Bhachya

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Nemisar Gignarya Ra Vasi(Moti)

मोती नेमिनाथ गिगनारां रा वासी तो, मोती दयो महाराणी जी….२। कोरी कोरी कुल्हाड़ी में दही रे जमायो तो, गोडे बैठ जीमायो जी….२। कोई रे करूं धारै कुल्हड़ी रो दही तो, गोडे पर तो न बैठां जी….२। बागो तो केसरिया सियांयो तो, टोपी लाल गुलाबी जी….२। कोई रे करूं थारो केसरिया बागो तो, टोपी भी नहीं […]

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Jhalar ,palkadi

झालर झालर रो झणको, कांसी रो ठणको म्हैं सुण्यो, आ तो शहर सतरंजै रै मांय, के झालर बाजै जी। सतरंजै में आदिनाथ जनमिया, जै तो माता मोरां देवी रा नन्दजी, झालर बाजै जी। झालर रो झणको, कांसी रो ठणको म्हें सुण्यो, आ तो शहर गिरनारां रै मांय, के झालर बाजे जी। गिरनारां में नेमीनाथ जनमिया,

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Pipaladi, Mehandi

पींपळड़ी १. इण रे पीपकड़ी रा नव दस डाळा, आदिनाथ बैठया स्वामी पोल चिणावो, उठो माता मोरादे थारो सफळ निवारों, आंगण दयो भी केसर रो जी छांटो, रिमझिम कैसर री लहरांजी आवै, जठे स्वामी आदिनाथ आद हलावे। इन रे पीपलड़ी रा नव दस डाला, नेमीनाथ बैठया स्वामी पोळ चिणायो, उठो माता शिवादे थांरी सफळ निवारो,

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Uncha Uncha A Sakhi Strange Ra Maliya

माळिया ऊंचा-ऊंचा ए सखी सतरंजै रा मालिया, सतरंजे में आदिनाथ बिराजै ए सखी, गुरु वांदण नै चालां। चालां तो चंवर डुलै, बोलां तो पदम अड़े, पैरां तो सोनै री बेल, जीमां तो चावळ-दाळ, चाबां तो नागर-पान, चालो ए सखी, गुरु वांदण नै चालां ।। १।। ऊंचा-ऊंचा ए सखी गिरनारां रा माळिया, गिरनारा में नेमिनाथ बिराजै

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Uncha Uncha Lota

ऊंचा-ऊंचा ओटा, गिरनार वाळा कोठा ऊंचा-ऊंचा ओटा, गिरनार वाळा कोटा, राय दुलेचै सिंघ रो वैसणो जी। सिंहासन बैठ्या माता मोरदि जी बोल्या, ज्यां कूख आदिनाथ जनमिया जी, आदिनाच जनम्या भलो दिन पायो, रूड़ो दिन पायो, ज्यां स्वामी आद हिलाइया जी। घड़ी रे घड़ी में घड़ियावळ बाजै, पहर-पहर देवै आरतो जी। ऊंचा-ऊंचा ओटा, गिरनार वाळा कोटा,

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Jhirmir Jhirmir Mevaj Barase

भाचा झिरमिर झिरमिर-झिरमिर मेवज बरसे ओ, परनाळ्यां पाणी पड़े जी। १. उत्तर-दिखण स्यूं दोय मुनीसर आया ओ, आय उत रिया हरिये बड़ तलेजी । बूझत-बूझत नगर ढंढोर्यो ओ शासन देवत माता रो घर किस्यो । २. ऊंची सी मेडी ओ अजब झरोखो ओ. केळ झबरको माता रे बारण जी।  अब म्हारा सासूजी साधां रै पधारया

Bhachya, Tapasya Geet

Tap Ki Mahima Anupam Jag Me

तप की महिमा अनुपम जग में  (तर्ज – दिल लुंटने वाले जादूगर…. ) रचयिता : साध्वी अणिमाश्री तप की महिमा अनुपम जग में, सब तप का गौरव गाते हैं। तप की नौका में बैठ सभी, इस भव-जल को तर जाते हैं। है तेज भरा तप में अद्भुत, तप जीवन को चमकाता है । कर्मों का

Bhachya, Tapasya Geet

Tap Ro That Lagao

तप रो ठाट लगाओ सावण में (तर्ज – बादलियो आंखड़ल्या में.) रचयिता : साध्वी अणिमाश्री तपस्या रो मौसम आयो, हां मौसम आयो । रंग नयो ओ ल्यायो है, जन-जन में । तपस्या करणी है अब तो कमरां कसल्यो, कमरां कसल्यो । जोश घणो उमड़ायो है जन-जन में ।। जनम जनम रा पातक सारा, तपस्या स्यूं

Bhachya, Tapasya Geet

Tap Ri Ganga Me Jo Nhave

तप री गंगा में (तर्ज – धरती धोरां री….) रचयिता : मुनिश्री दिनेश कुमार तप री गंगा में – ३ तप री गंगा में जो न्हावे, कचरो करमां रो बह ज्यावे, आत्मा उज्जवलतम बण ज्यावे, तप री गंगा में……. १. तपस्या जीवन ने चमकावे, तप स्यूं भूत-प्रेत भग जावे, तपसी तप री अलख जगावे, तप

Bhachya, Tapsya Geet

Aasro Shasan Devi Tharo

आसरो शासन देवी थारो ( तर्ज : कोई जब राह न पाये….) आसरो शासन देवी थारो, थे कष्ट निवारो, पधारो म्हारै आंगणियै पधारो, अठाई की करै तपस्या ।। घर-घर में सज्यो है दरबार, तपसी नै साता री दातार, थाने जो ध्यावै करो थे बेड़ा पार-२, म्हानै थे दीज्यो जी बल थारो ।। २. बाई थे

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