Kabir

Adhyatmik, Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

Thari Ankhya Me Loi Ro Ufan

थांरी आंख्या में लोही रो ऊफाण थांरी आंख्या में लोही रो ऊफाण। छोड़ो क्यूं कोनी क्रोध रो नशो ?  थांरी अक-बक बकणै री पड़गी बाण। दूजां नै काले नाग ज्यूं डसो ॥ ध्रुव ॥  क्रोध बड़ो दुर्गुण दुनिया में, घट-घट में वसनारो। जिण घट में नहि क्रोध निवासी, बो नर जगत-सितारो ॥ पंचेन्द्रिय प्राणी री […]

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Jindagi Anmol Hai Yah

जिंदगी अनमोल लय : मेरा जीवन कोरा कागज जिंदगी अनमोल है यह, क्यों तूं खो रहा है यही जगने की बेला, क्यों तूं सो रहा। १. तुच्छ भौतिक आस में क्यों, हारता जीवन। मानता जिसको तू अपना, वह पराया धन। है नहीं कुछ भी यहां तू, व्यर्थ रो रहा ॥ २. जाग निद्रा त्याग कर

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Jeevan O Do Din Ro

जीवन ओ दो दिन रो (लय : होठों को छूलो तुम) जीवन ओ दो दिन रो पाणी ज्यूं बह ज्यासी, लारै जस अपजस री, बस बातां रह ज्यासी ॥ध्रुव ॥ १. धन जोबन परिजन रो, संजोग सुरंग मिल्यो, ई तरुवर री डाली, तूं फूल विशेष खिल्यो, पण एक पून झटको, पटकी दे दहलासी ॥१ ॥

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Das Gayo Kalo Re

डस गयो कालो रे कंवर रोहितास ने डस गयो कालो रे कंवर रोहितास ने।  छाती भर आवे बेटा देख्या थांरी लाश ने ॥ १. फूल तोड़ने बेटा गयो रे तू बाग में।  डस गयो कालो बेटा गोरे गोरे हाथ में।  जुलम कियो रे बेटा-२ इस काले नाग ने ॥ छाती ।। २. बोल तू बोल

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Chetan Ab To Chet

-: चेतन अब तो चेत :- (लय : एक तेरा साथ हमको..) चेतन अब तो चेत। चेतन अब तो चेत अवसर यूं ही बीत्यो जावै है – २ क्यूँ जीवन व्यर्थ गंमावै है चेतन अब तो चेत । अनन्त काल स्यूँ तूं, भव-भव में भटक रह्यो, रे मूरख अज्ञानी गहरी मूर्छा में, तूं भूल गयो

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Ab Sounp Diya Is Jeevan Ka Sab Bhar

-: अब सौंप दिया इस जीवन का :- (लय : दिल लूटने वाले जादूगर………….) अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में। है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में। मेरा निश्चय बस एक यही, इक बार तुम्हे पा जाऊँ में आ ऽ ऽ -२ अर्पण कर दूँ दुनिया भर

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Tu Aayo Hai Ekalo Re

तू आयो है एकलो (लय : आभै चिमके बिजली) तँ आयो है एकलो रे भाई जासी एका एक। कोई न सागे चालसी – तू करलै जरा विवेक । देख हालत औरां की रे – करे क्युं थारी म्हारी रे ॥ क – अन्तर ज्ञान जगाले – जगत में साथी नहीं है कोई थांरो। सगला भुगते

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Niklenge Ik Din To Tan Se Ye Pran

मंजिल (लय : एक दिन बिक जायेगा माटी के मोल) निकलेगे इक दिन तो, तन से ये प्राणपीछे रह जायेगे मिट्टी के मकान  मोटर विमान ट्रेन आयेगे ना काम परिजन ले जायेगे अर्थी को श्मशान ॥ मनमानी नादानी चाहे कर ले जीवन के धट को विष से चाहे भर ले ये साथी ये भाई, ये

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Kya Lekar Tu Aaya Jagat Me

क्या लेकर तू आया जगत में लय :- चाँदी की दीवार न तोड़ी क्या लेकर तू आया जगत में, क्या लेकर तू जायेगा।  सोच समझ ले रे बन्दे, नहीं आखिर तू पछतायेगा ॥ स्थायी ॥ बचपन बीता इन गलियों में यौवन भी रंग रलियों में।  खूब सजाया तूने तन को, फूलों और कभी कलियों से

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Re Panchhi Is Pinjre Ka Tu

पिंजरा (लय : तैरापंथ महान रे) रे पंछी इस पिंजरे का तू क्या करता अभिमान रे आखिर पिंजरा पिंजरा ही है, तु है बन्दीवान रे। कुदरत ने मिट्टी का तेरा प्यारा पिंजरा बना दिया,  खुब सजाया बाहर से, और रंग सुनहरा चढ़ा दिया, पर अन्दर से कैसा है यह सोच जरा इन्सान रे। आज पुष्ट

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