Bhikshu Swami

Bhikshu Swami

Om Bhikshu Om Bhikshu Swam

-: ऊँ भिक्षु ऊं भिक्षु :- (लय : छोटी-छोटी गैया..) ॐ भिक्षु ऊँ भिक्षु ऊँ भिक्षु स्वाम।  श्रद्धा से हम करें प्रणाम – २  विघ्न हरण मंगलमय नाम ॥आं ॥ बल्लशाह दीपां के लाल,  पाकर प्रभु को हुये निहाल – २  कंटालिय सुखकारी ग्राम ॥१ ॥ श्रद्धा से हम……. अंधेरी ओरी का प्रवास,  यक्ष-राज को […]

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Mitho Savriya Ro Nam

-: मीठो सांवरिये रो नाम :- (लय : स्वामी भीखणजी रो नाम) मीठो सांवरिये रो नाम, जाणै मिसरी री डली,  सुमरो सुबह और शाम, होसी रंगरली।  चिन्तामणी है, नाम प्रभु रो,  च्यारूं कुंटां फैली सांवरियै री कीरत उजली ॥ १. पूनम नै प्रगटी पुन्याई,  जिन-शासन में आई तरुणाई।  धर्म क्रांति री आ उजली ज्योत एक

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Bhikshu Ko Bhulaye Kaise Bhikshu Nam Pyara Hai

(लय- : जनम स्यू कुंवारों……….) भिक्ष को भूलाएं कैसे ? भिक्षु नाम प्यारा है।  रात की अन्धेरी में वह, दीप सा उजारा है ॥ सत्य को पुकारा जिसने, ज्योती को बुलाया। चेतना का चिन्मय दीपक, जिसने जलाया।  आरती उतारै सौ सौ, वंदन हमारा है ॥ प्रण के लिए जो मरता, वही तो महान है।  खुद

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Babe Ne Manava Gava Geet Gan Ra

-: बाबै नै मनावां :- लय : मेघो छोटो सो ………….. बाबै नै मनावां गावां गीत गण रा,  भिक्षु नै बुलावां गावां गीत प्रण रा,  आओ आरती, आओ आरती उतारां आपां आज,  जय जय जय भिक्षु ॥ १. सिरियारी रो संत म्हारै हिवड़े बसै,  देवै मीठी मीठी धीमी सी आवाज। जय जय जय भिक्षु ॥

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Aao Aao O Bhikshu Aarti Utara

भिक्षू आरती लय : खम्मा खम्मा औ धण्या आओ आओ ओ भिक्षु आरती उतारां  थाने म्है सुमरां सारा, राम नाम ज्यूं धनश्याम नाम ज्यूं, आओ आरती उतारा एक लक्ष्य एक ध्यान, सीख्यो नही रुकणो  वीर वो ही जो न जाणे, विपदा में झुकणो हो..  शंकर ज्यूँ विष भी, पीयो आराम स्यूं…१ साधना के क्षेत्र में

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Ek Bar Aao

एक बार आओ सांवरिया स्वामीजी लय : एक बार आओ म्हारा एक बार आओ म्हारा, सांवरिया स्वामीजी थाने भगत बुलावे दिन रात, आओ म्हारा स्वामी जी । दीपा बाई रो नंदन प्यारो, बल्लुसा रा लाल तेरापंथ संघ रा हो, पहला गणपाल  थारी महिमा फैली च्यारुं कुंट, आओ म्हारा… ॥१॥ वीर प्रभु री वाणी ऊपर, जीवन

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Aao Swamiji Aao Swamiji

आओ स्वामीजी लय : धरती धोरां री आओ स्वामीजी …..३ थाने झाला देर बुलावा, जाजम पलकाँ री बिछावाँ कुंम-कुम पगल्यां स्यूं पधरावां ॥ स्थायी ॥ थांरी पल-पल रटन लगावां, निश दिन पल-पल छिन-छिन ध्यावां । थांरी गौरव-गाथा गावां, आओ स्वामीजी ……३ ॥१ ॥ मानस मंदिर में बिठास्यां, दीया भक्ति रा जलास्यां । म्हारा तन-मन चरण

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Savriya Swamiji Aao Aangne

(लय : पणिहारी).  सांवरिया स्वामीजी ! आओ आंगणै हो,  ध्याऊं थांरो एक ध्यान। अंतर मन रा भगवान,  देव उतारुं थांरी आरती हो भिक्खु स्याम ॥ स्थायी सुधरी री छतरया गावै प्रीत स्यूं हो,  थांरी वीरता रा गीत दृढ़ संकल्प रा संगीत,  पहलो प्रवास शमशान हो ॥१ ॥ अंधेरी ओरी में हुयो च्यानणो हो,  चसग्या ज्ञान

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Mhari Sans Sans Me Bole Re Savriya Swamiji

सांस-सांस में बोले स्वामीजी म्हारे सांस-सांस में बोले रे, सांवरिया स्वामीजी  ओ परबत है राई रे औलेरे, गुण दरिया स्वामीजी  निजर पसार निहारुं सामां, उबा दिखै स्वामीजी  पल-पल, विष में अमृत घोले रे, सांवरिया स्वामीजी बात बात में शब्द शब्द में, घुर फिर आवे स्वामीजी  म्हारे घूमे औले दौले रे, सांवरिया स्वामीजी  कान लगार सुनूं

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Aao Aao Bhikshu Swami

आवो आवो भिक्षू स्वामी (लय : तेजा) आवो आवो भिक्षु स्वामी ! अब तो म्हारै आंगणियै,  ऊभा अड़ीकां कद का आपनै  पक्ष उजलो तिथि है तेरस घट में म्हारै चान्दणियो,  श्रद्धा रा फूल बिछावां सामनै ॥ स्थायी ॥ शब्द-शब्द और श्वास-श्वास में, भिक्षू री झणकार उठै। खातां पीतां सोतां उठतां, खोजां भिक्षु गया कठै  दर्शन

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