Kabir

Adhyatmik, Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

Tane Ajab Banayi Bhagwan

माटी का तन माटी का माटी का तन माटी का-माटी का तन माटी का,  तने अजब बणायो भगवान, खिलौना माटी का,  तने सुन्दर बणायो भगवान, खिलौना माटी का ।। नैन दिया तने हरि दर्शन ने, तने कान दिया सुन ज्ञान ।। १ ।। दांत दिया थारे मुखड़े री शोभा, तने जीभ दिनी रट रांग ।। […]

Adhyatmik, Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

Thari Kaya Ro Gulabi Rang

थारी काया रो गुलाबी रंग (तर्ज : थारी आँख्या में लोही रो). थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी, उड़ जासी रे फिको पड़ जासी ।। 1 हस्या-हरया रुँखड़ा उगीया रे बाग में, पान-फूल एक दिन झड़ जासी ।। .2सूरज उगीयो दोफारो तपियो, साझं पड़या सूरज ढल जासी ।। 3रैन बसेरो पंछि किन्हो, भोर भया

Adhyatmik, Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

E Tan Ro Pal Ro Bharos Nahi

ई तन रो ! तर्ज : दिल करता…. रचयिता : मुनि मधुकर ई तन रो, पल रो भरोसो नहीं, ई तन रो,  क्यूं इत्तो इतरावै, क्यूं दुष्कर्म कमावै, कद दिवलो बुझ ज्यावै ।। दिन-रात एक धुन, भाग्यो-भाग्यो फिरै है,  ऊड़े है  आकाश नदी, सागरां नै तिरै है, हो….  पईसै रे खातर धरम गमावै ।। १

Adhyatmik, Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

Chand Dino Ka Jina Re Bande

चन्द दिनों का जीना रे बन्दे  (तर्ज : कसमें वादे प्यार वफा सब……) चन्द दिनों का जीना रे बन्दे, ये दुनिया मकड़ी का जाल,  क्यों डूबा विषयों में पगले, हाल हुआ तेरा बेहाल ।।१।। आखिर होगा तेरा जाना, कोई न साथ निभायेगा,  तेरे कर्मों का फल बन्दे, साथ तुम्हारे जायेगा,  धन दौलत से भरा खजाना,

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagya

Manushy Janm Anmol Re

मनुष्य जन्म अनमोल रे,  इसे मिट्टी में नही, रोल रे  अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,  कभी नही कभीनही कभी नही,  राम नाम तू बोलरे जीवन में रस घोल रे, अब जो मिला है– तूहै बुलबुला पानीका, मत कर जोर जवानीका, नेक कमाई कर ‌ले रे बन्दे, पता नही जिंद्‌गानी का सबसे मीठा बोल

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagya

Jeevan Ka Bharosa Nahi,satsang

(तर्ज : मैया नवरातों में…..) जीवन का भरोसा नहीं, कब मौत आ जायेगी, काया और माया तेरी, तेरे साथ ना जायेगी।। काया पे गूमान ना कर, ये तो माटी का खिलौना है, तेरा चाहा होना नहीं, लिखा भाग्य का होना है, तेरा और मेरा छोड़ – 2, जीवन ज्योति बूझ जायेगी ।। 1 ।। दौलत

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagya

Sanso Ka Kya Bharosa,

भजन (लय – यूही कोई मिल गया था सरे राह चलते -2) सांसो का क्या भरोसा- २ रुकजाये चलते चलते -2 जीवन की है जो ज्योति -२ बुझ जाये जलते जलते 2 सांसों का क्या भरोसा — -जीवन है चार दिनका -2 दो दिन की हैज‌वानी-2 जब आयेंगा बुढापा -२थक जाये चलते चलते  सांसो का

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagya

Kabhi Pyase Ko Pani Pilaya Nahi

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं , बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा, कभी गिरते हुए को उठाया नहीं, बाद आंसू बहानेसे क्या फायदा कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं  बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा  मैं तो मंदिर गया पूजा आरती की  पूजा करते हीमन मे ख्याल आ गया,  कभी मां-बाप की सेवा की

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagy

Mhane Mukti Su /ho Santa/swarga Su /aayo Telephone

म्हाने मुक्ति सु / हो सन्ता/स्वर्गा सु आयो टेलीफोन बुलाओ ,आयो राम रो, म्हाने स्वर्गा से आयो टेलीफोन बुलाओ आयो राम रो 1,एक मिनट प्रभु म्हाने  दिज्यो  करूबेटा सु बात2 तिजोर्या मे धन भर्यियो है,चारु थे लिज्यो थे बाट  2,एक मिनिट प्रभु म्हाने दिजयो, करू बहुआं सुबात 2 सिंदुका मैं कपड़ो भरयो है, देरान्या, जेठान्या

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Mati Ri Aa Kaya Aakhir Mati Me Mil Jyav Hai

माटी री आ काया थारी, माटी में मिल जावली। क्यांरो गर्व करे रे मनवा, क्यां पर तूं इतरावे है। आ सांसों रो विश्वास नहीं, कद आती जाती रूक जावे। जीवन में झुकनो नही जाने, (पण जम रे आगे झुक जावे। २) एक कदम तो उठ गयो, दूजो कूंन जाने उठ पावेलो। क्यांरो गर्व… इन तन

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