Kabir

Adhyatmik, Kabir, Satsang, Vairagy

Uth Jag Musafir Bhor Bhayi

1 उठ जाग मुसाफिर उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहां जो सोवत है। जो सोवत है सो खोवत है, जो जागत है सो पावत है॥ उठ नींद से अखियां खोल जरा,  और अपने प्रभु से ध्यान लगा।  यह प्रीत करन की रीत नहीं,  प्रभु जागत है, तू सोवत है। उठ जाग मुसाफिर… जो […]

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Ud Ja Hans Akela

Album Name: Udd Ja Hans Akela Singer: Kumar Vishu Music Director: Anil Sharma. एक डाल दो पंछी बैठा, कौन गुरु कौन चेला । गुरु की करनी गुरु भरेगा, गुरु की करनी गुरु भरेगा । चेला की करनी चेला रे साधु भाई उड़ जा हंस अकेला || माटी चुन चुन महल बनाया, लोग कहे घर मेरा

Adhyatmik, Kabir, Nirgun, Satsang, Vairagya

Jindagi Pyar Ka Geet Hai

(लय – -जिंदगी प्यार का गीत है ) जिंदगी प्यार का गीत हैं.  हर दिल को गाना पड़ेगा  जिंदगी गमका सागर भी है हंसके उस पार जाना पड़ेगा जिसका जितना हो आचंल यहाँ पर   उसको सौगात उतनी मिलेगी  फूल जीवन में गर ना मिले तो  काँटो से निभाना पड़ेगा है अगर दूर  मन्जि ल तो

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Satsangat Se Sukh Milta Hai

सतसंगत से सुखमिलता है  जीवन का कण-2 खिलता है। सत्संगत से सद्‌ज्ञान मिले  सत्‌संगत से भगवान मिले पानी से पौधा फलता‌ है ② सतसंगत से वैराग्य बढ़े  सतसंगत से सौभाग्य बढ़े  दीपक से दीपक  जलता है ③ नास्तिक भी आस्तिकता पाता  पापी भी पावन बन जाता  चाबी से ताला खुलता है। मानव को  जैसा संग

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Maya Ke O Pujari Aage Ki Kuch Khabar Hai

माया के ओ पुजारी आगे की कुछ खबर है।  इस घर से और आगे एक दूसरा भी घर हैं। ① इतना ना जुलम करतू धरती भी काँप जाए।  वरना दुखी की आहे तेरा निशां मिटाये  अब भी जरा संभल तू डर मौत का अगर है। 2) जो पाप कर चुके हैं और अब भी कर

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Jo Bhi Mila Khajana Use Bant Jana Re

मिला खजाना (तर्ज : नानी तेरी मोरनी को मोर ले गया……….) जो भी मिला खजाना उसको बांट जाना रे। क्या जाने कब होगा इस धरा पर आना रे । । ध्रुव ॥ बहुत कमाया बहुत ही खाया काफी मौज उड़ाई। श्रम से कोड़ी कोड़ी जोड़ी पूंजी खूब बढ़ाई। मिट्टी के सब खेल खिलौने मत फस

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Durlabh Manav Jeevan

दुर्लभ मानव जीवन (लय : ऐ मेरे दिले नादान……..) दुर्लभ मानव जीवन तेरे हाथ मे आया है,  इस क्षण भंगुर जग में, मन क्यों ललचाया है। दुर्लभ……. ॥ ध्रुव ॥ यह तन तो मिट्टी का, एक बना खिलौना है,  इस नश्वर तन को तो, इतना क्या धोना है,  जिसने छोडी ममता उसने सुख पाया है।

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Mat Kar Re Mat Kar Re

-: आखिर तो जाणो पड़सी :- (लय : सुण सुण रे…………) मत कर रे, मत कर रे मत कर रे तूं मोह जगत स्यूं, आखिर तो जाणो पड़सी ॥ १. सुख स्यूं जीणो, सुख स्यूं मरणो, अरिहन्तां रो साचो शरणो । बेटा पोता के करसी, आखिर तो जाणो पड़सी ॥ २. चार दिनां री चमक

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Kiwadi Khol Hiye Ri

किंवाडी खोल हियैरी (लय : मिलो न तुम हम घबरायें) माटी री मूरत है काया, क्यूं तू देख लुभायो ? किंवाड़ी खोल हियै री। झूठी सारी ममता माया, थोथै भरम भुलायो, किंवाड़ी खोल हियै री ॥ स्थायी ॥ जीणो है थोड़ो सो, किसी बात पर तूं बण्यो आकरो ? खावै पंसेरी री, फैंके जो दूजां

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Jhuthi Jag Ki Maya

झूठी जग की माया (लय : मेरे मन की गंगा) झूठी जग की माया, और मिट्टी की यह काया रे। बोल बन्दे ! बोल, तूने जाना क्यों नहीं। १. खाली हाथ तूं आया जग में, खाली हाथ ही जायेगा, चुग जायेगी खेत ये चिड़िया, हाथ मसल रह जायेगा। पग पग खड़े लुटेरे, तूं लूट जाना

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