Jain Bhajan

Jain Bhajan, Paryushan

Aayo Jain Jagat Ro Pramukh Parv Samvatsari Re (paryushan)

महापर्व – संगान (लय- माता सीता की गोदी में हनुमत डाली मूदंडी) आयो जैन-जगत रो प्रमुख पर्व संवत्सरी रे ।  छायो सकल संघ में रंग, धर्म-जड़ हरी भरी रे ।। पर्यूषण पर्व नाम कहायो, भाद्रव महिनो सदा सुहायो, नियमित धवल पक्ष निरमायो, प्रायः पांचम रो दिन पायो । आयो जैन जगत रो प्रमुख पर्व संवत्सरी […]

Jain Bhajan, Paryushan

Parv Paryushan Aaya

पर्युषण पर्व  (लय-कजरा मोहब्बत वाला) महावीर ने पथ दिखलाया, पर्व पर्युषण आया  जैनियों की है पहचान, करने कमाई धर्मध्यान   समता के  फूल खिले है, अन्तर्मन दीप जले है   रोशन है सारा जहान, करले कमाई धर्म ध्यान  महावीर ने पथ दिखलाया—-  सत्य अहिंसा करुणा जीवन में हम अपनाये -2  सद्‌गुण मुक्ता को अपने खेतो में

Jain Bhajan, Paryushan

Chadariya Nai Rangayi Hai (khamat Khamna Geet)(paryushan)

खमत-खामणा गीत (तर्ज : तावड़ो धीमो पड़ज्या रे….) – साध्वी श्री राजीमतीजी चदरिया नयी रंगाई है-२ यदि रागद्वेष रो दाग लागग्यो, क्षमा सफाई है।चदरिया नयी रंगाई है-२  1. हाथ जोड़ सगलां स्यूं म्हांरा, खमत खामणा है।  बिना खमायां गति बिगड़ै, आसूत्र-धारणा है।  समाई खरी कमाई है। कि समता खरी कमाई है। 2. खमत खामणा मनस्यूं

Jain Bhajan, Paryushan

Maitri Diwas Manaye Hum (paryushan)

मैत्री दिवस मनायें हम (लय-धीरे धीरे बोल…) मैत्री दिवस मनायें हम, मन को विमल बनायें हम । सरल हृदय बन जायें हम, सबसे आज खमायें हम । हम ग्रंथियों को खोल लें, रूठों से हंसकर बोल लें ।। ।। भूलों का पुतला होता इन्सान । हंसता रोता करता है तूफान । नादान भी, गुणवान भी,

Jain Bhajan, Paryushan

Jaha Janam Janam Ke Ver Bhav Ka Hota Hai Nistara( Khamat Khamna)

पर्युषण प्यारा (लय : जहां डाल डाल पर….) जहां जनम जनम के वैर भाव का होता है निस्तारा। ये दिन संवत्सरी प्यारा-२ जहां प्राणी मात्र से प्रेम भाव का जो करता है इशारा ये पर्व पर्युषण प्यारा-२ जय शासनम् जिन शासनम् ।। ध्रुव ।। यहां कालचक्र की गति बनाई, नहीं अंत नहीं आदि’  घट बढ़

Jain Bhajan, Paryushan

Barse Bhadudo Rim Jhim (paryushan Parv)

बरसै भादूड़ो रिमझिम रिमझिम (लय-अपने पिया की…) मिलजुल कर आज सारा पर्युषण मनावां । बरसै भादूड़ो रिमझिम रिमझिम । धर्म जगावा आवो पर्युषण मनावां ।। आं ।। जैन धर्म रो महापर्व ओ शुभ संदेशो ल्यायो है । मोह नींद स्यू जागो लोगां सुंदर अवसर आयो है । मैत्री रा गीत गावां होSSSSS हरषावां ।।१।। अपणै

Jain Bhajan, Paryushan, Terapanth

Kshamayachana Geet (Saptlaskh Je Jati Prithwi) पर्युषण

क्षमा याचना गीत श्रीमज्जयाचारय‌ सप्त लक्ष जे जाती पृथ्वी श्री सप्त लक्ष अपकाय, इत्यादिक चउरासी लाख जे जीवायोनि खमाय ।  सुगुणा ! खमावियै तज खार ।।१।। गण में सन्त सती गुणवन्ता, सगला भणी खमाय ।  निज आतम प्रति नरम करी नै, मच्छर भाव मिटाय ।। सुगुणा ! खमावियै तज खार ।।२।। किणहिक सन्त सती सूं

Deeksha, Jain Bhajan

Ubha O Vairagan

तर्ज: तेजा ….. ऊभा ओ वैरागण ऊभा ओ वैरागण, दादोसा री पोल ओ वैरागण। कोई लिख यो दादोसा, वैरागण बाई न आगन्याजी राज ।। ध्रुव ।। आगन्या वैरागण, लिखी ए न जाय, ओ वैरागण। कोई छाती छलीजे, हिवड़ो होलरै जी राज ।।१।। छाती दादोसा, काठी कर राख ओ दादोसा। कोई हिवड़ों छलास्यां महारासा रे, ज्ञान

Bhachya, Jain Bhajan

Neminath Ki Jan

नेमीनाथ जी की जान नेमजी की जान बणी भारी, देखण को आये नर नारी असंख्या घोड़ा और हाथी, मनुष्य की गिनती नहीं आती। ऊंठ पर ध्वजा जो फहराती, धमक से धरती धर्राती समुद्रविजय जी का लाडला, नेम उन्हों का नाम।  राजुलदे को आये परणवा, अग्रसेन घर ठाम।  प्रसन्न भई नगरी सब सारी ।।१ ।। नेमजी…..

Jain Bhajan

Solah Sati Stawan ,Adinath Adi Jinvar Bandi

सोलह सती स्तवन लय: प्रभाती  : मुनि उदयरतनजी आदिनाथ आदि जिनवर बंदी, सफल मनोरथ कीजिये ए। प्रभाते उठी मांगलिक कामे, सोलह सतीनो नाम लीजिए ए।। 1. बाल कुमारी जग हितकारी, ब्राह्मी भरत नीं बेनडी ए। घट-घट व्यापक अक्षर रूपे, सोलह सती मांही जे बड़ी ए।। 2. बाहुबल भगिनी सती सिरोमणी, सुन्दरी नामे ऋषभ सुता ए।

Scroll to Top