Bhachya

Bhachya, Tapsya

May Mati Chikni Ji , (Bhachya, Tapsya Geet)

माया माटी चीकणी मांय माटी चिकणीजी, फागण कलश बंधायक चित्त चितारियाजी।  गाई जै।     ऋषभनाथ     गाई जैजी माता, मोरां देजी रा नन्दक कलश बंधाईया जी  कलशां के सोने का, डांडे के रूपैरा पड़गना जी।  इसड़ा सा कुंभ कलश म्हारी तपस्या में चाहिजे जी  इसड़ा सा रतन कलश म्हारी अठायां में चाहिजे जी ||१|| मांय […]

Bhachya, Jain Bhajan

Neminath Ki Jan

नेमीनाथ जी की जान नेमजी की जान बणी भारी, देखण को आये नर नारी असंख्या घोड़ा और हाथी, मनुष्य की गिनती नहीं आती। ऊंठ पर ध्वजा जो फहराती, धमक से धरती धर्राती समुद्रविजय जी का लाडला, नेम उन्हों का नाम।  राजुलदे को आये परणवा, अग्रसेन घर ठाम।  प्रसन्न भई नगरी सब सारी ।।१ ।। नेमजी…..

Bhachya, Tapsya

Sashan Mata, (bhachya)

शासन-माता (झिर-मिर) झिरमिर-झिरमिर मेवज बरसे ओ, परनाल्यां पाणी पडैजी।  उत्तर-दिखण स्यूं ओ मुनिसर आया ओ, आय उतरिया हरियै बड़ तलै जी।।  बुजत बुजत नगर डंडोल्यो ओ, शासन देवत माता रो घर किस्यो जी। ऊची सी मेड़ी ओ अजब झरोखा ओ, केल झबरको माता रे बारणै जी।।  अब म्हारा सासुजी ओ साधां रे पधार्या ओ, मुनिसर

Adinath, Akshay Tritiya, Bhachya

Aaya Adishwar Bhagwan

अक्षय तृतीया (चमकै अंगणियो) आया आदीश्वर भगवान, चमकै आंगणियो जी, आंगणियो । बरसी तपरो आज, करसी पारणियो जी, पारणियो ।। १. मरुदेवी रा लाल, नाभिनन्दन है जी, नन्दन है।  तारक दीन दयाल, सौ सौ वन्दन है जी वन्दन है ।। २ राज-रिद्धि ने त्याग, संयम स्वीकार्यो जी, स्वीकार्यो। कितो बड़ो वैराग, मौनी-व्रत धार्यो जी, व्रत

Bhachya, Tapsya

Dhanya Gaj Sukumal Muni Dhyan Dhare

धन्य गजसुकुमाल   (लय: सरवर पाणीड़ै ने जाऊं)।   रचयिता : आचार्यश्री तुलसी  धन्य गजसुकुमाल मुनि ध्यान धरै,  ऊभा अटल श्मशान गुण-ज्ञान भरै।  ज्ञान भरै अघ शान हरै ।। १. जिण ही दिन दीक्षा लीन्ही जिनवर नेमी पास,  उण ही दिन कीन्हों दारुण-साधना-अभ्यास ।  पडिमा बारवीं भिखू की अंगीकार करें ।। २. जीवित ही कीन्हो अपण अंग

Bhachya, Tapsya

Nabhi Raja Mora Devi Rani

चौवीसी नाभिराजा मरुदेवी रानी जिन ,माता  जाया  पहला ऋषभ नाथ स्वामी ।  जितशत्रु राजा विजयादेवी राणी ,जिन माता  जाया अजित नाथ स्वामी । जितारथ राज सेनादेवी रानी जिण माता जाया तीजा संभवनाथ स्वामी । संवर राजा सिद्धार्थ रानी जिण माता जाया चौथा अभिनन्दन स्वामी । मेघरथ राजा मंगलादेवी रानी ,जिण माता जै पांचवा सुमतिनाथ स्वामी

Bhachya, Tapsya

Moti (Nemisar Gignnara Ra Vasi

मोती नेमीश्वर गीगनारा रा वासी तो, मोती दयो महाराणी जी।  कोरी कोरी कुल्हड़ी में दही रे जमादयूं तो,  गोडे बैठ जीमादयूजी’ ।  कांई रे करूं थारै कुल्हड़ी रो दही तो, गोडे परतन वैठाजी ।  बागो तो केसरीया सियां दयूं तो, टोपी लाल गुलाबीजी।  काई रे करूं थांरो केसरीया बागो तो, टोपी परतन ओढाजी ।  हाथ

Bhachya, Tapsya

Sone Ro Suraj Ugiyo( Bhanchya,badhao)

सोने रो सूरज उगियों सोने से सूरज उगियों, म्हारो खिल रह्यो भाग सोभाग रे, बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे । ॥ ध्रुव ।। झुमरमल सा रा लाडला, माता नेमा जी रा अंगजात रे, बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे ।।  कविकुल कमल दिवा करो, ए तो जिण न शासन रा नाथ रे,

Bhachya

Mahavir Ji Ki Palkadi Ratna Jadi

महावीर जी की पालकड़ी  महावीरजी री पालकड़ी, रतनां जड़ी हांओ जिणजी पहला ऋषभनाथ वांदस्यां, हांओ जिणजी दूजा अजितनाथदेव ।। महाहांओ जिणजी अगणा संभवनाथ वांदस्यां, हांओ जिणजी चौथा अभिनंदना देव ।। महावीर…हांओ जिणजी पांचवां सुमतिनाथ वांदस्यां, हांओ जिणजी छठा पदम् प्रभु देवा ।। हांओ जिणजी सातवां सुपार्श्वनाथ वांदस्यां, हांओ जिणजी आठवां चंद्र प्रभुदेव ।। महावीर हांओ

Bhachya, Tapsya

Jambu Kahyo Man Le

जम्बूकुमार की सज्झाय जम्बू ! कह्यो मान लै जाया, मत ले संजम भार ।  राजगृही नं वासिया जी, जम्बू नाम कुंवार ।  ऋषभदत्त रा डीकरा जी, भद्रा ज्यांरी माय ।।  जम्बू कह्यो…  सुधर्मा स्वामी पधारिया जी, राजगृही रे मांय ।  कोणक बांदण चालियो जी, जम्बू बांदण जाय ।। भगवन्त वाणी बागरी जी, बरसै इमरत धार

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