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Guru, Mahashraman

Man Madhuvan Me Aayi Malay Bahar Hai (Mahashraman)

आई मलय बयार है (लय-खड़ी नीम के नीचे …) मन मधुवन में आई मलय बयार है ।  फूल-फूल, पत्ते-पत्ते में सौरभ आज अपार है ।। आं ।। तेरा-पथ के निर्मल नभ में नये दिवाकर महाश्रमण । पूर्वाचार्यों की प्रभुता-विभुता के ठाकर महाश्रमण ।  धरती से अंबर तक जय-जयकार है ।।१।। नई उमंगें नई तरंगें नये […]

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Guru Darshan Geet

(लय- माय नी माय मुंडेर ) पूज्य वरों के श्री चरणों में (ज्ञानशाला दिल्ली की प्रशिक्षिकाओं द्वारा प्रस्तुत गीत – साध्वी जी कनकश्रीजी) ज्योति पुंज की ज्योति रश्मियां प्रज्ञा ज्योति जगाए। महाबोधि मंदार आर्य की अभिनव श्री सुषमाएं ।।  वंदन वंदन शत-२ वंदन । भरदों जीवन में नव स्पंदन ।। ① मौसम कितना आज सुहाना

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O Sashan Ka Sirtaj Tu Mhane Pyara Lage Se

(लय-म्हार हीरा जड़ियो आंगणियो कुण मैलों करग्यो रे ) मंद मंद मुस्कान तेरी मनड़े ने घणी लुभावै  तेरे चरणा की रज धुलि भव से पार लगावे-2 ओ शासन के सरताज तू तारण हारा लागे से -2  मै जपू सबेरे शाम नाम तेरा प्यारा लागे से माँ नेमा जी के लाल नाम तेरा प्यारा लागे से

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Pa Darash Aapke Guruvaram

(लय- अजीब दास्तां है ये) पा दरश आपके गुरुवरम्  महका है गंगा जल सा ये मन  कैसे करें अभिव्यक्ति भावों की  आये है सौभाग्य शाली क्षण । उठतेजपे, चलते जपे गुरु हीशाम भोर है  गुरु बुद्धि, गुरु चित ,गुरु मन विभोर है,  गुरु रात्रि, गुरु दिवस, गुरू स्वपन शयन है  गुरू काल, गुरु कला गुरु

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Guru Mera Mandir Guru Meri Pooja

गुरु मेरी पूजा गुरुगोबिन्दगुरु मेरा पारब्रह्म गुरु भगवंत  गुरु मेरा मन्दिर गुरु मेरी पूजा, गुरु मेरा पारब्रह्म  और न दूजा गुरु मेरा दाता भाग्य विधाता-२, विधाता  हर सुख साधन का गुरु ही प्रदाता  गुरु मेरी नैया गुरु ही खेवेया – 2  गुरु मेरी मंजिल गुरु मेरी छैया  गुरु ही ही किनारा, गुरु ही सहारा-2  गुरु

Guru

Ab Saunp Diya Is Jeevan Ka Sab Bhar Tumhare Hatho Me

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में। है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में॥ मेरा निश्चय बस एक यही, एक बार तुम्हे पा जाऊं मैं। अर्पण करदूँ दुनिया भर का सब प्यार तुम्हारे हाथों में॥ जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ, ज्यों जल में कमल का फूल

Guru

Jyoti Charan Abhyarthana

ज्योतिचरण अभ्यर्थना चरण शरण गुरु महाश्रमण की, झंकृत मन तंत्री के तार । श्रद्धा सुमनों से आपूरित, झेलो भक्ति भरा उपहार ।। विहस उठी थी दशो दिशाएं, पाकर झूमर कुल नंदन । मंगल गीतों से अभिगुंजित, माँ नेमा का घर आंगन । मोहनगारी मूरत तेरी, बन गई जन जन प्राणाधार ।।1।। सरदारशहर की पुण्यधरा पर,

Guru

Mahashraman Tera Gungan Karu

महाश्रमण तेरा गुणगान करू, मनकी येआश फले  परशब्द नहीं क्या गीत लिखूं श्रद्धा  के दीप जले ① आगम के सक्षम ज्ञाता, ओ जैन जगत के सूरज अहिंसा के पद‌ चिन्हो पर शांती का सवेरा जागे  अणुव्रत प्रेक्षा घर घर पहुचे जन जन की प्यास बने  मन श्रद्धा दीप जले ② प्रभु-वीतरागता तेरी विरले संतो में

Guru, Mata Ji, Pita

Milate Soubhagy Se Mata,, Pita Aur Guru

(लय- कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं) माता पिता और गुरु  मिलते सौभाग्य से माता पिता और गुरु उनके उपकार को तुमभुलाना नही  भाव सेवाका मन में भावित रहे उनके दिल को कभी भी दुखाना  नहीं  ① जन्मदाता है वो पालन पोषण करें ज्ञान देकर  जीवन सवारे सदा  मान अभिमान वश उनका अपमान कर बूढी

Guru, Krishna Ji, Shyam

Lakho Mahafil Hai Jaha Me

लाखों महफिल जहां मे गुरु वर (  यूं तो) तेरि महफिल सी महफिल नहीं है-2  स्वर्ग सम्राट हो या हो-चाकर, तेरे दर पे है दरजा बराबर तेरी हस्ती को है जिसनेजाना कोई आलम नया फिर नहीं है दरबदर खाके ठोकर जो थककर  आगया गर कोई तेरे दर पर  तूने  नजरोसे रस जो पिलाया  वो बताने

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