Mahavir Swami

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Kare Hum Veer Prabhu Ka Dhyan

(लय- धर्म की लौ जलाये हम) करें हम वीर प्रभु का ध्यान । करुणानिधि ! करुणाकर ! तारो, कर दो अब कल्याण ।। १. अन्त किया आठों कर्मों का, केवल दीप जलाया, अतिशय धारी, पर उपकारी, सोया शौर्य जगाया ।  अजर अमर अविनाशी तुमने, प्राप्त किया निर्वाण ।। 11 २. चौरासी में घूम रहे हम, […]

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Shraddha Se Naman Kare Hum

श्रद्धा से नमन करें हम, तेरा अनुसरण करें हम । पल-पल में स्मरण करें हम, महावीर स्वामी ।। १. भौतिक सुख छोड़ सारे, संयम का पथ अपनाया, ममता के तोड़ धागे, आत्मा में ध्यान लगाया । जग को परिवार बनाया, तूं मैं का भेद मिटाया,  करुणा का रस बरसाया, महावीर स्वामी ।। २. भीषण उपसर्ग

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Bhagwan Tumhara Dhyan Dharu

भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं महावीर तुम्हारा ध्यान धरूं अन्तर-आत्मा का ज्ञान करूं १. हर सांस गीत बने मेरा, हर चरण जीत बने मेरा । आनन्द सुधा का पान करूं, भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं ।। २. मिटे निराशा का घेरा, हो सदा प्रफुल्लित मन मेरा । समता सरिता में स्नान करूं, भगवान

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Maya Mamta Moh Ka Mahan

(लय : उंची उंची दुनियां की दीवारें ) माया ममता मोह का महान बन्धन तोड़के जी तोड़ के हो महावीर, कैसे आप निकले घर छोड़के… २ रुखी सुखी रोटी भी तो हम से छुट नहीं सकती,  सड़ी गली इस वे चीजो से, काया रुठ नीं सकती।  कैसे पकवान छोड़े खाने के राज रसोड़े,  चले गये

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Run Jhum Baje Ghooghara

(लय : रुण झुन बाजे घुंघरा) रूण झुन बाजे घुंघरा कोई झीणी बाजे ताल रे-२ सोने की असवारी मांही-२ आवे प्रभु महावीर रे ………..जीओ-३ अन्तरा ए तो सिद्धार्थ रा लाडला, ए तो तीन लोक रा नाथ रे, जैन धर्म रे उपदेशां ने=२ फैलाया प्रभु वीर रे… .जीओ-३ ॥१॥ थांरा दर्शन करवा आया, ऐ तो देव

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Chandani Fiki Pad Jyave

(लय : सूरज बादल में छिप जा रे) चांदनी फीकी पड़ जावे, चमक तारां री उड़ जावे,  म्हारै महावीर र तेज सामने, सूरज शरमावे ॥चांदनी.. ॥ अन्तरा त्रिशला थारां लाडलाजी सिद्धार्थ रा लाल,  वीरजी-२..  गर्भ आवताँ रत्न बरसिया, दुनिया हुई निहाल । चांदनी….. ऐरावत चढ़ इन्द्र आविया, जन्म लेवता पाण, वीरजी-२.. पाण्डुशिला पर न्हावण करायो,

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Trishala To Jayodo In Duniya Me Jadu Kargyo

  (लय : नखरालो देवरीया भाभी पर जादू) त्रिशला रो जायोड़ो, इण दुनियां में जादू करग्यो जादू करग्यो ओ तो जादू करग्यो । त्रिशला रो जायोड़ो… अन्तरा चैत सुदी तेरस दिन, राजा सिद्धार्थ घर जायो ।- २ कुण्डलपुर में जन्म लियो है, घर घर आनन्द छायो ॥-२ राज घराने रो सूरजियो, इण दुनियाँ में जादू

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Ghunghroo Chham Chhama Chham

(लय : ढोला ढोल मजीरा बाजेरे) घुंघरु छम-छमा छम छन ननननन बाजै रे,  त्रिशला नन्दन वीर प्रभु, म्हारे हिवड़े बिराजे रे ॥ कुन्डलपुर में जनम्या भगवन, घर घर मंगलाचार,  देव देवियां मंगल गावे, प्रभु लियो अवतार. ……. घुंघरु ॥१ ॥ त्रिशला नन्दन मंगलकारी, मंगल प्रभु रो नाम,  वीर प्रभु रो ध्यान धरो, सब मिलकर आठों

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Bahut Dhyan Dharte Hai

(लय : बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम) बहुत ध्यान धरते हैं महावीर का हम  नाम चाहे ले लो-२ जितना भी कम ऽऽ ।  बहुत ध्यान धरते है महावीर का हम ॥ १. लाखों की नैया को तुमने ही तारी नाम तुम्हारा मंगलकारी, करुणा के सागर-२ प्यासे हैं हम ऽऽ ।  बहुत ध्यान धरते है

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Kundalpur Wale

कुंडलपुर वाले तुमको जपुं मैं आदूँ याम।  त्रिशला के लाले चरणों में कोटि प्रणाम। अंतरा १. अखिल निरंजन, भव भय भंजन त्रिशला नंदन,  कलुष निकंदन, मैं रज कण, तूं मस्तक चंदन,  तूं ही तो मेरा तीर्थ धाम ॥ महावीरा… २. अष्ट कर्म के हो तुम हंता, दर्शन ज्ञान चरित्र अनंता,  मैं निर्बल तूं, अति बलवंता,

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