती म नेग का गीत( सुसरोजी) जीमो सुसराजी सीरो पुड़ी साग ऊपर घेवर छांटवां जी । सुसराजी चिणाव कमरा चार सासुजी ऊबा बरज छ जी । ईता राजिन्द दलाल मती होय दलाल हृया ना सर जी । घर अपण कंवरा रो ब्याव बाई न देणो दायजो जी । इती गोरी कंजूस ना होय कंजूसी कर्या

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